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दिल्ली के सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट में फंसी 135 साल पुरानी लाइब्रेरी, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से क्या कहा?

दिल्ली की 135 साल पुरानी सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा है कि सेंट्रल विस्टा योजना में लाइब्रेरी के लिए कितनी जगह दी गई है. क्या वह शास्त्री भवन की करीब 8.5 लाख किताबों के साथ आरके पुरम में कार्टन में रखी करीब 2 लाख किताबों को रखने के लिए पर्याप्त होगी.

Written By Gaurav Pandey
Published: Oct 05, 2026, 12:11 PM IST | Updated: Oct 05, 2026, 12:14 PM IST
Image Credit: Zee Creative
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दिल्ली की 135 साल पुरानी सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी CSL चर्चा में है. अब इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से डिटेल जानकारी मांगी है. इस लाइब्रेरी में करीब 8.5 लाख किताबें हैं और इसे मौजूदा शास्त्री भवन से दूसरी जगह शिफ्ट करने का प्रस्ताव है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से हलफनामा दाखिल कर यह बताने को कहा है कि सेंट्रल विस्टा की नई योजना में लाइब्रेरी के लिए कितनी जगह दी गई है और क्या वह जगह पूरी लाइब्रेरी के लिए पर्याप्त होगी.

'हलफनामे में वास्तविक लेआउट प्लान दिया जाए'

असल में सोमवार को जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी. यह मामला सुप्रीम कोर्ट ने खुद संज्ञान लेते हुए दर्ज किया है. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र से लाइब्रेरी के लिए तय जगह का पूरा ब्योरा मांगा. कोर्ट ने कहा कि हलफनामे में वास्तविक लेआउट प्लान भी दिया जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि लाइब्रेरी के लिए कितनी जगह उपलब्ध कराई जा रही है.

सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि सेंट्रल विस्टा योजना में लाइब्रेरी के लिए जगह का प्रावधान किया गया है. इस पर जस्टिस संजय कुमार ने कहा कि खबरों के मुताबिक यह लाइब्रेरी 1891 की है. उन्होंने कहा कि कागज का इस्तेमाल कम करने की बात अपनी जगह है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मूल्यवान दस्तावेजों और किताबों का ध्यान नहीं रखा जाए. कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि क्या कार्तव्य भवन में लाइब्रेरी के लिए सिर्फ दो कमरे दिए जा रहे हैं.

दो लाख किताबों का सवाल
कोर्ट की चिंता सिर्फ शास्त्री भवन में रखी मौजूदा किताबों तक सीमित नहीं है. जस्टिस कुमार ने पूछा कि क्या प्रस्तावित जगह आरके पुरम में कार्टन में रखी करीब 2 लाख किताबों को भी रखने के लिए पर्याप्त होगी. कोर्ट ने केंद्र से अपने हलफनामे में इस बारे में भी स्पष्ट जानकारी देने को कहा है. आदेश में कहा गया कि यह बताया जाए कि नई जगह शास्त्री भवन में मौजूद किताबों के साथ-साथ आरके पुरम में कार्टन में रखी किताबों को रखने के लिए पर्याप्त है या नहीं.

3 अक्टूबर को लिया संज्ञान
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को 3 अक्टूबर को स्वत: संज्ञान लेते हुए दर्ज किया था. मामले का शीर्षक "In Re: 135-Yr-Old Library 8.5 Lakh Books– And No Room In The New Central Vista Plan" रखा गया है. कोर्ट का यह कदम 29 सितंबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट के बाद आया, जिसमें 135 साल पुरानी लाइब्रेरी और सेंट्रल विस्टा योजना में उसके लिए जगह को लेकर सवाल उठाए गए थे. लाइब्रेरी फिलहाल शास्त्री भवन में है, लेकिन सेंट्रल विस्टा के तहत प्रस्तावित पुनर्विकास में शास्त्री भवन को हटाए जाने की योजना है.

सरकार ने क्या कहा है
लाइव लॉ की एक रिपोर्ट के मुताबक इस बीच केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने लाइब्रेरी के लिए जगह नहीं होने की खबरों को सही नहीं बताया है. मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा था कि कार्तव्य पथ पुनर्विकास योजना के तहत सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी के लिए जगह उपलब्ध कराई गई है. मंत्रालय के मुताबिक लाइब्रेरी के निर्माण के लिए जरूरी प्रक्रिया चल रही है. यानी सरकार का कहना है कि लाइब्रेरी के लिए जगह का प्रावधान है, जबकि सुप्रीम कोर्ट अब यह स्पष्ट रूप से जानना चाहता है कि वास्तव में कितनी जगह दी गई है और वह पूरी लाइब्रेरी के संग्रह के लिए पर्याप्त है या नहीं.

कोर्ट ने अमिकस भी नियुक्त किया
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश देने के साथ वरिष्ठ अधिवक्ता हरिप्रिया पद्मनाभन को इस मामले में अमिकस क्यूरी नियुक्त किया है. अमिकस क्यूरी का मतलब ऐसे व्यक्ति से है जो अदालत को किसी मामले में जरूरी तथ्य और कानूनी पहलुओं को समझने में मदद करता है. अब केंद्र के हलफनामे से यह साफ होगा कि सेंट्रल विस्टा योजना में लाइब्रेरी के लिए कितनी जगह तय की गई है, उसका वास्तविक लेआउट क्या है और क्या वहां 8.5 लाख मौजूदा किताबों के साथ आरके पुरम में रखी करीब 2 लाख किताबों को भी सुरक्षित रखा जा सकता है.
 

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About the Author

Gaurav is a multimedia journalist writing across a wide range of subjects, including politics, sports, cinema, explainers, opinion and Delhi Haryana civic issues. With analysis, he regularly covers social issues and public policy through in-depth. With around nine years of experience, he has worked with India Today, Hindustan Times, and Network18, producing stories with a strong focus on facts and ground reality. He studied journalism at IIMC Delhi.
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