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Delhi News: गणेशोत्सव देशभर में धूमधाम से मनाया जा रहा है. गणेश विसर्जन का सिलसिला भी जारी है. ऐसे में दिल्ली में गणेश विसर्जन को लेकर यमुना में आस्था और प्रशासनिक व्यवस्था आमने-सामने है. सरकार ने यमुना के प्रदूषण को देखते हुए नदी में विसर्जन पर रोक के आदेश जारी किए थे और सकरकार ने कृत्रिम घाट बनाए, जिससे कि लोगों की आस्था को ठेस न पहुंचें. मगर कृत्रिम घाटों के बावजूद वजीराबाद सूरघाट पर श्रद्धालु यमुना में गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन कर रहे हैं. अब सवाल ये है कि जब यमुना में विसर्जन पर रोक है, तो आखिर ये सिलसिला क्यों जारी है?
राजधानी दिल्ली के वजीराबाद सूरघाट पर गणेश विसर्जन के मौके पर श्रद्धालुओं की भीड़ यमुना किनारे पहुंची. ढोल-नगाड़ों के बीच गणपति बप्पा मोरया के जयकारे लगे और श्रद्धालुओं ने गणेश प्रतिमाओं का यमुना में विसर्जन किया. श्रद्धालुओं का कहना है कि उनके इलाकों के आसपास कृत्रिम विसर्जन घाट नहीं बनाए गए हैं. ऐसे में परंपरा निभाने के लिए उन्हें यमुना का रुख करना पड़ रहा है.
मगर जिस यमुना को दिल्ली की जीवनरेखा कहा जाता है, उसी यमुना का पानी गंदगी से घिरा नजर आ रहा है. श्रद्धालु खुद मान रहे हैं कि नदी की हालत देखकर पूजा-पाठ करने का मन नहीं करता. इसके बावजूद धार्मिक परंपरा और विसर्जन की व्यवस्था के अभाव में वे यमुना में प्रतिमा विसर्जित करने पहुंच रहे हैं.
सबसे बड़ा सवाल प्रशासनिक व्यवस्था पर उठ रहा है. जब यमुना में मूर्ति विसर्जन रोकने और कृत्रिम घाटों का इस्तेमाल कराने की व्यवस्था और दिशा-निर्देश हैं तो फिर पिछले कई दिनों से यमुना में लगातार प्रतिमाओं का विसर्जन कैसे हो रहा है? क्या श्रद्धालुओं तक कृत्रिम घाटों की जानकारी नहीं पहुंची, या फिर स्थानीय स्तर पर पर्याप्त घाट उपलब्ध नहीं कराए गए? क्या यमुना घाटों पर सरकार की तरफ से कर्मियों की तैनाती क्यों नहीं की गई, जिससे कि लोगों को ऐसा करने से रोका जा सकें.
एक तरफ यमुना को प्रदूषण से बचाने की कवायद. दूसरी तरफ आस्था के नाम पर नदी में विसर्जन. वजीराबाद सूरघाट की ये तस्वीरें व्यवस्था और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को जरूर सामने ला रही हैं. अब देखना होगा कि प्रशासन यमुना में हो रहे मूर्ति विसर्जन को रोकने और श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था करने के लिए क्या कदम उठाता है.
(दिल्ली से नसीम अहमद की रिपोर्ट)