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Delhi News: दिल्ली में ठंड आते ही पॉल्यूशन बढ़ना भी शुरू हो जाता है. इस बार पॉल्यूशन को कंट्रोल करने के लिए सरकार और नगर निगम ने अतिरिक्त उपाय घोषित किए हैं. वहीं इन उपायों की सफलता इस बात पर है कि अक्टूबर से पहले कितने उपाय वास्तव में जमीन पर उतरते हैं. इसकी निगरानी के लिए सरकार ने 334 निगरानी दलों की तैनाती का साथ 48 प्रदूषण हॉटस्पॉट पर विशेष कार्रवाई और सड़क और निर्माण से जुड़े काम समय पर पूरा करने के निर्देश दिए हैं.
पॉल्यूशन कैसे होगा कंट्रोल?
वहीं MCD ने सड़क धूल, कूड़ा जलाने और निर्माण के समय कचरे पर कंट्रोल करने के लिए तैयारी तेज कर दी है. सरकार की नई व्यवस्था ते तहत दो-दो दल तैनात किए गए हैं. ये दिन रात निरीक्षण करेंगे. इसके अलावा MCD के वर्ड लेवल पर 250 दल, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद क्षेत्र में चार और दिल्ली छावनी क्षेत्र में दो दल काम करेंगे.
100 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी
सरकार ने सड़कों से उड़ने वाली धूल को कम करने के लिए 100 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है. इसके तहत करीब 1000 ट्रक आधारित धूल-रोधी मशीन 3 साल तक इस्तेमाल की जाएंगी. साथ ही इन गाड़ियों में GPS लगाया जाएगा, जबकि उनके काम का रोजाना रिकॉर्ड भी रखा जाएगा. हालांकि, सड़को पर पानी का छिड़काव कर देने से प्रदूषण की समस्या कम नहीं हो जाएगी. इसके लिए सड़कों की नियमित मशीनों से सफाई, किनारों पर जमा मिट्टी हटाने और खुले जगहों को पक्का या हरित करने जैसे कदम उठाने पड़ेंगे.
870 किलोमीटर सड़क का लक्ष्य
MCD ने 31 अक्टूबर तक करीब 870 किलोमीटर सड़क पर धूल कंट्रोल करने से जुड़े काम को पूरा करने का लक्ष्य रखा है. हालांकि, 14 सितंबर तक संशोधित 1230 किलोमीटर के लक्ष्य में से केवल 689 किलोमीटर का काम पूरा हुआ था. ऐसे में सर्दियों से पहले बाकी काम पूरा करना बड़ी चुनौती है. वहीं नगर निगम के अनुसार, खुले में कूड़ा जलाने से लेकर निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाले कचरे वाले जगहों पर निगरानी बढ़ाई जाएगी. ऐसे 125 जगहों में से 110 को नियमों के अनुरूप बताया गया है.
क्यों बढ़ते हैं प्रदूषण?
दिल्ली में पॉल्यूशन किसी एक वजह से नहीं बढ़ता है. गाड़ियों से निकलने वाला धुआं, उद्योग, कूड़ा जलाना, घरेलू ईंधन, निर्माण का काम और आसपास के इलाकों से आने वाला प्रदूषण मिलकर हवा की गुणवत्ता खराब करते हैं. IIT दिल्ली और TERI से जुड़े 2026 के स्टडी में दिल्ली के पीएम 2.5 प्रदूषण में परिवहन क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 18 से 24% बताई गई है. ऐसे में भारी गाड़ियों पर कंट्रोल, बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन और सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना भी जरूरी होगा. 
दिल्ली में प्रदूषण से निपटने के लिए क्या किया गया है
वहीं दिल्ली में हर हॉटस्पॉट पर जिम्मेदार अधिकारी की तैनाती, रोजाना निरीक्षण और सार्वजनिक निगरानी बहुत जरूरी है. इसके साथ ही कूड़ा जलाने और निर्माण नियमों के उल्लंघन पर सिर्फ नोटिस देने के बजाय समयबद्ध कार्रवाई और दोबारा गलती करने वालों पर सख्त कदम उठाने की जरूरत है. कुल मिलाकर, दिल्ली में प्रदूषण से निपटने के लिए कई योजनाएं तैयार की गई है. अब सबसे बड़ी चुनौती इन योजनाओं को समय पर और लगातार जमीन पर लागू करना है.