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CJP Protest Delhi Full Details: पिछले 48 घंटे से एक शब्द ट्रेंड कर रहा है. ये शब्द है प्रोटेस्ट. दिल्ली में जंतर-मंतर पर आज कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन था. इस प्रदर्शन की चर्चा चारों तरफ थी. प्रदर्शन को लेकर प्रशासन और सीजेपी के बीच टकराव की आशंका भी जताई जा रही थी. सुबह 10 बजे से लेकर अब तक दिल्ली कैसे प्रदर्शन बनाम डिटेंशन की लड़ाई का केंद्र बन गई. ये आज हम आपको विस्तार से बताएंगे. साथ ही आप ये भी जानेंगे, कैसे दिल्ली पुलिस की नारी शक्ति ने आज सीजेपी की चुनौती को पार किया.
देश के दूसरे राष्ट्रपति और प्रसिद्ध विद्वान डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का विचार था कि किसी भी आंदोलन की सफलता इस बात में है कि वह जनता का समर्थन कितना जुटा पाता है, न कि इस बात में कि वह आम जनजीवन को कितना बाधित करता है.
सीजेपी की ओर शनिवार को दिल्ली में हुए प्रदर्शन के दौरान करीब 5 हजार 900 लोगों को हिरासत में लिया गया. हालांकि सीजेपी का दावा है कि करीब 15 हजार लोगों को हिरासत में लिया गया है. प्रदर्शनकारियों को कंट्रोल करने के लिए पूरी दिल्ली को 24 जोन में बांटा गया था. इसमें से 19 जोन में महिला पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था. जंतर-मंतर के आसपास महत्वपूर्ण और संवेदनशील जोन की जिम्मेदारी महिला अधिकारियों को दी गई थी.
जंतर-मंतर के आसपास पुलिस का मजबूत सुरक्षा घेरा था. 4 किलोमीटर के दायर में करीब 20 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात थे. इसी वजह से प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर तक नहीं पहुंच पाए. सीजेपी के आंदोलन के समर्थन में आज आम आदमी पार्टी, लेफ्ट के नेता भी सड़क पर उतरे, ममता बनर्जी को भी जंतर मंतर जाने के रास्ते से हिरासत में लिया गया. हालांकि कांग्रेस ने आंदोलन से दूरी बनाए रखी.
प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुए टकराव के कारण दिल्ली में जगह-जगह आम लोगों को पऱेशानी झेलनी पड़ी, कहीं लोग जाम में फंसे तो कहीं सुरक्षा इंतजाम के कारण लोगों के परेशानी हुई. दिन खत्म होने के बाद होने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने रविवार को फिर से प्रदर्शन का ऐलान किया है.
प्रदर्शन का नेतृत्व करने के लिए अभिजीत दीपके को मुंबई से दिल्ली आना था. सुबह करीब सवा सात बजे वो मुंबई से दिल्ली के लिए फ्लाइट में सवार हुए. उनके साथ सौरभ दास और आशुतोष रांका भी थे. लेकिन जब विमान दिल्ली एयरपोर्ट पर लैंड हुआ तो दिल्ली पुलिस के अधिकारियों का एक दल विमान में पहुंचा. अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका को हिरासत में लिया गया.
मित्रों | घर.. विमान.. सड़क, हर स्पॉट से हिरासत पुलिस एक्शन में.. 5900 लोग हिरासत में CJP Vs दिल्ली पुलिस की 'नारी शक्ति'
— Zee News (@ZeeNews) October 10, 2026
सीजेपी के नेता कह रहे थे कि पुरुष अधिकारियों को आगे कीजिए. महिला कांस्टेबल की तैनाती की मांग अपने बार-बार सुनी होगी. लेकिन कॉकरोच नेताओं ने पुरुष अधिकारियों को आगे करने की मांग की. ये सीजेपी की प्रदर्शन शक्ति पर दिल्ली पुलिस की महिला शक्ति की पहली और निर्णायक बढ़त थी. ऐसा हम क्यों कह रहे हैं, इसे थोड़ा विस्तार से समझिए.
सीजेपी के शीर्ष नेतृत्व को विमान से ही हिरासत में लेकर सड़क पर हंगामे की आशंका को शून्य कर दिया गया. पूरी कार्रवाई को अंजाम देने के लिए दिल्ली पुलिस ने विशेष रणनीति के तहत महिला पुलिसकर्मियों को सीधे विमान के अंदर भेजा था. दीपके और उनके सहयोगी दिल्ली पुलिस के पुरुष अधिकारियों से टकराव की स्थिति पैदा कर सकते थे. इसलिए महिला पुलिसकर्मियों की टीम भेजी गई.
