एक रील खत्म नहीं होती कि अचानक दूसरी रील शुरू हो जाती है. फिर तीसरी और चौथी… और इसी सिलसिले में न जाने कितनी रील आप देख जाते हैं. दिल्ली हाई कोर्ट में दायर एक जनहित याचिका में सोशल मीडिया के इसी तरह के डिजाइन और फीचर्स पर सवाल उठाए गए हैं.
इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के ऐसे डिजाइन फीचर्स को लेकर कोई नीति बनाने पर विचार कर रही है, जो लोगों को बार-बार सोशल मीडिया इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं और फिर इसकी लत लगा सकते है
सोशल मीडिया का कंटेंट नहीं, डिजाइन बना चिंता का विषय
कानून के प्रोफेसर डॉ. विकास कठूरिया की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि चिंता सोशल मीडिया पर मौजूद कंटेंट को लेकर नहीं, बल्कि प्लेटफॉर्म के डिजाइन और उसके काम करने के तरीके को लेकर है.याचिकाकर्ता के मुताबिक, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के कुछ डिजाइन इस तरह तैयार किए गए हैं कि वे यूजर का ध्यान खींचें, उसे ज्यादा समय तक प्लेटफॉर्म पर बनाए रखें और उसे बार-बार ऐप पर वापस आने के लिए प्रेरित करें.
Infinite Scroll: स्क्रॉल करते जाइए, पोस्ट खत्म नहीं होंगी
याचिका में सबसे पहले Infinite Scroll जैसे फीचर का जिक्र किया गया है. इसमें यूजर जैसे-जैसे नीचे स्क्रॉल करता जाता है, नई-नई पोस्ट लगातार सामने आती रहती हैं. याचिकाकर्ता का कहना है कि इससे यूजर लंबे समय तक स्क्रॉल करता रह सकता है.
Autoplay: एक वीडियो खत्म, दूसरा अपने आप शुरू
याचिका में सोशल मीडिया प्लेटफार्म के ऑटो प्ले जैसे फीचर का जिक्र किया है. इसमें एक वीडियो खत्म होते ही अगला वीडियो अपने आप चलने लगता है. यूजर को हर बार नया वीडियो चलाने के लिए अलग से क्लिक करने की जरूरत नहीं पड़ती.
याचिका में छोटे वीडियो, जैसे रील, का भी उल्लेख किया गया है. इसमें कम समय में यूजर कई वीडियो देख सकता है और इसी वजह से वह लंबे समय तक प्लेटफॉर्म पर बना रह सकता है.
एल्गोरिदम, नोटिफिकेशन और लाइक पर भी सवाल
याचिका में सोशल मीडिया प्लेटफार्म के भी एल्गोरिदम का जिक्र किया गयाहै. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का एल्गोरिदम यूजर की पसंद और उसकी देखने की आदतों के आधार पर यह तय करता है कि उसे किस तरह का कंटेंट दिखाया जाए.फिर बार बार उसी तरह के पोस्ट/ वीडियो उसकी फीड में नज़र आते रहते है.
इसके अलावा याचिका में लाइक जैसे लगातार आने वाले नोटिफिकेशन को लेकर भी सवाल उठाया गया है. याचिकाकर्ता के मुताबिक, ऐसे नोटिफिकेशन यूजर को बार-बार ऐप खोलकर नया कंटेंट देखने के लिए प्रेरित कर सकते हैं.
युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंता
याचिका में कहा गया है कि सोशल मीडिया के ऐसे डिजाइन बच्चों और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य बुरा असर डालते है.सोशल मीडिया की लत के चलते खास तौर पर 15 से 24 साल की उम्र के युवाओं के बीच चिंता, बेचैनी, अवसाद, साइबरबुलिंग से जुड़ा तनाव और बिना जरूरत लगातार स्क्रॉल करते रहने जैसी
दिक्कते बढ़ रही है.
याचिका में एक्सपर्ट कमेटी बनाने की मांग
याचिका में केंद्र सरकार को एक एक्सपर्ट कमेटी गठित करने का निर्देश देने की मांग की गई है जो सोशल मीडिया के ऐसे डिजाइन फीचर्स की जांच करे जो यूजर एंगेजमेंट और लत बढ़ाने वाले है.याचिका में यह भी मांग की गई है कि सोशल मीडिया के ऐसे फीचर्स को जरूरत के अनुसार सीमित, नियंत्रित या प्रतिबंधित किया जाए.खास तौर पर बच्चों और युवाओं को संभावित नुकसान से बचाने के लिए उचित सुरक्षा उपाय किए जाए
इसके अलावा याचिका में मेटा, गूगल, टेलीग्राम, एक्स और स्नैपचैट जैसी कंपनियों से कथित नुकसान के लिए मुआवजे की मांग भी की गई है.
कोर्ट ने केंद्र सरकार से क्या पूछा!
सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट की ने केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसीटर जनरल चेतन शर्मा से पूछा कि क्या सरकार इस मुद्दे पर कोई नीति बनाने के बारे में विचार कर रही है.एएसजी ने कहा कि फिलहाल उनके पास इस संबंध में सरकार की ओर से कोई स्पष्ट निर्देश नहीं हैं.उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट के पहले के कुछ आदेशों का भी हवाला दिया, जिनमें इसी तरह के मामलों में अदालतों ने यह कहते हुए हस्तक्षेप से इनकार किया कि इस मामले पर नीति बनाना सरकार का काम है.
तीन हफ्ते बाद फिर होगी सुनवाई
इसके बाद कोर्ट ने ASG चेतन शर्मा से कहा कि वह सरकार से निर्देश लेकर अगली सुनवाई में साफ करें कि क्या केंद्र सरकार वास्तव में इस मुद्दे पर कोई नीति बनाने पर विचार कर रही है. मामले की सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी