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AISA अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका दिल्ली हाईकोर्ट से खारिज, भरना पड़ेगा पीस बॉन्ड!

दिल्ली हाईकोर्ट ने AISA अध्यक्ष नेहा बोरा की 10 हजार रुपये के निजी मुचलके और एक जमानतदार देने संबंधी नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी. नेहा ने आरोप लगाया था कि बिना ठोस आधार के उन्हें हिरासत में लेकर कार्रवाई की गई.

Written ByGaurav Pandey
Published: Oct 23, 2026, 08:22 PM IST|Updated: Oct 23, 2026, 08:35 PM IST
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AISA अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका दिल्ली हाईकोर्ट से खारिज, भरना पड़ेगा पीस बॉन्ड!
Image Credit: Neha Vora File Photo

About the Author

Gaurav Pandey

Gaurav Pandey

Gaurav is a multimedia journalist writing across a wide range of subjects, including politics, sports, cinema, explainers, opinion and Delhi Haryana civic issues. With analysis, he regularly covers social issues and public policy through in-depth. With around nine years of experience, he has worked with India Today, Hindustan Times, and Network18, producing stories with a strong focus on facts and ground reality. He studied journalism at IIMC Delhi.
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ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली हाईकोर्ट से झटका लगा है. शुक्रवार को कोर्ट ने राहत देने से इनकार करते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी. नेहा बोरा ने शांति बनाए रखने के लिए 10 हजार रुपये का निजी मुचलका और एक जमानतदार देने संबंधी नोटिस को चुनौती दी थी. जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की एकल पीठ ने फिलहाल उनकी याचिका खारिज कर दी. 

हालांकि कोर्ट ने निर्देश दिया कि इस मामले में कार्रवाई के दौरान जिन दस्तावेजों और सामग्री का इस्तेमाल किया गया है, उनकी प्रतियां नेहा बोरा को उपलब्ध कराई जाएं. साथ ही कोर्ट की तरफ से विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट को जांच पूरी होने के बाद आदेश पारित करते समय सावधानी बरतने का निर्देश दिया गया. 

नेहा बोरा ने 17 अक्टूबर को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की ओर से जारी नोटिस के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया था. यह नोटिस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धाराओं 126 और 130 तथा धारा 135(3) के तहत जारी किया गया था. इसके जरिए उन्हें शांति बनाए रखने के लिए 10 हजार रुपये का पीस बॉन्ड भरने और एक जमानतदार पेश करने को कहा गया था.

याचिका में क्या दलील दी गई?

उस याचिका में दलील दी गई थी कि नोटिस में ऐसा कोई ठोस आधार नहीं बताया गया है, जिससे यह साबित हो कि नेहा बोरा की गतिविधियों से शांति भंग होने की आशंका थी. याचिका के मुताबिक ऐसी कार्रवाई शुरू करने के लिए यह जरूरी शर्त है. सुनवाई के दौरान नेहा बोरा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि 16 अक्टूबर की शाम मंडी हाउस पहुंचने के महज 10 से 15 मिनट बाद ही उन्हें हिरासत में ले लिया गया था.

वकील ने दावा किया कि नेहा ने न तो कोई अपराध किया था और न ही ऐसा कोई काम किया, जिससे शांति भंग होने की आशंका पैदा होती. उन्होंने हिरासत को अवैध बताते हुए कहा कि नेहा को हिरासत में लेने के तुरंत बाद अपने परिवार और वकीलों से संपर्क करने की अनुमति भी नहीं दी गई. उन्होंने यह भी दलील दी कि पर्याप्त शुरुआती जांच और सबूतों के बिना उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई.

साथ ही बचाव पक्ष का कहना था कि BNSS की धारा 136 के तहत शांति बनाए रखने के लिए बांड भरवाने का आदेश जांच पूरी होने के बाद ही दिया जा सकता है.

उधर याचिका का विरोध करते हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने अदालत में कहा कि नेहा बोरा की ओर से एक के बाद एक 12 उल्लंघन किए गए थे, जिनकी जांच मजिस्ट्रेट ने की है. उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेहा की ओर से कथित तौर पर सत्ता परिवर्तन को लेकर की गई टिप्पणी का भी जिक्र किया. शर्मा ने दलील दी कि सत्ता परिवर्तन वोटों के जरिए होता है, न कि नई दिल्ली के संवेदनशील इलाके में अराजक तत्वों के जरिए.

हाईकोर्ट ने नेहा बोरा की याचिका खारिज कर दी

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने नेहा बोरा की याचिका खारिज कर दी. हालांकि अदालत ने संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने और आगे की कार्यवाही में सावधानी बरतने के निर्देश भी दिए.

ये पूरा घटनाक्रम तब का है जब 16 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने नेहा बोरा समेत कई लोगों को हिरासत में लिया था. उस दिन कॉकरोच जनता पार्टी CJP की ओर से कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में प्रस्तावित 'तिरंगा असेंबली' कार्यक्रम को देखते हुए मध्य दिल्ली में सुरक्षा बढ़ा दी गई थी. यह कार्यक्रम शाम पांच बजे होना था, लेकिन नई दिल्ली नगर पालिका परिषद ने इसकी अनुमति नहीं दी थी.

नेहा बोरा के वकील ने अदालत में कहा था कि उनका इस कार्यक्रम से कोई संबंध नहीं था और वह अलग गतिविधियों में शामिल थीं. फिलहाल हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद पीस बॉन्ड से जुड़े मामले में विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष आगे की कार्यवाही होगी.

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Delhi High Court