इस टीम ने जिस विनम्रता से कार्रवाई की उससे अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका को विरोध या हंगामा करने का अवसर ही नहीं मिला. 20 जुलाई को जब सीजेपी ने प्रदर्शन किया था, तब हंगामे के बाद सुरक्षाकर्मियों पर आरोप लगाए गए थे. पुलिस इस बार सचेत थी. इसलिए सीजेपी के प्रोटेस्ट को कंट्रोल करने के लिए महिला पुलिस को आगे किया गया. महिला शक्ति को केंद्र में रखकर रणनीति बनाई गई.
सीजेपी के आंदोलन पर दिल्ली पुलिस ने अपना पक्ष रखने के लिए संयुक्त आयुक्त नुपूर प्रसाद को आगे किया. जंतर-मंतर, कनॉट प्लेस और दूसरे हॉटस्पॉट पर ऑल वीमेन यूनिट को तैनात किया गया. अर्धसैनिक बलों की 5 ऑल वीमेन कंपनियों के साथ ही दिल्ली पुलिस, यूपी पुलिस, रेलवे की महिला अधिकारियों को भी तैनात किया गया था.
प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए फ्रंटलाइन पर महिला सुरक्षाकर्मियों को विशेष तौर पर तैनात किया गया था. मकसद था प्रदर्शनकारियों से निपटने के दौरान अधिक संवेदनशीलता और संयम का परिचय देना और अनावश्यक विवादों से बचना. दिल्ली को आज 24 जोन्स में बांटा गया था.. इनमें से 19 जोन्स पर पुरुष पुलिसकर्मियों के साथ ऑल महिला बटालियन भी तैनात थीं.
शनिवार को दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था की कमान किन महिला पुलिस अफसरों पर थी. उनका नाम भी आपको जानना चाहिए. जंतर मंतर जो आज का सबसे संवेदनशील जोन था. उस जोन की जिम्मेदारी एडिशनल डीसीपी गीतांजली खंडेलवाल की थी. जोन 6 यानी पार्क होटल के आसपास सुरक्षा की जिम्मेदारी एडिशनल डीसीपी तनुश्री की थी. संसद मार्ग और टॉलस्टॉय मार्ग के पास के क्रॉसिंग की जिम्मेदारी एडिशनल डीसीपी ऐशवर्या सिंह के पास थी. राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 6 का इलाका एडिशनल डीसीपी विदुशी कौशिक की निगरानी में था. इंदीरा गांधी स्मृति के पूरे क्षेत्र की जिम्मेदारी एडिशनल डीसीपी सृष्टि पांडे के पास थी और पंचशील मार्ग के पास सूरक्षा की पूरी जिम्मेदारी एडिशनल डीसीपी लक्ष्मी कनावत की थी.
यानी सभी संवेदनशील और महत्वपूर्ण जगहों पर प्रदर्शनकारियों को रोकने की जिम्मेदारी महिला पुलिस के कंधों पर थी. इसका पॉजिटिव इंपैक्ट भी दिखा. आज प्रदर्शन के दौरान महिला पुलिसकर्मी से एक प्रदर्शनकारी के संवाद का वीडियो भी वायरल हो रहा है. यानी दिल्ली एयरपोर्ट पर अभिजीत दीपके को हिरासत में लेने से लेकर प्रदर्शनकारियों को कंट्रोल करने तक अग्रिम दस्ते में महिला सुरक्षाकर्मियों को रखा गया. ये रणनीति असरदार रही. प्रदर्शन के दौरान कोई अनावश्यक विवाद नहीं हुआ. हालात कंट्रोल में रहे.
सुबह से ही प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा इंतजाम की पूरी परीक्षा ली. दिल्ली-NCR में जगह-जगह प्रदर्शनकारी सड़क पर उतरे. सबका लक्ष्य जंतर-मंतर तक पहुंचना था. सुरक्षा की तैयारी ऐसी थी कि जहां भी प्रदर्शनकारी दिखे उन्हें तत्काल कंट्रोल किया गया. बस में बैठाया गया और डिटेंशन सेंटर भेज दिया गया.
जिन जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों में संघर्ष हुआ, उनमें मंडी हाउस, कनॉट प्लेस, सिंघु बॉर्डर और जंतर मंतर की जगह शामिल रही. प्रदर्शन से पहले ही दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को या तो नजरबंद कर दिया या फिर उन्हे अरेस्ट कर डिटेंशन सेंटर में भेजा जाने लगा. दिल्ली के कई चौक चौराहे पर लगातार निशेधाज्ञा से संबंधित अनाउंसमेंट किए जा रहे थे और आम आदमी से कानून व्यवस्था बनाए रखने की अपील भी की जा रही थी.
