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ACP विवेक कुमार का प्रमोशन रुका, दिल्ली सरकार ने रातों-रात क्यों बदला अपना फैसला?

CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्श के दौरान महिला पत्रकारों के कथित उत्पीड़न मामले में विवेक भगत का प्रमोशन रुक गया है. दिल्ली सरकार ने 5 अक्टूबर के आदेश में संशोधन का फैसला किया.

ACP विवेक कुमार का प्रमोशन रुका, दिल्ली सरकार ने रातों-रात क्यों बदला अपना फैसला?
Image Credit: Delhi में महिला पत्रकार उत्पीड़न मामले ACP विवेक कुमार का प्रमोशन रुका (Instagram)

Delhi News: महिला पत्रकारों से उत्पीड़न के आरोपों से जुड़े एक अधिकारी के अनुरोध के बाद दिल्ली सरकार ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार सौंपने वाले आदेश में संशोधन किया है.

अपने एक्स हैंडल पर जारी आधिकारिक स्पष्टीकरण के अनुसार, दिल्ली सरकार ने बताया कि 5 अक्टूबर 2026 के एक आदेश में दिल्ली, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पुलिस सेवा (DANIPS) के 12 अधिकारियों को अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (Additional Deputy Commissioner of Police) के पद का वर्तमान कार्यभार सौंपा गया था. अब सहायक पुलिस आयुक्त विवेक भगत के संबंध में इस आदेश में संशोधन किया जा रहा है.

 इन अधिकारियों को अतिरिक्त ड्यूटी का काम सौंपने का प्रस्ताव 25 अगस्त को ही शुरू कर दिया गया था, यानी उन हालिया घटनाओं से काफी पहले जिनकी वजह से लोगों का ध्यान इस ओर गया. 5 अक्टूबर 2026 को जरूरी मंजूरी मिलने के बाद ही इसके आदेश जारी किए गए.

आदेश में बताया गया है कि वर्तमान कार्यभार सौंपना एक अस्थायी प्रशासनिक व्यवस्था है. इससे संबंधित अधिकारियों को कोई आर्थिक फायदा नहीं मिलता और न ही उन्हें उस पद पर नियमित रूप से काम करने वाले अधिकारियों की तरह कोई कानूनी जिम्मेदारी निभाने की इजाजत मिलती है.

विवेक भगत ने अपनी स्वेच्छा से अनुरोध किया है कि महिला पत्रकारों के कथित उत्पीड़न के मामले में पूरी जांच होने और उसके संतोषजनक रूप से संपन्न होने तक वे वर्तमान कार्यभार की जिम्मेदारी नहीं लेंगे.

उनके अनुरोध को देखते हुए 5 अक्टूबर के आदेश में बदलाव किया जा रहा है और इसे केवल बाकी बचे 11 अधिकारियों के लिए फिर से जारी किया जाएगा. यह घटनाक्रम महिला पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार की खबरों के बाद दिल्ली पुलिस की बढ़ती जांच-पड़ताल के बीच सामने आया है.

अधिकारियों ने साफ किया है कि मूल प्रस्ताव इस विवाद से पहले का था और यह व्यवस्था पूरी तरह से अस्थायी है. उम्मीद है कि जल्द ही बदला हुआ आदेश जारी किया जाएगा, जिसमें जांच का नतीजा आने तक अधिकारी के पद से अलग होने का फैसला शामिल होगा.

अधिकारियों ने फिर से कहा कि अस्थायी चार्ज के साथ कोई वित्तीय या कानूनी फायदा नहीं मिलता है, जिसका मतलब है कि इस व्यवस्था का दायरा सीमित है.
जांच की प्रगति या उसके बाद की किसी प्रशासनिक कार्रवाई के बारे में और जानकारी नहीं दी गई है. सरकार का कहना है कि अतिरिक्त चार्ज सौंपने की प्रक्रिया हाल के आरोपों से अलग, तय नियमों और समय-सीमा के अनुसार की गई थी.

(Input: IANS)

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About the Author

Renu Akarniya

Renu Akarniya

रेनू अकर्णिया, वर्तमान में Zee News में सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा की लेटेस्ट, ट्रेंडिंग कंटेंट, यूटिलिटी जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. रेनू पिछले 3 सालों से डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं. पत्रकारिता में ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने 2022 में Zee News से करियर की शुरुआत की.  लोकल चैनल समाचार प्लस में इंटर्न से शुरुआत की और कारवां बढ़ता हुआ जी न्यूज पहुंचा.
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