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छत्तीसगढ़ का अनोखा मंदिर: पहाड़ों पर विराजीं मां महिषासुर मर्दिनी, कलचुरी वंश के राजा ने कराया था निर्माण

नवरात्रि के दौरान कोरबा जिले के चैतुरगढ़ में स्थित मां महिषासुर मर्दिनी मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. कलचुरी राजा पृथ्वीदेव प्रथम द्वारा बनवाए गए इस मंदिर में मां देवी की 12 भुजाओं वाली एक अद्भुत प्रतिमा स्थापित है.

Written ByRanjana Kahar
Published: Oct 18, 2026, 11:58 AM IST|Updated: Oct 18, 2026, 12:01 PM IST
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छत्तीसगढ़ का अनोखा मंदिर: पहाड़ों पर विराजीं मां महिषासुर मर्दिनी, कलचुरी वंश के राजा ने कराया था निर्माण
Image Credit: छत्तीसगढ़ का अनोखा मंदिर

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Ranjana Kahar

Ranjana Kahar

रंजना कहार एक डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें न्यूज़ मीडिया और डेस्क ऑपरेशंस के क्षेत्र में 4 सालों से ज्यादा का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीतिक हलचलों, क्राइम और स्थानीय मुद्दों (हाइपरलोकल खबरों) की सटीक, निष्पक्ष व तथ्य-आधारित कवरेज में उनकी एक्सपर्टीज है.छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (बिलासपुर) से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद रंजना ने अपने करियर की शुरुआत ETV भारत से की थी. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने APN न्यूज़ के साथ भी काम किया है. कंटेंट एडिटिंग, न्यूज़ प्रोडक्शन और डेस्क मैनेजमेंट पर मजबूत पकड़ होने के कारण वे रीडर्स तक खबरें तेजी, गुणवत्ता और प्रामाणिकता के साथ पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं.रंजना कहार से आप ranjana.kahar@india.com पर ईमेल के माध्यम से सीधे संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
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छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में स्थित ऐतिहासिक चैतुरगढ़ किला, जिसे लाफागढ़ के नाम से भी जाना जाता है, आस्था, इतिहास और प्राकृतिक सुंदरता का एक अद्भुत संगम है. मैकल पर्वत श्रृंखला में लगभग 3,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह किला अपनी ऐतिहासिक विरासत और प्राचीन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है. शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर देवी महिषासुर मर्दिनी का आशीर्वाद पाने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं. पहाड़ों की गोद में स्थित देवी के मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहता है.

कलचुरी वंश के राजा ने कराया था निर्माण

कोरबा जिला मुख्यालय से लगभग 80 किलोमीटर दूर पाली ब्लॉक में स्थित चैतुरगढ़ किला अपने दुर्गम बनावट और प्राकृतिक सुरक्षा व्यवस्था के लिए जाना जाता है. मान्यता है कि कलचुरी वंश के राजा पृथ्वीदेव प्रथम ने देवी महिषासुर मर्दिनी के सपने में दिए गए दैवीय आदेश के बाद इस मंदिर का निर्माण करवाया था. नवरात्रि के नौ दिनों के दौरान दूर-दूर से आए श्रद्धालु सुख-समृद्धि की प्रार्थना के लिए लंबी कतारों में खड़े होते हैं, और पूरा क्षेत्र "जय माता दी" के जयकारों से गूंज उठता है. गर्भगृह में स्थापित देवी की 12 भुजाओं वाली अद्भुत प्रतिमा, भक्तों की श्रद्धा और आस्था का मुख्य केंद्र है.

वास्तुकला की भव्यता और प्राकृतिक सुंदरता

चैतुरगढ़ का महत्व केवल इसके धार्मिक जुड़ाव तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यहां की वास्तुकला की भव्यता और प्राकृतिक सुंदरता भी पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती है. किले के परिसर में सात प्राचीन जलाशय हैं, जिनमें से तीन में साल भर पानी भरा रहता है. इसके अलावा शंकर खोल गुफा में स्थित शिवलिंग भक्तों के लिए गहरी आस्था का केंद्र है. सिंह द्वार, मेनका द्वार और हुमकारा द्वार जैसे प्राचीन प्रवेश द्वार इस किले के रणनीतिक और ऐतिहासिक महत्व के जीवंत प्रमाण हैं. सदियों पुराने इतिहास, ऊबड़-खाबड़ पहाड़ों और देवी महिषासुर मर्दिनी के पवित्र निवास स्थान के रूप में चैतुरगढ़ न केवल भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करता है, बल्कि अपने अद्भुत प्राकृतिक परिवेश से हर किसी का मन मोह लेता है.

यह भी पढ़ें: क्या है मुरिया दरबार? जानिए इस अनूठी परंपरा का इतिहास जिसमें शामिल होंगी राष्ट्रपति मुर्मू
 

छत्तीसगढ़ का मिनी कश्मीर

अपनी जलवायु, दुर्गम पहाड़ियों और ठंडी घाटियों के कारण चैतुरगढ़ को 'छत्तीसगढ़ का मिनी कश्मीर' भी कहा जाता है. नवरात्रि के इन दिनों में देवी मां के प्रति भक्ति और प्रकृति की सुंदरता का अनूठा संगम यहां आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को एक अलौकिक अनुभव प्रदान करता है.
 

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