मंडी हाउस और गोल डाकखाने के पास माहौल उस वक्त बेहद तनावपूर्ण हो गया जब पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच भिड़ंत हो गई. कनॉट प्लेस के हनुमान लेन इलाके में अचानक उपद्रवियों ने पुलिस दल पर पथराव शुरू कर दिया. इस अचानक हुए हमले में कुछ पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए.
दिल्ली के जंतर मंतर के पास ड्रोन से लगातार निगरानी की जा रही थी. दिल्ली पुलिस कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए चप्पे चप्पे पर ड्रोन ऑपरेट्रर्स की मदद ले रही थी. कनॉट प्लेस, जनपथ, मंडी हाउस, संसद मार्ग और आईटीओ छावनी में तब्दील हो चुके थे. हर चौराहे पर भारी पुलिस बल और पैरामिलिट्री फोर्स तैनात थी. जंतर मंतर की तरफ जाने वाले हर रास्ते पर लोहे के बड़े-बड़े बैरिकेडिंग किया गया था. जिसे जंजीरों से लॉक किया गया था.
सड़कों को बैरिकैडिंग के जरिए बंद तो किया ही गया था. उसके बाद भी अगर कोई गाड़ी निकलने में कामयाब हो जाती तो उसके टायर पंचर का इंतजाम भी किया गया. पुलिस हर आने-जाने वाले की कड़ी चेकिंग कर रही थी. नई दिल्ली के इलाके में काम पर जाने के लिए जिनके पास वैध आईडी कार्ड थी. उन्हें ही पुलिस जांच के बाद जाने दे रही थी.या फिर उन्हें दूसरे रास्तों पर भेजा जा रहा था जिससे कई लोगों को परेशानी भी हुई.
सिंघु बॉर्डर पर भी अभेद्य सुरक्षा का इंतजाम किया गया था. कार बसों की सघन तलाशी की जा रही थी. ट्रैफिक चालान भी किया जा रहा था. सुबह से ही पूरी दिल्ली के अहम रास्तों पर गाड़ियों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं..कई जगहों पर ट्रैफिक रेंगता नजर आया. दिल्ली पुलिस के करीब 43 हजार जवानों की तैनाती इस तरह की गई थी कि आंदोलनकारियों का जंतर मंतर तक पहुंचना लगभग नामुमकिन हो गया.
सूत्रों के मुताबिक करीब 5 हजार 900 लोगों को हिरासत में लिया गया. ये बहुत बड़ी संख्या है. इससे पहले एक ही दिन में दिसंबर 2019 में CAA विरोधी आंदोलन के दौरान 5 हजार 500 लोगों को हिरासत में लिया गया था. 10 अगस्त को त्रिपुरा में किसान-मजदूरों के जेल भरो आंदोलन में 12 हजार लोगों को हिरासत में लिया गया था. 1974 के रेलवे हड़ताल के दौरान 20 दिन में 50 हजार आंदोलनकारियों को गिरफ्तार किया गया था. यानी रोजाना करीब ढाई हजार लोगों को गिरफ्तार किया गया था.
सीजेपी का दावा है कि करीब 15 हजार से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया. इस दावे पर हम कुछ नहीं कहेंगे. हां आज जो वीडियो सामने आए वो बताते हैं कि तस्वीर दावों से थोड़ी अलग हो सकती है. चर्चा बहुत हुई, कोशिश भी बहुत हुई लेकिन प्रदर्शनकारियों का समूह जंतर-मंतर तक नहीं पहुंच पाया. हां प्रदर्शकारियों और सिस्टम के बीच जोर आजमाइश और टकराव का खामियाजा दिल्ली-NCR के आम लोगों को भुगतना पड़ा.
45 मेट्रो स्टेशन पर एंट्री और एग्जिट बंद था..नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर आनेवाली कई ट्रेनें रद्द हो गई हैं. सुरक्षा इंतजाम और चेकिंग के कारण लोगों को जगह-जगह रुकना पड़ा. बॉर्डर सील किए जाने से NCR से दिल्ली आनेवाले लोगों को परेशानी हुई. कुल मिलाकर दिल्ली NCR के आम आदमी के लिए आज का दिन परेशान करनेवाला रहा.
मेट्रो स्टेशन बंद होने, ट्रैफिक डायवर्जन के कारण हजारों लोग ऑफिस नहीं पहुंचे. इस कारण करीब 500 करोड़ के नुकसान का अनुमान है. सुरक्षा चेकिंग और प्रदर्शन के कारण सड़क पर गाड़ियां घंटों रेंगती रही. जाम के कारण लाखों लीटर अतिरिक्त पेट्रोल-डीजल की बर्बादी हुई, जिसकी लागत करीब ₹70 करोड़ आंकी जा सकती है. दिल्ली के कई महत्वपूर्ण बाजार आज बंद रहे. इस कारण 1500 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ. यानी कुल मिलाकर आज एक दिन में दिल्ली को 2 हजार करोड़ का झटका लगा और दिल्ली के आम लोग परेशान भी हुए.
अब आंदोलन के राजनीतिक पक्ष को भी समझते हैं. CEC ज्ञानेश कुमार पर सभी विपक्षी पार्टियां सवाल उठाती रही हैं. आज CJP का प्रदर्शन भी CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ही था. लेकिन इस प्रदर्शन में विपक्ष की सभी पार्टियां शामिल नहीं थी. अपनी राजनीतिक सहूलियत के हिसाब से विपक्षी पार्टियों ने अपना-अपना पक्ष चुना. कुछ नेता सड़क पर उतरे तो कुछ नेताओं ने आंदोलन से सम्मानजनक दूरी बना ली. सबसे पहले बात करते हैं उन नेताओं की जो आज सड़क पर उतरे.
अपनी घोषणा के मुताबिक अरविंद केजरीवाल आज कार्यकर्ताओं के साथ सड़क पर उतरे. पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया. दिल्ली के पूर्व मंत्री मंत्री गोपाल राय को भी हिरासत में लिया गया. चंडीगढ़ में चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन कर रहे मनीष सिसोदिया को हिरासत में लिया गया. ममता बनर्जी साउथ एवेन्यू में बस स्टैंड के पास सड़क पर धरने पर बैठी थीं. उनके साथ पार्टी के 5 सांसद भी थे. पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया. हालांकि शाम होते-होते उन्हें छोड़ दिया गया.
लेफ्ट के नेता भी CJP के समर्थन में प्रदर्शन में शामिल हुए. बृंदा करात, एमए बेबी और केरलम के पूर्व सीएम पिनाराई विजयन को हिरासत में लिया गया. सीपीआईएमएल के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य को दिल्ली में INA के पास हिरासत में लिया गया. लेकिन CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली में तीन दिन सड़क पर प्रदर्शन कर चुकी कांग्रेस ने CJP के आंदोलन से दूरी बना ली. कांग्रेस के किसी भी नेता ने सीजेपी के आंदोलन के समर्थन में बयान भी नहीं किया.
शाम 4 बजकर 6 मिनट पर प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखी. इस पोस्ट में उन्होंने बैरिकेड्स लगाने, मेट्रो रोके जाने, इंटरनेट बंद किए जाने का जिक्र तो किया. लेकिन जिस सीजेपी के प्रदर्शन के कारण ये सब कुछ हुआ उसपर उन्होंने सीधे-सीधे एक शब्द भी नहीं लिखा.
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सुबह 10 बजकर 17 मिनट पर एक पोस्ट शेय़र की. पोस्ट में जयराम रमेश ने दिल्ली में भारी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए. CEC पर आरोप लगाए. लेकिन CJP के आंदोलन पर यहां भी खामोशी थी.
राहुल गांधी आज छात्रों की गूंज कार्यक्रम में शामिल होने के लिए तमिलनाडु पहुंचे. हालांकि उनका कार्यक्रम पहले से तय था. यानी जो कांग्रेस पिछले 4 दिन से CEC के खिलाफ लगातार बोल रही थी. सड़क पर उतर रही थी आज वो पूरी तरह खामोश रही. राहुल गांधी ने तमिलनाडु से एक वीडियो संदेश जारी किया.
राहुल गांधी ने अपने संदेश में भी सीजेपी के आंदोलन को लेकर एक शब्द नहीं कहा. यानी कांग्रेस ने पूरी तरह इस प्रदर्शन को इग्नोर किया. ये कांग्रेस की अपनी रणनीति है. इसपर हम कोई टिप्पणी नहीं करेंगे. बीजेपी ने जरूर कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन पर सवाल उठाए. बीजेपी ने प्रदर्शन को अराजकतावादियों का फ्लॉप शो कहा. इन सवालों के बीच आज सीजेपी ने भी बड़ी घोषणा की. सीजेपी नेताओं ने कहा कि हम रविवार को भी प्रदर्शन करेंगे. यानी ये लड़ाई अभी लंबी चल सकती है.