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Delhi News: राजधानी में मानसून की बारिश कमजोर पड़ रही है. ऐसे में हवा की गुणवत्ता एक बार फिर टेंशन बढ़ाने लगी है. दिल्ली के कई अलग-अलग इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 200 से 250 के बीच पहुंच गया है, जबकी अभी ठंड वाला पॉल्यूशन शुरू भी नहीं हुआ है. वहीं बाहरी राज्यों से आने वाले प्रदूषक तत्वों का बड़ा दबाव भी अभी नहीं बना है. ऐसे में सर्दियों को लेकर टेशन बढ़ना स्वाभाविक है. खासकर तब जब कई बार ठंड में दिल्ली का AQI 400 से 450 के स्तर तक पहुंच जाता है.
मानसून के समय बारिश हवा में मौजूद प्रदूषक कणों को नीचे बैठाने में मदद करता है. वहीं जब बारिश रुकती है, तो ये राहत कम होने लगती है. सड़कों पर मौजूद धूल, वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण गतिविधियां और दूसरे प्रदूषण स्रोत दोबारा हवा की गुणवत्ता को प्रभावित करने लगते हैं. यही कारण है कि मानसून के खत्म होते ही राजधानी में प्रदूषण का लेवल बढ़ने की टेंशन शुरू हो जाती है.
अभी से बढ़ने लगा AQI
दिल्ली के अलग-अलग इलाकों मे AQI 200 से 250 के आसपास अभी से पहुंचने लगा है. इस तरह की स्थिति तब है जब प्रदूशण का सबसे मुश्किल दौर सामने आया भी नहीं है. ठंड में हवा की गती कम होने और वातावरण में प्रदूषक तत्वों के जाम होने के कारण स्थिति और खराब हो सकती है.
हर साल अक्टूबर के बाद से दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने लगता है. साथ ही नंवबर और दिसंबर में तो स्थिति बहुत ही खराब लेवल पर पहुंच जाती है. ऐसा होते ही गाड़ियों के इस्तेमाल पर पाबंदी, निर्माण कार्यों पर रोक, स्कूल बंद करने और जरूरत पड़ने पर वर्क फ्रॉम होम जैसे कदम उठाने पड़ते हैं. ऐसे में ये सवाल बनता है कि जब प्रदूषण का मौसम हर साल लगभग तय समय पर आता है, तो इसकी तैयारी भी कई महीने पहले क्यों नहीं पूरी हो जाती?
प्रदूषण के लिए सिर्फ पड़ोसी राज्य जिम्मेदार नहीं
दिल्ली के प्रदूषण की चर्चा जैसे ही होती है अक्सर बाहरी राज्यों से आने वाले प्रदूषक तत्वों और पराली के धुंए की बात सामने आने लगती है. इसके अलावा राजधानी में मौजूद प्रदूषण के स्रोत भी बड़ी चुनौती हैं. सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, सड़क की धूल, गाड़ियों से निकलने वाले उत्सर्जन, निर्माण और तोड़फोड़ से उड़ने वाली धूल, कचरा जलाना दिल्ली में प्रदूषण का मेन कारण है.
इसका मतलब ये है कि हवा को साफ रखने के लिए दिल्ली को अपने प्रदूषण के स्रोतों पर भी काम करना होगा. कुछ स्टडीज में भी राजधानी के PM 2.5 प्रदूषण में स्थानीय स्रोतों की हिस्सेदारी बताई गई है. वहीं सर्दियों के दौरान स्थानीय स्रोतों का योगदान 70 प्रतिशत से अधिक बताया गया है.
ये हैं परेशानियां
वहीं दूसरी तरफ दिल्ली में कई जगह सड़क बनने का काम, मरम्मत और गड्ढों से जुड़े काम लंबे समय तक चलते रहते हैं. गाड़ियों के गुजरने से सड़क की धूल हवा में उड़ती है. निर्माण वाली जगह पर अगर सामग्री को ढककर नहीं रखा जाए या पानी का छिड़काव नहीं किया जाए, तो प्रदूषण बढ़ सकता है.
इसी तरह निजी निर्माण वाली जगह पर नियमों का पालन न होना भी टेंशन का विषय है. सड़के किनारे का जमा मिट्टी और मलबा गाड़ियों की आवाजाही को हवा में मिल सकता है. इसलिए प्रदूषण बढ़ने के बाद कार्रवाई करने के बजाए इन स्रोतों पर पूरे साल निगरानी की जरूरत है.
वाहनों से निकलने वाला धुआं भी चुनौती
दिल्ली में बड़ी संख्या में निजी वाहन चलते हैं. ट्रैफिक से निकलने वाला धुआं हवा की गुणवत्ता को प्रभावित करता है. पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले गाड़ियों पर कार्रवाई के साथ लोगों को सार्वजनिक परिवहन की तरफ बढ़ाने की जरूरत भी लगातार सामने आती रही है.
राजधानी में मेट्रो और बसों का बड़ा नेटवर्क मौजूद है. वहीं निजी गाड़ियों का इस्तेमाल आम है. अगर ज्यादा तर लोग रोज के सफर के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करें, तो सड़क पर गाड़ियों की संख्या और उनसे होने वाले उत्सर्जन को कम करने में मदद मिल सकती है.
दिल्ली में प्रदूषण समिति (DPCC) ने 40 हॉटस्पॉट पर नई तकनीकों के यूज के लिए टेंडर मांगे हैं. दूसरी तरफ शास्त्री नगर के DMRC के बाइटी पार्क में एकीकृत कमांड एंड कंट्रोल सेंटर भी तैयार किया जा रहा है. वहीं 31 अक्टूबर तक सड़क और गड्ढों से जुड़े लंबित काम को पूरा करने का लक्ष्य लखा गया है. जिला स्तर पर स्थानीय प्रदूषण स्रोतों की पहचान कर जिम्मेदारी और समयसीमा तय करने के निर्देश भी दिए गए हैं.
लेकिन बड़ा सवाल ये है कि इन योजनाओं का असर जमीन पर कितना तेजी से दिखाई देता है. प्रदूषण का मौसम शुरू होने से पहले अगर सड़क, निर्माण, वाहन और कचरा जलाने जैसे मामलों पर नियमित कार्रवाई हो, तो हालात बिगड़ने के बाद आपात कदम उठाने की जरूरत कम की जा सकती है.
सर्दियों से पहले तैयारी जरूरी
दिल्ली की हवा में अभी से बढ़ता प्रदूषण आने वाले समय में एक चेतावनी की तरह है. मानसून की बारिश से मिली राहत खत्म होने के बाद प्रदूषण स्रोत दोबारा से सक्रिय हो रहे हैं. सर्दियों में मौसम मौसम की परिस्थितियां भी प्रदूषकों के जमा होने के लिए अनुकूल हो जाती हैं.