App

G-7 का डूबता जहाज VS BRICS की नई बुलेट ट्रेन: क्या ब्रिक्स वाकई ग्लोबल इकोनॉमी का नया 'सुपरपावर' बन गया?

BRICS vs. G-7 Economies: दुनिया के पुराने पूंजीवादी संगठन G-7 को डूबता जहाज जबकि उभरते वैश्विक संगठन BRICS को नई बुलेट ट्रेन कहा जा रहा है. क्या माना जाए कि ब्रिक्स वाकई ग्लोबल इकोनॉमी का नया 'सुपरपावर' बन चुका है?

G-7 का डूबता जहाज VS BRICS की नई बुलेट ट्रेन: क्या ब्रिक्स वाकई ग्लोबल इकोनॉमी का नया 'सुपरपावर' बन गया?

BRICS vs. G-7 Power: दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन की जो तस्वीर सामने आ रही है वो दुनिया में हो रहे सबसे बड़े पावर शिफ्ट यानी सत्ता के हस्तांतरण का साक्षात प्रमाण है. एक वक्त था जब पश्चिमी देश ये तय करते थे कि दुनिया कैसे चलेगी.. दुनिया की तकदीर वाशिंगटन, लंदन और पेरिस के बंद कमरों में बैठकर तय की जाती थी. पश्चिमी देशों का समूह G7 पूरी दुनिया पर अपना आर्थिक और कूटनीतिक रौब झाड़ा करता था. आज दुनिया दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन की ओर टकटकी लगाकर देख रही है.

क्लब G7 को BRICS ने कैसे पीछे छोड़ा?

आपको आज ये जानना चाहिए कि पश्चिमी देशों के 'तथाकथित' सुपरपावर क्लब G7 को BRICS ने कैसे पीछे छोड़ दिया है. यह भी जानना चाहिए कि  क्यों G7 को डूबता हुआ जहाज और BRICS को बुलेट ट्रेन कहा जा रहा है. असल में G7 दुनिया का सबसे पुराना आर्थिक क्लब है.. और BRICS इस स्तर का सबसे नया आर्थिक क्लब.

ये विश्लेषण आज की तारीख में इसलिए भी जरूरी है ताकि आप समझ सकें कि 50 साल पुराने G7 को 20 साल पुराने BRICS ने कैसे न सिर्फ चुनौती दी है बल्कि कई मामलों में बहुत पीछे छोड़ दिया है. इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि जेन Z... BRICS है. जिसने जेन X... G7 को मात दे दी है.

इस जेन Z और जेन X आर्थिक समूह का तुलनात्मक विश्लेषण हम कई पैमानों पर करने वाले हैं. आज आपको पता चलेगा कि अर्थव्यवस्था के मामले में दोनों समूह कहां खड़े हैं. ऊर्जा और कच्चे तेल के भंडार में किस समूह की बादशाहत है. आपको देखना चाहिए कि आबादी के मामले में कौन किस पर भारी है. सबसे अहम बात, अगले एक दशक में स्थिति क्या होने वाली है.

BRICS की 90 तो G7 की 62 ट्रिलियन डॉलर है इकोनॉमी

सबसे पहले बात अर्थव्यवस्था की करते हैं. दुनियाभर में चल रहे युद्ध और संघर्ष की वजह से आर्थिक अनिश्चितताओं का दौर चल रहा है. दुनिया के हर मंच पर अर्थव्यवस्था को बचाने की बात चल रही है. लेकिन आपको जानना चाहिए कि इस दौर में भी BRICS पश्चिमी शक्तियों की 'महापंचायत' G7 से कितना आगे है. आप इस जानकारी को नोट भी कर सकते हैं.

GDP की बात करें तो BRICS देशों की कुल अर्थव्यवस्था 90 ट्रिलियन डॉलर है. वहीं G7 की सिर्फ 62 ट्रिलियन डॉलर. वैश्विक अर्थव्यवस्था में BRICS की हिस्सेदारी 40 फिसदी है. वहीं G7 देशों की 30 प्रतिशत है. यहां सबसे ज्यादा गौर करने वाली बात ये है कि BRICS की अर्थव्यवस्था 3.7 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ रही है. वहीं G7 की 1.1 प्रतिशत की रफ्तार से.

यहां आपको BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने दिल्ली आए रूस के राष्ट्रपति की एक अहम बात पर ध्यान देना चाहिए. BRICS ने अर्थव्यवस्था के मामले में G7 को साल 2018 में ही पीछे छोड़ दिया था. दुनियाभर के देशों पर प्रतिबंध लगाने वाले देश और उसकी महापंचायत G7 का भविष्य क्या होने वाला है.

