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DNA: जिनके बच्चे तोड़फोड़ करेंगे..उनके घरवाले भरेंगे, इटली में 'योगी मॉडल' का विश्लेषण

इटली में बच्चों द्वारा सरकारी या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर अब माता-पिता को भारी जुर्माना भरना होगा. उत्तर प्रदेश के 'योगी मॉडल' से मिलते-जुलते इस नए कानून और इसके असर का पूरा विश्लेषण पढ़ें.

Written By Ravindra Pratap Singh
Published: Oct 21, 2026, 11:10 PM IST | Updated: Oct 21, 2026, 11:15 PM IST
Image Credit: बुलडोजर से लेकर सख्त कानून तक... विदेशी धरती पर क्यों हो रही 'योगी मॉडल' की चर्चा?
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मित्रों, अब हम..हिंसक प्रदर्शन के खिलाफ इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी के नए कानून का विश्लेषण करेंगे. एक हफ्ते पहले इटली की जनता अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरी थी, लेकिन सरकार विरोधी प्रदर्शन इतने अराजक हो गए कि मेलोनी सरकार को, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बेहद सख्त कदम उठाने पड़ गए. आपको याद होगा जिस तरह NRC दंगों के दौरान यूपी में दंगाइयों से जुर्माना वसूला गया था, ठीक उसी दिशा में इटली की सरकार भी आगे बढ़ चुकी है

नए नियमों के मुताबिक अगर नाबालिग प्रदर्शनकारियों ने किसी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया, तो नुकसान की आर्थिक कीमत नाबालिग के माता-पिता को भरनी होगी . यानी जो तोड़फोड़ करेगा, उसका परिवार हर्जाना भरेगा. नाबालिग यानी बच्चों के लिए सख्त प्रावधान लाना साफ-साफ बताता है, कि इटली में कथित प्रदर्शन अब हिंसक और बेकाबू हो गए हैं . इसके साथ ही साथ...अगर कोई प्रदर्शनकारी हिंसक गतिविधियों में शामिल होगा, तो उसके ऊपर तकरीबन 21 लाख रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा. अगर हिंसक गतिविधियों की वजह से किसी को चोट पहुंचेगी तो जुर्माने के साथ ही साथ, 5 साल की जेल का भी प्रावधान निश्चित किया गया है .

प्रदर्शन के नाम पर हिंसा, अपराध नहीं चलेगा

अराजकता और हिंसा करने वाले नाबालिग अपराधियों को भी पुलिस अपनी हिरासत में रख पाएगी . प्रधानमंत्री मेलोनी ने ये साफ कर दिया है, कि अब अराजकता की कीमत आम जनता नहीं भरेगी, कीमत वही भरेगा जो नुकसान करेगा. सख्त प्रावधानों की जानकारी देने के साथ ही साथ, मेलोनी ने एक और अहम बात कही है . अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पीएम मेलोनी ने लिखा है - प्रदर्शन करना एक नागरिक का अधिकार है लेकिन हमारे शहरों को आग लगाना अधिकार की श्रेणी में नहीं आता है . हिंसा और चोरी चकारी, प्रदर्शन नहीं बल्कि अपराध कहे जाते हैं.

 

 

इतिहास की किताब में इटली को 'क्रांति की धरती' कहा गया

इतिहास की किताबों में इटली को क्रांति की धरती का नाम दिया गया है . 18वीं सदी से लेकर 20वीं सदी में दूसरे विश्वयुद्ध तक...इटली ने कई राजनीतिक और सामाजिक क्रांतियों को देखा है, लेकिन इस बार कथित क्रांति को अपराध की परिभाषा दी गई है . इसकी वजह है वो असीमित नुकसान, जो हालिया प्रदर्शनों ने इटली में किया है . सिर्फ 6 से 7 दिनों के अंदर प्रदर्शनों की वजह से इटली को कितने जख्म मिले हैं...ये समझने के लिए आपको DNA की वीडियो रिपोर्ट बेहद गौर से देखनी और समझनी चाहिए .

