Delhi में सांसों पर पहरा: GRAP-2 लागू! जानिए अब क्या चलेगा और किस पर लग गया Full Stop?
बारिश के बीच दो-तीन दिन प्रदूषण लेवल सही रहा मगर फिर राहत खत्म हो गई. 2 नवंबर से GRAP-II को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है. वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए निर्धारित सभी जरूरी पाबंदियों और उपायों को लागू करने के निर्देश जारी किए गए हैं. वो क्या हैं.. आसान भाषा में समझ लीजिए.
जिस बात का डर था वही हुआ. दो तीन की हलकी फुलकी बारिश के बाद दिल्ली में फिर प्रदूषण बढ़ गया है. इस बार ऐसा बढ़ा कि एक्शन ले लिया गए. हुआ यह कि दिवाली अभी आई भी नहीं है और दिल्ली-NCR की हवा ने अपना असली रंग दिखाना शुरू कर दिया है. आसमान में नीले बादलों की जगह सफेद-भूरे धुएं और धुंध की चादर तन चुकी है. AQI सोमवार को 300 के पार पहुंच गया. हालात बिगड़ते देख Commission for Air Quality Management (CAQM) ने बिना कोई वक्त गंवाए पूरे दिल्ली-NCR में तत्काल प्रभाव से GRAP Stage 2 लागू कर दिया है. आइए समझिए क्या-क्या पाबंदियां लगाई गई हैं.
असल में 31 अक्टूबर को दिल्ली का AQI 117 यानी 'Moderate' कैटेगरी में था, वहीं 1 नवंबर को उछलकर 261 और 2 नवंबर की शाम होते-होते 324 पहुंच गया. अब सवाल यह उठता है कि आम जनता के लिए इसका क्या मतलब है? क्या आपकी गाड़ी सड़क पर चल पाएगी? क्या ऑफिस जाना होगा या घर से काम (WFH) मिलेगा?
आखिर यह GRAP क्या है? इसे भी जान लीजिए
GRAP एक तरह का इमरजेंसी रिस्पॉन्स प्लान है. जब भी सर्दियां आती हैं और हवा खराब होती है, सरकार प्रदूषण के लेवल के हिसाब से अलग-अलग पाबंदियां लगाती है. चूंकि इस समय AQI 325 के करीब पहुंच चुका है, इसलिए Stage 2 के तहत आने वाली तमाम सख्तियां अब लागू हो चुकी हैं.
Stage I (Poor): AQI 201 से 300 के बीच होने पर लागू होता है.
Stage II (Very Poor): AQI 301 से 400 के बीच पहुँचते ही लागू किया जाता है.
Stage III (Severe): AQI 401 से 450 होने पर कड़े कदम उठाए जाते हैं.
Stage IV (Severe Plus): AQI 450 से ऊपर जाने पर लॉकडाऊन जैसी स्थिति बन जाती है.
नीचे छोटे से ग्राफिक के माध्यम से समझिए ग्रैप के अलग अलग लेवल किस स्थिति पर लगते हैं.
GRAP Stage-II के तहत क्या-क्या पूरी तरह Banned है?
अगर आप NCR यानी दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम या फरीदाबाद में रहते हैं, तो इन चीजों पर तुरंत प्रभाव से रोक लग गई है:
1. कोयला और लकड़ी जलाना: सर्दियों में अलाव तापने या ढाबों पर कोयला और लकड़ी जलाने पर पूरी पाबंदी है.
2. तंदूर पर रोक: होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों में कोयले या लकड़ी से चलने वाले तंदूर इस्तेमाल नहीं किए जा सकते.
3. डीजल जनरेटर (DG Sets): कमर्शियल या प्राइवेट इस्तेमाल के लिए डीजल जनरेटर चलाने पर बैन है. सिर्फ अस्पताल, लिफ्ट और जरूरी इमरजेंसी सेवाओं के लिए ही छूट दी गई है.
4. बिना PUC वाली गाड़ियां: अगर आपकी गाड़ी का PUC (Pollution Under Control Certificate) एक्सपायर हो चुका है, तो आपका भारी चालान कट सकता है और पेट्रोल पंप पर ईंधन देने से भी मना किया जा सकता है.
5. कन्स्ट्रक्शन और डिमोलिशन: जिन कंस्ट्रक्शन साइट्स या फैक्ट्रियों को धूल नियंत्रण नियमों के उल्लंघन के लिए बंद करने के आदेश दिए गए हैं, वे अब दोबारा काम शुरू नहीं कर सकतीं.
अब आप एक वर्टिकल ग्राफिक में देखिए दिल्ली एनसीआर में क्या-क्या एक्टिविटी पूरी तरह से बैन है.
क्या-क्या चलेगा और किन चीजों में मिली है छूट? (What is Allowed)
हालांकि राजधानी की लाइफ एकदम ठप नहीं हुई है. कुछ जरूरी सर्विसेज को छूट दी गई है:
इलेक्ट्रिक (EV), CNG और BS-VI गाड़ियां: अगर आपके पास CNG, इलेक्ट्रिक या BS-VI मानकों का पालन करने वाली पेट्रोल/डीजल गाड़ी है, तो आप आराम से सफर कर सकते हैं.
इमरजेंसी DG सेट्स: हॉस्पिटल, मेडिकल फैसिलिटी और रेजिडेंशियल सोसाइटियों की लिफ्ट्स चलाने के लिए जनरेटर का इस्तेमाल हो सकता है.
सड़क की सफाई और पानी का छिड़काव: सड़कों पर वैक्यूम स्वीपिंग और एंटी-डस्ट केमिकल्स के साथ पानी का छिड़काव बढ़ाया जाएगा ताकि धूल ना उड़े.
पार्किंग फीस दोगुनी और स्टैगर्ड ऑफिस टाइमिंग्स: आप पर क्या असर पड़ेगा?
सरकार का सबसे बड़ा मकसद इस वक्त सड़कों पर गाड़ियों की संख्या कम करना है. इसीलिए कुछ बड़े फैसले लिए गए हैं:
पार्किंग चार्ज बढ़े: दिल्ली में अधिकृत पार्किंग स्थलों पर गाड़ियों की पार्किंग फीस बढ़ा दी गई है ताकि लोग अपनी पर्सनल कार या बाइक निकालने के बजाय पब्लिक ट्रांसपोर्ट (मेट्रो या बस) का इस्तेमाल करें.
50% Work From Home (WFH): दिल्ली सरकार और NCR प्रशासन के आदेश के मुताबिक 1 नवंबर से 31 जनवरी तक सरकारी और प्राइवेट दफ्तरों में 50% स्टाफ ही फिजिकली काम करेगा, बाकी 50% कर्मचारी घर से काम करेंगे.
ऑफिस टाइमिंग्स में बदलाव: ट्रैफ़िक जाम से बचने के लिए सरकारी और नगर निगम के दफ्तरों के समय में बदलाव (Staggered Timings) किया जा रहा है.
RWAs के लिए निर्देश: रेजिडेंशियल वेलफेयर एसोसिएशंस (RWAs) को निर्देश दिया गया है कि वे नाइट गार्ड्स और सिक्योरिटी स्टाफ को बायोमास या कचरा जलाने से रोकने के लिए इलेक्ट्रिक हीटर मुहैया कराएं.
क्या होता है यह BS-VI (BS-6) नियम? इसे भी समझ लीजिए
अक्सर BS-VI गाड़ियों का जिक्र होता है. आसान शब्दों में समझें तो BS का मतलब है 'Bharat Stage'. यह भारत सरकार द्वारा तय किया गया एक ऐसा मानक है जो यह नापता है कि कोई गाड़ी कितना धुआं या प्रदूषण छोड़ती है. भारत ने 1 अप्रैल 2020 से सीधे BS-IV से BS-VI में स्विच किया था.
दिल्ली में बाहरी राज्यों से आने वाली ऐसी सभी पेट्रोल और डीजल गाड़ियों की एंट्री पर बैन लगा दिया गया है जो BS-VI स्टैंडर्ड की नहीं हैं. केवल CNG, Electric और BS-VI गाड़ियां ही दिल्ली में प्रवेश कर सकती हैं.
तो फिर आने वाले दिनों में क्या और बिगड़ेंगे हालात?
दिवाली एकदम नजदीक है. इन सबके बीच मौसम विभाग (IMD) और IITM के फॉरकास्ट के मुताबिक अगले कुछ दिनों तक हवा की रफ्तार सुस्त रहने वाली है और तापमान गिरने के कारण प्रदूषक कण (Pollutants) हवा में ही फंसे रहेंगे. इसका सीधा मतलब यह है कि आने वाले दिनों में AQI में सुधार की गुंजाइश काफी कम है.
इतना ही नहीं, सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि 5 नवंबर से 20 नवंबर के बीच पूरे NCR में निर्माण और तोड़फोड़ (Construction & Demolition) के कामों पर पूरी तरह से रोक रहेगी.
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