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क्या है BRICS? कैसे बना यह शक्तिशाली समूह, कितने हैं सदस्य देश और भारत के लिए क्यों है खास?

BRICS उभरती हुई इकोनॉमी और डेवलपिंग देशों के लिए एक बड़ा कोऑपरेशन फोरम है. अभी, इसके 11 फुल मेंबर हैं. मगर इसकी शुरुआत कैसे हुई क्या है इसका इतिहास और भारत के BRICS समिट 2026 क्यों है जरूरी, जानें डिटेल में.

क्या है BRICS? कैसे बना यह शक्तिशाली समूह, कितने हैं सदस्य देश और भारत के लिए क्यों है खास?
Image Credit: BRICS

BRICS Summit 2026: बदलती ग्लोबल पॉलिटिक्स और इकोनॉमिक्स के बीच, BRICS एक ज़रूरी मल्टीलेटरल फोरम के तौर पर अपनी भूमिका को मजबूत कर रहा है. ग्रुप में नए देशों के जुड़ने से इसका इकोनॉमिक और स्ट्रेटेजिक असर भी बढ़ा है. BRICS भारत के लिए इसलिए जरूरी है क्योंकि यह फॉरेन पॉलिसी, ग्लोबल साउथ, इकोनॉमिक कोऑपरेशन और ग्लोबल इंस्टीट्यूशन्स में सुधार जैसे कई जरूरी मुद्दों पर अपने विचार रखने का मौका देता है.

भारत 2026 में BRICS की अध्यक्षता करेगा और 18वां BRICS समिट इस साल राजधानी दिल्ली में हो रहा है. 12 और 13 सितंबर 2026 को भारत मंडपम में होने वाली यह मीटिंग भारत की विदेश नीति और ग्लोबल डिप्लोमेसी के लिए अहम मानी जा रही है.

BRICS क्या है?
BRICS उभरती हुई इकोनॉमी और डेवलपिंग देशों के लिए एक बड़ा कोऑपरेशन फोरम है. अभी, इसके 11 फुल मेंबर हैं: ब्राजील, रूस, भारत, चीन, साउथ अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, यूनाइटेड अरब अमीरात और इंडोनेशिया. यह फोरम सदस्य देशों को आर्थिक, फाइनेंशियल और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा करने का मौका देता है, साथ ही ग्लोबल चुनौतियों पर एक आम राय बनाने का भी मौका देता है. समय के साथ, इसके एजेंडा में क्लाइमेट चेंज, एनर्जी और फूड सिक्योरिटी, आतंकवाद और ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम जैसे टॉपिक शामिल हो गए हैं.

BRIC से BRICS बनने की कहानी
BRICS की शुरुआत BRIC नाम के चार देशों के ग्रुप के तौर पर हुई थी. इस शब्द का इस्तेमाल ब्राजील, रूस, भारत और चीन के लिए किया जाता था. इकोनॉमिस्ट जिम ओ'नील ने 2001 में इस शब्द को पॉपुलर बनाया.

इसके बाद, इन देशों के बीच सहयोग को इंस्टीट्यूशनल बनाने के लिए कदम उठाए गए. BRIC के विदेश मंत्रियों की पहली मीटिंग 2006 में यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली के दौरान हुई थी. पहला BRIC समिट 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में हुआ था.

साउथ अफ्रीका को शामिल करने के बाद, ग्रुप का नाम BRICS हो गया. साउथ अफ्रीका ने 2011 में चीन के सान्या में हुए तीसरे BRICS समिट में हिस्सा लिया.

BRICS ने अपना सबसे बड़ा विस्तार कब देखा? 
BRICS को बढ़ाने की प्रक्रिया में 2024 एक अहम साल था. मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और UAE इस ग्रुप में फुल मेंबर के तौर पर शामिल हुए. इंडोनेशिया भी BRICS का फुल मेंबर बन गया.

इस बढ़ोतरी के साथ, BRICS की ज्योग्राफिकल पहुंच एशिया, अफ्रीका, मिडिल ईस्ट और लैटिन अमेरिका तक बढ़ गई. इसके अलावा, कई और देश पार्टनर देशों के तौर पर ग्रुप में शामिल हुए हैं.

भारत के लिए 2026 का BRICS समिट क्यों अहम है?
भारत 2026 में BRICS की चेयरमैनशिप संभालेगा. इस दौरान नई दिल्ली में 18वां BRICS समिट हो रहा है. 12-13 सितंबर 2026 को भारत मंडपम में होने वाली इस मीटिंग में मेंबर देशों के बीच इकोनॉमिक और स्ट्रेटेजिक सहयोग से जुड़े जरूरी मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत के दौरान 31 अगस्त 2026 को भारत में होने वाले BRICS समिट का जिक्र किया.