खाद्य और महंगाई को लेकर शुरू हुए थे प्रदर्शन

16 अक्टूबर...ये वो तारीख थी जब इटली में खाद्य महंगाई और डीजल के दाम को लेकर प्रदर्शन शुरु हए थे...और महंगाई को लेकर उठाई जा रही है मांग...कब महाभारत में तब्दील हो गई...ये किसी को पता ही नहीं चला...जब प्रदर्शनकारियों की भीड़ काबू से बाहर हुई...तो सबसे बड़ी कीमत बड़े शहरों में चलने वाले उद्योगों को चुकानी पड़ी. इटली के बड़े शहरों में से एक मिलान में हिंसा और हंगामे की वजह से 10 करोड़ 61 लाख रुपए का नुकसान हुआ . एक और बड़े शहर बोलोग्ना में..प्रदर्शनों की वजह से 11 करोड़ 67 लाख रुपए का नुकसान हुआ है . ट्यूरिन में तकरीबन 17 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है.

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तस्वीरों में दिखी सड़कों की अराजकता

इन्हीं प्रदर्शनों से वो तस्वीरें भी सामने आईं जिनकी वजह से इसे जनता की मांग नहीं, बल्कि सड़कों पर अराजकता करार दिया गया . मिलान और बोलोग्ना में प्रदर्शनकारियों ने बड़े ब्रांड्स के स्टोर यानी दुकानें लूट लीं . बेकाबू भीड़ कार्फूर, अंडर आर्मर और आर्क टेरिक्स जैसे ब्रांड्स के शो रूम में घुस गई और सामान लूट लिया गया . कुछ रिपोर्ट्स में ये दावा भी किया गया कि...दुकानों से लूटे गए सामान को ब्लैक मार्केट में बेचा भी गया...इसी वजह से इटली की पीएम मेलोनी को, इन प्रदर्शनों को अपराध की संज्ञा देने पर मजबूर होना पड़ा.

लूटपाट ही नहीं प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर भी किए हमले

इटली के बड़े शहरों में सिर्फ लूटपाट ही नहीं हुई, बल्कि पुलिस और प्रदर्शनकारी आमने-सामने भी आए. इटली की सरकार के मुताबिक 16 तारीख से लेकर अब तक...झड़पों में 240 पुलिसवाले घायल हो चुके हैं, जिनमें से 2 दर्जन गंभीर रूप से घायल हैं . पुलिस ने 271 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया और तकरीबन 15 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं. हालात इतने अस्थिर हो चुके हैं कि मिलान में इटली की सरकार ने फौज को तैनात कर दिया है..जिस इटली को कभी संतों और कवियों की भूमि कहा जाता था,...उस इटली की धरती पर आज अराजकता का दौर अपने पांव पसार चुका है.

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रवींद्र प्रताप सिंह ने साल 2015 में जागरण.कॉम से डिजिटल मीडिया में कदम रखा मौजूदा समय वो ज़ी न्यूज डिजिटल में चीफ सब एडिटर हैं. अगस्त 2025 में उन्होंने ज़ी न्यूज ज्वाइन किया है. रवींद्र देश और दुनिया की खबरों के अलावा खेलों में क्रिकेट जगत और क्राइम की खबरों पर बेहतरीन पकड़ रखते हैं. इसके पहले रवींद्र रिपब्लिक भारत में इवनिंग शिफ्ट के इंचार्ज रहे और शाम की शिफ्ट संभालते हुए होम पेज की जिम्मेदारी रवींद्र के ऊपर थी. उससे पहले रवींद्र ने जनसत्ता और न्यूज नेशन में भी शाम की शिफ्ट और होम पेज की जिम्मेदारी बखूबी निभाई. इसके पहले रवींद्र ने 5 सालों तक पी7 और लाइव इंडिया जैसे न्यूज चैनलों में काम किया था. रवींद्र आकाशवाणी में काम करने का अनुभव रखते. अवध यूनिवर्सिटी से मॉस कम्युनिकेशन से पोस्ट ग्रेजुएट रवींद्र पिछले डेढ़ दशक से सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं. आप रवींद्र से जुड़ने के लिए Ravindra.Singh@India.com पर मेल कर सकते हैं या फिर फेसबुक पर संपर्क करने के लिए https://www.facebook.com/pintu.singh.397 और एक्स पर https://x.com/rs66533 रवींद्र से संपर्क किया जा सकता है. 
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