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Delhi News: सत्य निकेतन में बिल्डिंग गिरने से 7 लोगों की मौत गई है. ऐसे में उत्तरी दिल्ली के नेहरू विहार में एक तिरछी और जर्जर इमारत लोगों के लिए खतरा बनी हुई है. करीब तीन साल पहले नगर निगम ने इसे डेंजर घोषित कर नोटिस चस्पा किया था, लेकिन अब तक इसे गिराने की कार्रवाई नहीं हुई. इमारत के ठीक सामने कोचिंग सेंटर है, जहां सैकड़ों बच्चे पढ़ते हैं. ऐसे में सवाल है क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
नेहरू विहार की ये इमारत अपनी हालत के चलते कभी भी बड़े हादसे की वजह बन सकती है. इमारत एक तरफ झुकी हुई है और इसके आसपास घनी आबादी है. यहां हर रोज बड़ी संख्या में लोगों आवाजाही रहती हैं. सबसे बड़ी चिंता की बात ये है कि ठीक इस इमारत के सामने एक कोचिंग सेंटर संचालित हो रहा है, जहां सैकड़ों छात्र पढ़ने के लिए पहुंचते हैं. अगर अचानक इमारत का कोई हिस्सा गिरता है तो इसकी चपेट में आसपास मौजूद लोगों के साथ छात्र भी आ सकते हैं.
स्थानीय लोगों के मुताबिक करीब तीन साल पहले नगर निगम की ओर से इस इमारत पर नोटिस चस्पा किया गया था और इसे खतरनाक इमारत के तौर पर चिन्हित किया गया था. लेकिन सवाल ये है कि नोटिस लगाने के बाद आगे की कार्रवाई अब तक क्यों नहीं हुई और मामला कहां अटक गया?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायत और पत्राचार के बावजूद इमारत को हटाने या ध्वस्त करने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया गया. लोगों का कहना है कि इमारत की हालत लगातार खराब होती जा रही है और अब इसका झुकाव ने भी चिंता बढ़ा दी है.
दिल्ली में जर्जर इमारतों को लेकर पहले भी बड़े हादसे सामने आते रहे हैं. सत्य निकेतन में हुए इमारत हादसे के बाद सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े हुए थे. हादसों के बाद प्रशासन हरकत में आता है, लेकिन सवाल ये है कि क्या किसी हादसे का इंतजार किए बिना खतरनाक इमारतों पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए? नेहरू विहार के लोग भी इसी सवाल का जवाब मांग रहे हैं.
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस इलाके में सिर्फ यही एक इमारत नहीं, बल्कि कई पुरानी और जर्जर इमारतें मौजूद हैं. कुछ इमारतों के अंदर कोचिंग सेंटर भी चल रहे हैं. ऐसे में बच्चों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. लोगों का कहना है कि अगर नगर निगम ने किसी इमारत को खतरनाक घोषित किया है तो उसके बाद सुरक्षा के लिए जरूरी कदम भी उठाए जाने चाहिए. सिर्फ नोटिस चस्पा कर जिम्मेदारी खत्म कर देना काफी नहीं है.
अब सबसे बड़ा सवाल नगर निगम और प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली पर है. क्या अधिकारियों को किसी बड़े हादसे का इंतजार है? क्या शिकायतों और पत्राचार के बावजूद कार्रवाई के लिए किसी हादसे का होना जरूरी है? और सबसे अहम सवाल-जब इमारत को करीब तीन साल पहले ही खतरनाक घोषित किया जा चुका था तो अब तक इसे सुरक्षित करने या ध्वस्त करने की कार्रवाई क्यों नहीं हुई.
नेहरू विहार के लोगों को डर है कि कहीं ये तिरछी इमारत किसी दिन बड़ी तबाही की वजह न बन जाए.अब देखना होगा कि प्रशासन इस खतरे को गंभीरता से लेते हुए कब कार्रवाई करता है.
(दिल्ली से नसीम अहमद की रिपोर्ट)