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बच्चों में बढ़ रहा गर्दन-कंधे का दर्द, भारी बैग और घंटों बैठने से बिगड़ रही सेहत

Delhi News: स्कूली बच्चों में हड्डियों और मांसपेशियों से जुड़ी दिक्कतें बढ़ रही हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ सालों में ऐसी परेशानियों में करीब 40% तक इजाफा हुआ है. भारी स्कूल बैग, लंबे समय तक बैठकर पढ़ाई करना, गलत मुद्रा, लेटकर पढ़ना और शारीरिक गतिविधियों की कमी इसके प्रमुख कारण हैं.

बच्चों में बढ़ रहा गर्दन-कंधे का दर्द, भारी बैग और घंटों बैठने से बिगड़ रही सेहत
Image Credit: बच्चों में बढ़ रहा गर्दन-कंधे का दर्द

Delhi News: स्कूली बच्चों में हड्डियों और मांसपेशियों से जुड़ी परेशानी तेजी से देखने को मिल रही हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ सालों में ऐसी समस्याओं में लगभग 40% तक बढ़ोतरी हुई है. स्कूली बच्चों में गर्दन, कंधे और कमर में दर्द की शिकायत बढ़ने के पीछे भारी स्कूल बैग और ज्यादा देर तक बैठकर पढ़ाई करना है. बच्चों में गलत तरीके से बैठना, लेटकर पढ़ना और शारीरिक गतिविधियों की कमी जैसे कारण सामने आए हैं. इसके साथ ही ऑनलाइन पढ़ाई और बढ़ते स्क्रीन टाइम का असर भी बच्चों पर काफी ज्यादा पड़ रहा है.  

क्यों होती है बच्चों को परेशानी?  
दिल्ली में आयोजित वर्ल्ड फिजियोथेरेपी एशिया वेस्टर्न पैसिफिक क्षेत्रीय सम्मेलन के दौरान विशेषज्ञों ने बच्चों की स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों पर चर्चा की. विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने से बचाना जरूरी है. बच्चे इस बात का खास ध्यान रखें कि उन्हें पढ़ाई के दौरान छोटे ब्रेक लेकर चलना-फिरना फायदेमंद हो सकता है.

7 से 8 किलो तक पहुंचा स्कूल बैग
विशेषज्ञों के अनुसार, पहले बच्चों का स्कूल बैग लगभग 3 किलो का हुआ करता था. वहीं अब बच्चों का बैग सात से आठ किलो तक पहुंच गया है. भारी बैग उठाने से बच्चों के कंधे, गर्दन और कमर पर दबाव पड़ सकता है. ऐसे में स्कूलों और परिवार वालों को बच्चों के बैग का वजन कम रखने पर ध्यान देने की सलाह दी गई है. IAP अध्यक्ष प्रॉ. डॉ. संजीव के. झा के अनुसार, बच्चों की नियमित शारीरिक गतिविधि, सही मुद्रा और फिटनेस पर ध्यान देना जरूरी है. आयोजन सचिव डॉ.रुचि  वार्ष्णेय ने भी बच्चों से कहा कि उन्हें पढ़ाई के दौरान बीच-बीच में चलते-फिरते रहना चाहिए. साथ ही शरीर का सही इस्तेमाल करने की आदत डालने पर जोर दिया.    

कितने बच्चों पर हुआ स्टडी? 
भोपाल के चार स्कूलों में 8 से 15 साल की उम्र के 934 बच्चों पर किए गए एक स्टडी में सामने आया कि 55.9% बच्चों ने पिछले 1 साल में शरीर के किसी न किसी हिस्से में दर्द की शिकायत की. इनमें से 21.3% बच्चों को दर्द की वजह से डॉक्टर के पास ले जाना पड़ा.

स्टडी में बच्चों के स्कूल बैग का औसत वजन उनके शरीर के वजन का 16.5% पाया गया. विशेषज्ञों ने सलाह दी कि बच्चों को पढ़ाई के बीच छोटे अंतराल में चलने-फिरने, नियमित व्यायाम करने और सही मुद्रा में बैठने की आदत डालनी चाहिए. स्कूलों में भी बच्चों को पर्याप्त शारीरिक गतिविधि का अवसर देने और बैग का वजन कम रखने पर ध्यान देना जरूरी है.

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About the Author

Akanchha Singh

Akanchha Singh

जी-न्यूज में ट्रेनी सब एडिटर. वर्तमान में दिल्ली-एनसीआर हरियाणा डिजिटल टीम में दिल्ली-एनसीआर-हरियाणा की राजनीति, हाइपर लोकल, क्राइम की खबरों पर नजर. यूटिलीटी की खबरों में दिलचस्पी है. 2023 में संस्थान से जुड़े. माखन लाल चतुर्वेदी भोपाल से पत्रकारिता में डिग्री हासिल की.
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