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Delhi News: उमर खालिद और शरजील इमाम को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है. दोनों की जमानत याचिका तीसरी बार नामंजूर हो गई है. हाईकोर्ट ने दोनों की जमानत याचिका खारिज कर दी है. हाईकोर्ट का फैसला सुप्रीम कोर्ट के जनवरी 2026 के आदेश के बाद आया है, जिसमें शीर्ष अदालत ने दोनों को उस समय जमानत देने से इनकार किया था.
दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस दिनेश भट्ट की पीठ ने मामले की सुनवाई की. दोनों आरोपियों ने कड़कड़डूमा कोर्ट के 4 जुलाई 2026 के फैसले को चुनौती दी थी. ट्रायल कोर्ट ने भी सुप्रीम कोर्ट के जनवरी वाले आदेश का हवाला देते हुए उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का क्या था?
उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी 2026 को खारिज कर दी थी. हालांकि, अदालत ने उस समय कहा था कि कुछ परिस्थितियों में वे दोबारा जमानत मांग सकते हैं. इनमें सुरक्षित गवाहों के बयान दर्ज होना या सुप्रीम कोर्ट के आदेश की डेट से एक साल पूरा होना शामिल था.
जनवरी के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने दोनों आरोपियों की भूमिका को मामले में दूसरे आरोपियों से अलग माना था. अदालत ने ये भी कहा था कि जमानत के स्तर पर अभियोजन की ओर से पेश सामग्री को देखते हुए दोनों के खिलाफ लगाए गए आरोप प्रथमदृष्टया विचारणीय हैं. ये टिप्पणी केवल जमानत के सवाल तक सीमित थी और इसे अंतिम दोषसिद्धि नहीं माना गया था.
दिल्ली पुलिस ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने जमानत का विरोध किया. पुलिस ने अभियोजन के मामले के आधार पर दोनों को कथित बड़ी साजिश में अहम भूमिका निभाने वाला बताया और कहा कि उनकी जमानत की मांग समय से पहले है. पुलिस ने जनवरी में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी हवाला दिया.
2020 में हुई थी गिरफ्तारी
उमर खालिद को सितंबर 2020 में गिरफ्तार किया गया था, जबकि शरजील इमाम अगस्त 2020 से हिरासत में हैं. दोनों पर 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े बड़ी साजिश के मामले में UAPA समेत कई धाराओं के तहत आरोप हैं. फरवरी 2020 में हुए दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे. हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद दोनों की जमानत का रास्ता फिलहाल बंद है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के जनवरी 2026 के आदेश में तय परिस्थितियों के तहत आगे फिर जमानत की मांग की जा सकती है.