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जिस पानी में मछलियां जीवित रहती हैं वही पानी उनके लिए अगर जहर हो जाए तो बहुत खतरनाक संकेत हैं. दिल्ली की यमुना में प्रदूषण का एक खतरनाक साइड इफेक्ट सामने आया है. बुराड़ी के पास यमुना नदी में बड़ी संख्या में मरी हुई मछलियां मिली हैं. हालत ये है कि नदी के किनारे जगह-जगह मछलियों के शव दिखाई दे रहे हैं. पिछले कई दिनों से मछलियों के मृत मिलने की बात सामने आने के बाद यमुना के पानी की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं. आखिर एक साथ इतनी बड़ी संख्या में मछलियों की मौत कैसे हुई? क्या नदी में किसी नाले के जरिए जहरीला रासायनिक पानी पहुंचा है या फिर पानी में घुलित ऑक्सीजन की कमी इसकी वजह बनी है?
असल में उत्तरी दिल्ली में बुराड़ी के पास यमुना के किनारे का नजारा परेशान करने वाला है. नदी के किनारे बड़ी संख्या में मरी हुई मछलियां पड़ी दिखाई दे रही हैं. स्थानीय लोगों के मुताबिक पिछले कई दिनों से मछलियों के मृत मिलने की समस्या सामने आ रही है. स्थानीय किसानों और नदी के आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि यमुना में प्रदूषण की समस्या लंबे समय से बनी हुई है. उनका मानना है कि अगर समय रहते नदी में पहुंचने वाले प्रदूषित पानी की जांच और रोकथाम नहीं की गई तो इसका असर जलीय जीवों के साथ-साथ नदी पर निर्भर लोगों की आजीविका पर भी पड़ सकता है.
मछलियों की मौत के पीछे जहरीले रासायनिक प्रदूषण की आशंका भी जताई जा रही है. आरोप है कि हरियाणा की तरफ से आने वाले कुछ नालों के जरिए प्रदूषित पानी यमुना में मिल सकता है. हालांकि अभी तक उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह पुष्टि नहीं हुई है कि मछलियों की मौत किसी खास नाले या रासायनिक पदार्थ के कारण हुई है.
पानी में घुलित ऑक्सीजन की कमी भी मछलियों की सामूहिक मौत की एक संभावित वजह हो सकती है. जलीय जीवों को जीवित रहने के लिए पानी में पर्याप्त ऑक्सीजन की जरूरत होती है. यदि प्रदूषण के कारण ऑक्सीजन का स्तर बहुत कम हो जाए तो मछलियों के लिए जीवित रहना मुश्किल हो सकता है. ऐसे में पानी के नमूनों की वैज्ञानिक जांच के बाद ही मौत की असली वजह का पता चल सकेगा.
यमुना में मछलियों की मौत का असर स्थानीय मछुआरों की आजीविका पर भी पड़ रहा है. नदी में लाइसेंस लेकर मछली पकड़ने वाले मछुआरों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं से उनके सामने रोजगार का संकट खड़ा हो जाता है. उनका आरोप है कि लाइसेंस बनवाने के लिए उन्हें पैसे देने पड़ते हैं, लेकिन नदी की साफ-सफाई और उसके रखरखाव पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है.
मछुआरों का दावा है कि हरियाणा के करनाल क्षेत्र की चमड़ा इकाइयों और उत्तर प्रदेश की ओर स्थित कुछ फैक्ट्रियों से निकलने वाला गंदा पानी यमुना में पहुंचता है. उनके मुताबिक प्रदूषण की वजह से बार-बार मछलियों की मौत जैसी घटनाएं होती हैं.
वैसे भी, बुराड़ी के पास यमुना में मछलियों की मौत का मामला पहले भी सामने आ चुका है. पिछले साल मई में भी बड़ी संख्या में मरी हुई मछलियां मिली थीं. उस समय भी प्रदूषण और रासायनिक पदार्थों के नदी में पहुंचने की आशंका जताई गई थी. यमुना किनारे वर्षों से खेती करने वाले किसानों का आरोप है कि करनाल, पानीपत और सोनीपत क्षेत्र से आने वाले कुछ नालों के जरिए अशोधित पानी नदी तक पहुंच सकता है.
एक स्थानीय किसान का कहना है कि औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले गंदे पानी की नियमित निगरानी होनी चाहिए. मछलियों की मौत के मामले में सबसे जरूरी है कि यमुना के पानी की गुणवत्ता की जांच की जाए. इसके लिए पानी में घुलित ऑक्सीजन का स्तर, पीएच, रासायनिक तत्वों और दूसरे प्रदूषण मानकों की जांच करनी होगी. जरूरत पड़ने पर नदी के अलग-अलग स्थानों से पानी के नमूने लेकर उनकी तुलना की जा सकती है.
मृत मछलियों की जांच से भी मौत के संभावित कारणों को समझने में मदद मिल सकती है. फिलहाल स्थानीय किसानों और मछुआरों ने प्रदूषण को लेकर चिंता जताई है और नदी की स्थिति में सुधार की जरूरत बताई है. सवाल यह है कि मछलियों की मौत के पीछे वास्तविक वजह क्या है और नदी में प्रदूषित पानी पहुंचने की आशंका कितनी सही है.
(बुराड़ी से नसीम अहमद की रिपोर्ट)