G7 देशों पर GDP का 125% हिस्सा है कर्ज

2006 में जब BRICS की शुरुआत हुई थी, तब G7 कितना आगे था. लेकिन साल 2018 में G7 देशों को पीछे छोड़ने के बाद BRICS लगातार आगे बढ़ता गया. अनुमान है कि 2030 तक G7 देशों की GDP 73 ट्रिलियन डॉलर होगी और BRICS की 122 बिलियन डॉलर.

BRICS देश GDP में PPP यानी लोगों के खर्च करने की क्षमता के मामले में आगे हैं. वहीं, वर्तमान बाजार कीमतों के आधार पर GDP में G7 की बढ़त है. यहां आपको एक और आंकड़ा जानना चाहिए, जिससे आप समझ सकें कि आने वाले वक्त में ये स्थिति भी पलटने वाली है.

IMF के 2026 आंकड़ों के मुताबिक, BRICS के 11 देशों का सरकारी कर्ज उनके GDP का 60% हिस्सा है. वहीं G7 देशों पर कर्ज उनके GDP का 125% हिस्सा है. यानी दुनिया की सबसे बड़ी महापंचायत के पंच कर्ज के बोझ तले दबे हैं.

BRICS समूह दुनिया का शक्तिशाली एनर्जी ग्रुप

इसका मतलब ये हुआ कि एक तरफ G7 देश अपने कर्ज से परेशान हैं. वहीं BRICS देश अपने आर्थिक विकास पर जोर दे रहे हैं. आपको सुनना चाहिए BRICS के आर्थिक विकास पर प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने क्या कहा. उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में दुनिया की GDP करीब ढाई गुना बढ़ी, जबकि BRICS देशों की GDP साढ़े चार गुना बढ़ी. यानी BRICS की अर्थव्यवस्था बाकी दुनिया से करीब दोगुनी तेजी से बढ़ी है.

युद्ध के इस दौर में एक चीज की कीमत और अहमियत दोनों सबसे ज्यादा बढ़ गई है और वो है तेल. G7 में शामिल देश दुनिया के तेल भंडार पर हमेशा से कंट्रोल करना चाहते हैं. लेकिन BRICS के विस्तार ने इस महत्वाकांक्षा को बहुत बड़ी चोट पहुंचाई है. BRICS सिर्फ एक आर्थिक समूह नहीं, बल्कि दुनिया का सबसे शक्तिशाली एनर्जी ग्रुप भी बन गया है.

BRICS में शामिल देशों के नाम पर अगर ध्यान दें तो इसमें सऊदी अरब भी है और UAE भी. रूस भी है और ईरान भी. ये दुनिया के दिग्गज तेल उत्पादक हैं. वहीं G7 में शामिल अमेरिका और कनाडा के अलावा हर देश तेल के लिए किसी और पर निर्भर है. ऐसे में आपको ऊर्जा के मामले में BRICS और G7 के तुलनात्मक आंकड़े देखने चाहिए.

प्राकृतिक संसाधनों में बहुत आगे है BRICS

अगर तेल उत्पादन की बात करें तो BRICS पूरी दुनिया का 41 प्रतिशत कच्चा तेल उत्पादन करता है. वहीं G7 देश सिर्फ 28 प्रतिशत. कच्चे तेल के भंडार की बात करें तो BRICS के पास दुनिया का 45 प्रतिशत तेल भंडार है. वहीं G7 देशों के पास मात्र 4 प्रतिशत. BRICS के पास दुनिया का 54 प्रतिशत नेचुरल गैस भंडार है. वहीं G7 के पास मात्र 10 प्रतिशत.

BRICS देश दुनिया के 45 प्रतिशत कोयला भंडार पर बैठे हैं. वहीं G7 देशों के पास 25 प्रतिशत है. अगर भविष्य का ईंधन यानी रेयर अर्थ मिनरल्स की बात करें तो इस मामले में भी BRICS समूह बहुत आगे हैं. BRICS देशों के पास दुनियाभर का 82 प्रतिशत रेयर अर्थ मिनरल का भंडार है. वहीं G7 देशों के पास मात्र 3 प्रतिशत.

यानी BRICS सिर्फ GDP की ताकत ही नहीं है, प्राकृतिक संसाधनों की ताकत भी है. अगर मान लिया जाए कि GDP के मामले में कोई चमत्कार कर के G7 देश BRICS समूह से आगे भी निकल जाएं. लेकिन प्राकृतिक संसाधनों और तेल भंडार की स्थिति को कोई नहीं बदल सकता है. यही वजह है कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरी दुनिया को ये संदेश दिया है कि जब BRICS आगे बढ़ेगा तभी दुनिया आगे बढ़ेगी.

दुनिया के 30 प्रतिशत हिस्से पर BRICS की पकड़

BRICS समूह सिर्फ अर्थव्यवस्था और ऊर्जा भंडार के मामले में ही आगे नहीं है बल्कि BRICS के पास एक और बहुत बड़ा फायदा है जिसे आपको मैप के जरिये समझना चाहिए. BRICS देश..दुनिया के एक बहुत बड़े भूभाग को कंट्रोल करते हैं.

BRICS के सभी सदस्यों को मिला दिया जाए तो दुनिया के 30 प्रतिशत हिस्से पर BRICS की पकड़ है. यही BRICS के बुलेट ट्रेन का इंजन है. पूरी दुनिया की लगभग 50 प्रतिशत आबादी अकेले BRICS देशों के नागरिक है. वहीं G7 देशों में दुनिया की मात्र 10% आबादी है.

आबादी का सीधा मतलब होता है मार्केट और वर्कफोर्स. ये मार्केट साइज कितना बड़ा अंतर पैदा कर सकता है आपको ये देखना चाहिए. साल 2000 में दुनिया भर में बिकने वाले कुल सामान का 45% हिस्सा G7 देश बेचते थे. 2023 तक यह घटकर सिर्फ 29% रह गया.

इन क्षेत्रों में अभी आगे बढ़ने की जरूरत

लेकिन इस गैप को BRICS ने भरा. साल 2006 में यानी जब BRICS बना तब इस समूह का दुनिया के निर्यात में सिर्फ 10% हिस्सा था, जो 2023 में दोगुने से भी ज्यादा बढ़कर 23% हो गया है. एक अनुमान के मुताबिक निर्यात के मामले में BRICS इस साल के अंत तक G7 को पीछे छोड़ देगा.

कई ऐसे सेक्टर हैं जहां BRICS G7 से काफी ज्यादा आगे है. कई सेक्टर्स ऐसे हैं जहां BRICS इस पश्चिमी महापंचायत को टक्कर दे रहा है या लगभग पीछे छोड़ने वाला है. लेकिन कई सेक्टर्स में ये फासला पार करना अभी भी बाकी है. जैसे- सैन्य खर्च, सोने का भंडार, प्रति व्यक्ति आय और सेमीकंडक्टर प्रोडक्शन.

एक प्रसिद्ध पश्चिमी अर्थशास्त्री ने ही G7 को जो चेतावनी दी है वो आपको देखना चाहिए. अमेरिकी अर्थशास्त्री जेफ्री सेश ने कहा है कि ब्रिक्स एक शक्तिशाली गुट के रूप में उभर रहा है . BRICS की आर्थिक प्राथमिकताएं इसका विस्तार करने में सहयोग करेंगी. BRICS की बुलेट स्पीड वाले विकास के लिए सेश ने पश्चिमी ताकतों की नीतियों को ही जिम्मेदार बताया है.

तेजी से विस्तार कर रहा BRICS समूह

एक वक्त था जब दुनिया का हर देश G7 का हिस्सा बनना चाहता था. लेकिन आज समय के साथ साथ स्थिति भी बदल गई है. आज स्थिति ये है कि BRICS समूह में 10 सदस्य हो गए हैं और 30 देश अभी वेटिंग लिस्ट में हैं. आपको ये जानकर हैरानी होगी कि एक NATO सदस्य भी BRICS की पूर्ण सदस्यता मांग रहा है. तुर्किये ने इसके लिए औपचारिक आवेदन दिया है और दिल्ली शिखर सम्मेलन से पहले चीन से समर्थन भी मांगा था.

यही BRICS की ताकत है कि जो पश्चिमी देश इस आर्थिक समूह को कल तक नकार रहे थे. आज वो इसका हिस्सा बनने के लिए कतार में खड़े हैं.
 

Add Zee News as a Preferred Source

About the Author

Devinder Kumar

Devinder Kumar

अनुभवी पत्रकार और अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विश्लेषक हैं. पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. अमर उजाला और नवभारत टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम करने के बाद, वर्तमान में वे Zee News में कार्यरत हैं. देश-दुनिया और ब्रेकिंग न्यूज पर नजर रखते हैं. अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, वैश्विक घटनाक्रमों और खोजपरक पत्रकारिता में विशेष पकड़ है.
Read More