SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

झीरम घाटी केस: 10 दोषियों के पक्ष में क्यों उतरा आदिवासी समाज? हर घर से ₹20 चंदे का ऐलान

झीरम घाटी केस में NIA कोर्ट के फैसले के खिलाफ सर्व आदिवासी समाज हाईकोर्ट में अपील करने की तैयारी कर रहा है. इसके लिए 18 सितंबर की बैठक में फैसला किया है कि दोषियों के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए हर घर से 20-20 रुपए चंदा किया जाएगा. अगर हाईकोर्ट से फैसला संतोषजनक नहीं आता है, तो सुप्रीम कोर्ट का रुख करने की बात कही है.

Written By Manish Kushawah
Published: Sep 19, 2026, 06:29 PM IST | Updated: Sep 19, 2026, 06:52 PM IST
Image Credit: Zee Media
Join

झीरम घाटी कांड मामले में NIA कोर्ट के फैसले के बाद अब आदिवासी समाज भी खुलकर सामने आ गया है. NIA की विशेष अदालत ने 10 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है. लेकिन आदिवासी समाज का एक वर्ग इस फैसले से संतुष्ट नजर नहीं आ रहा है. जगदलपुर के परपा में बैठक के दौरान सर्व आदिवासी समाज बस्तर संभाग के पदाधिकारियों के साथ फांसी की सजा पाने वाले दोषियों के परिजन भी शामिल हुए. इस दौरान बैठक में सर्व आदिवासी समाज ने दोषियों के पक्ष में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया है.

दरअसल, झीरम घाटी कांड में NIA की विशेष अदालत ने 10 दोषियों को फांसी सजा सुनाई है. इस फैसले से आदिवासी समाज संतुष्ट नहीं दिख रहा है. वहीं सर्व आदिवासी समाज का कहना है कि NIA द्वारा गिरफ्तार किए गए सभी 10 दोषी निर्दोष हैं. उनका कहना है कि उन्हें गलत तरीके से मामले में आरोपी बनाया गया है. समाज का कहना है कि अब उन दोषियों के लिए लड़ाई लड़ेंग. समाज की तरफ से फैसला लिया गया है कि हर गांव-हर परिवार से चंदा जुटाकर कानूनी लड़ाई लड़ेंगे. इसके लिए प्रत्येक परिवार से 20 रुपए लेने की बात भी सामने आई है.

सुरक्षा को लेकर भी उठाए सवाल ?
वहीं समाज की ओर से कहा गया है कि पहले हाईकोर्ट में अपील की जाएगी. अगर वहां से राहत नहीं मिलती है, तो सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई जारी रखी जाएगी. सजा पाने वाले दोषियों के परिजनों ने भी फैसले पर सवाल उठाए हैं. परिजन बारसे वेट्टी का कहना है कि मई 2013 में झीरम घाटी की घटना के समय परिवर्तन यात्रा जगदलपुर से सुकमा तक निकाली जा रही थी. यात्रा में महेंद्र कर्मा, विद्याचरण शुक्ल और नंदकुमार पटेल समेत कई बड़े नेता शामिल थे. उस समय बीजेपी की सरकार थी. उनका आरोप है कि इतने बड़े नेताओं की यात्रा के बावजूद पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई.

झीरम कांड में कौन-कौन शामिल था
बारसे वेट्टी ने आगे कहा कि झीरम घाटी हमले को जिन लोगों ने अंजाम दिया था, उनमें जगदीश, लिंगे मरकाम, सोनाधार, संजू, सहेतू और बारसे देवा के नाम शामिल हैं. उन्होंने आरोप लगाया है कि इन लोगों से भी पूछताछ होनी चाहिए थी, लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया. बारसे वेट्टी ने कहा कि सजा पाने वाले लोगों को निर्दोष हैं. बारसे वेट्टी ने सरपंच जोगा मरकाम का नाम लेते हुए कहा कि जोगा मरकाम नक्सली नहीं था, फिर भी 2014 में उस पर नक्सलियों से जुड़े होने का आरोप लगाकर जेल भेज दिया गया. उन्होंने इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है.

दोषियों की मदद करने का फैसला
वहीं सर्व आदिवासी समाज के संभागीय अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर का कहना है कि हमारे समाज के 10 लोगों को NIA न्यायालय द्वारा फांसी की सजा सुनाई गई है. इसी मामले को लेकर 18 सितंबर को समाज की बैठक हुई, जिसमें सभी लोगों ने न्यायालय के फैसले पर असंतोष जताया. प्रकाश ठाकुर ने बताया कि सजा पाने वाले सभी लोग गांव के सामान्य व्यक्ति हैं, जो खेती-बाड़ी और किसानी करके अपना जीवन-यापन करते थे. उन्होंने आगे कहा कि ये लोग नक्सली गतिविधियों में किसी तरह से सक्रिय नहीं थे. ऐसे में समाज के सभी लोगों ने एकमत होकर इनकी कानूनी मदद करने का फैसला लिया है.

ये भी पढ़ेंः न्याय की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई... झीरम घाटी कांड में 10 लोगों को फांसी के बाद उदय मुदलियार के बेटे ने क्यों कही ऐसी बात

ये भी पढ़ेंः झीरम घाटी कांड: 25 फरवरी 2013 की बैठक में क्या हुआ था? 185 पन्नों की जजमेंट कॉपी ने खोले राज

हर घर से ₹20-20 चंदा करेंगे इकट्ठा
प्रकाश ठाकुर ने आगे बताय कि समाज अब NIA न्यायालय के फैसले के खिलाफ पहले हाईकोर्ट में अपील करेगा. अगर वहां पर भी संतोषजनक फैसला नहीं आता है, तो सुप्रीम कोर्ट का रुख किया जाएगा. उन्होंने कहा कि इसके लिए पूरे बस्तर संभाग में हर घर से 20-20 रुपये चंदा इकट्टा करेंगे. उन्होंने कहा कि बैठक में मौजूद सभी लोगों की सहमति से यह निर्णय लिया गया है. सर्व आदिवासी समाज इन दोषियों की कानूनी लड़ाई में मदद करेगा.

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

मनीष कुशवाह डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें टीवी और डिजिटल मीडिया में 5 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर के रूप में काम कर रहे हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीति, क्राइम, कृषि व्यवस्था और ग्रामीण (हाइपरलोकल) सरोकारों से जुड़ी खबरों की गहराई से कवरेज करना उनकी एक्सपर्टीज है.नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (NIMC) से पत्रकारिता में डिप्लोमा पूरा करने के बाद मनीष ने मीडिया जगत में अपना सफर शुरू किया. ज़ी न्यूज़ से पहले उन्होंने News18 Hindi (Local18), इंडिया न्यूज़ और जनता टीवी जैसे प्रमुख समाचार चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में काम किया है. इस दौरान उन्होंने न्यूज़ प्लानिंग, कंटेंट आइडिएशन और डेस्क मैनेजमेंट की अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं. वे खबरों की प्रामाणिकता और ग्राउंड रियलिटी को प्राथमिकता देते हैं, ताकि पाठकों तक सटीक और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे.मनीष कुशवाह से आप Manish2.Kumar@india.com पर ईमेल के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और फेसबुक के जरिए भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES