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Can BRICS Protect Saudi Arabia from Houthi Attacks? ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से विश्व शांति का जो संदेश दिया गया है, वो इसलिए भी अहम है क्योंकि इस मंच पर मिडिल ईस्ट का एक बड़ा किरदार मौजूद है, वो है सऊदी अरब! वही सऊदी अरब जो दशकों से अमेरिका की सुरक्षा छतरी के भरोसे रहता आया है. लेकिन हाल ही में वाशिंगटन के रुख के बाद सऊदी उम्मीद भरी निगाहों के साथ BRICS के मंच पर पहुंचा है.
खबर यह है कि बीते 3 हफ्तों में हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के 4 बड़े शहरों और अरामको के प्रमुख तेल ठिकानों पर दर्जनों ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं. इन हमलों से सऊदी का जाज़ान और अभा स्थित तेल इंफ्रास्ट्रक्चर बुरी तरह प्रभावित हुआ है. इससे वैश्विक ऊर्जा सप्लाई पर संकट गहरा गया है.
हूती विद्रोहियों के ताबड़तोड़ हमलों से घबराए सऊदी ने अमेरिका से मदद मांगी थी. सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक नहीं, बल्कि 2 बार फोन किया. उन्होंने अमेरिका से मांग की कि वह लाल सागर और बाब-अल-मंदेब की तरफ बढ़ रहे हूती विद्रोहियों पर सीधे एयरस्ट्राइक करे. लेकिन ट्रंप ने सऊदी की इस मांग को सीधे तौर पर ठुकरा दिया. अमेरिका ने साफ कह दिया कि वह सीधे युद्ध में नहीं उतरेगा.
डोनाल्ड ट्रंप से जब आज आयरलैंड की राजधानी डबलिन में पत्रकारों ने पूछा कि सऊदी अरब पर आए संकट के लिए अमेरिका क्या करेगा तो उन्होंने हस्तक्षेप से इनकार कर दिया. ट्रंप की मजबूरी है कि एक तरफ वो ईरान युद्ध में उलझे हुए हैं. दूसरी तरफ नवंबर में उन्हें मिड टर्म चुनाव का सामना करना है ऐसे में वो युद्ध का कोई नया मोर्चा खोलना नहीं चाहते.
सऊदी को कौन बचाएगा.. US या BRICS? हूती का हमला.. इस्लामिक NATO क्यों डरा ?
सऊदी अरब बड़ी उम्मीद लेकर दिल्ली आया है!— Zee News (@ZeeNews) September 12, 2026
शायद ट्रंप की यही मजबूरी है कि उन्होंने पत्रकारों के सवालों को टाल दिया और सऊदी अरब को सीधे ना कर दिया. इस इनकार के बाद सऊदी अरब अब साउथ एशिया की तरफ उम्मीद भरी निगाहों से देख रहा है. उसे उम्मीद है कि ब्रिक्स के जरिए इस जंग के समाधान का कोई न कोई तरीका जरूर निकल आएगा. जिससे उस पर हो रहे हमले भी रुक जाएंगे.