BRICS के मुख्य मकसद क्या हैं?
BRICS ने शुरू में आर्थिक सहयोग पर फोकस किया था, लेकिन अब इसका एजेंडा काफी बढ़ गया है. इसके मुख्य मकसद मेंबर देशों के बीच आर्थिक और फाइनेंशियल सहयोग को बढ़ावा देना और ग्लोबल गवर्नेंस सिस्टम में सुधार की मांग को मजबूत करना शामिल है.

BRICS के जरिए, मेंबर देश ट्रेड, इन्वेस्टमेंट, डेवलपमेंट, फाइनेंशियल सहयोग और आम हितों के दूसरे मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने की कोशिश करते हैं.

यह ग्रुप ग्लोबल इंस्टीट्यूशन में डेवलपिंग देशों की ज्यादा भागीदारी और रिप्रेजेंटेशन की भी मांग करता रहा है. यूनाइटेड नेशंस, IMF और दूसरे इंटरनेशनल इंस्टीट्यूशन में सुधार BRICS द्वारा चर्चा किए जाने वाले खास मुद्दों में से हैं.

BRICS अब किन मुद्दों पर चर्चा करता है?
समय के साथ BRICS का दायरा काफी बढ़ गया है. आर्थिक और फाइनेंशियल सहयोग के अलावा, यह ग्रुप अब कई तरह के ग्लोबल मुद्दों पर चर्चा करता है, जैसे:

ग्लोबल साउथ की भूमिका और आवाज
इंटरनेशनल फाइनेंशियल सिस्टम में सुधार
ट्रेड और इन्वेस्टमेंट
एनर्जी सिक्योरिटी
फूड सिक्योरिटी
क्लाइमेट चेंज
आतंकवाद से मुकाबला
ग्लोबल गवर्नेंस में सुधार
WTO से जुड़े मुद्दे

भारत के लिए BRICS क्यों जरूरी है?
BRICS के बढ़ने से भारत को ग्लोबल साउथ में अपनी भूमिका मज़बूत करने का मौका मिलता है. नए सदस्य देशों के साथ भारत के लिए ट्रेड, इन्वेस्टमेंट, एनर्जी, टेक्नोलॉजी और डिप्लोमैटिक सहयोग के नए रास्ते खुल सकते हैं.

इस प्लेटफॉर्म के जरिए भारत इंटरनेशनल लेवल पर डेवलपिंग देशों की प्राथमिकताओं को मजबूती से उठा सकता है. यह यूनाइटेड नेशंस और दूसरे ग्लोबल इंस्टीट्यूशन में सुधारों और डेवलपिंग देशों के लिए ज़्यादा रिप्रेजेंटेशन की मांग को भी आगे बढ़ा सकता है.

BRICS की बढ़ती आर्थिक ताकत भी इसे जरूरी बनाती है. 2025 में PPP के आधार पर ग्लोबल GDP में BRICS देशों का हिस्सा लगभग 39 परसेंट होने का अनुमान था. यह ग्रुप की ग्लोबल आर्थिक अहमियत को दिखाता है.

UPSC और कॉम्पिटिटिव एग्जाम के लिए BRICS क्यों जरूरी है?
BRICS का विषय सिर्फ इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन के बारे में जानकारी तक ही सीमित नहीं है. इसके बनने, सदस्य देशों, बढ़ने और समिट के बारे में फैक्ट्स कॉम्पिटिटिव एग्जाम की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए बहुत जरूरी हैं.

UPSC के नजरिए से भारत की विदेश नीति, ग्लोबल साउथ, मल्टीपोलर वर्ल्ड ऑर्डर, ग्लोबल गवर्नेंस, आर्थिक सहयोग और इंटरनेशनल संस्थाओं में सुधारों के संदर्भ में BRICS को समझना जरूरी है.

जनरल नॉलेज लेवल पर, BRICS के फुल फॉर्म, शुरुआती सदस्य देशों, साउथ अफ्रीका के शामिल होने के बाद नाम में बदलाव और नए सदस्यों के बारे में सवाल पूछे जा सकते हैं.

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About the Author

Renu Akarniya

Renu Akarniya

रेनू अकर्णिया, वर्तमान में Zee News में सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा की लेटेस्ट, ट्रेंडिंग कंटेंट, यूटिलिटी जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. रेनू पिछले 3 सालों से डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं. पत्रकारिता में ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने 2022 में Zee News से करियर की शुरुआत की.  लोकल चैनल समाचार प्लस में इंटर्न से शुरुआत की और कारवां बढ़ता हुआ जी न्यूज पहुंचा.
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