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झीरम घाटी के बहुचर्चित नक्सली हमले के मामले में NIA कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए हत्याकांड से जुड़े 10 आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई है. इस हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं के साथ राजनांदगांव के तत्कालीन विधायक उदय मुदलियार और उनके साथी अलनूर की भी जान चली गई थी. कोर्ट के फैसले के बाद उदय मुदलियार के बेटे जितेंद्र मुदलियार ने इसे अधूरा न्याय बताते हुए कहा है कि उनकी न्याय की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं.
झीरम घाटी कांड छत्तीसगढ़ के इतिहास का वो काला अध्याय है, जिसे आज भी याद कर लोग सिहर उठते हैं. 13 साल पहले हुए इस नक्सली हमले ने प्रदेश की राजनीति को झकझोर कर रख दिया था. कांग्रेस के कई बड़े नेताओं को नक्सलियों ने निशाना बनाया था. इसी हमले में राजनांदगांव के तत्कालीन कांग्रेस विधायक उदय मुदलियार और उनके साथी अलनूर की भी मौत हो गई थी. अब इतने वर्षों बाद NIA कोर्ट ने मामले में 10 आरोपियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है.
सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी
कोर्ट के फैसले के बाद उदय मुदलियार के बेटे जितेंद्र मुदलियार ने कहा कि उन्हें फैसले से पूरी तरह संतोष नहीं है. उनका कहना है कि मामले में कई अन्य संदिग्धों नक्सलियों से पूछताछ नहीं की गई. ऐसे में उन्होंने कहा कि घटना के सभी पहलुओं और जिम्मेदार लोगों तक पहुंचना अभी बाकी है. जितेंद्र मुदलियार ने कहा कि उनके परिवार की न्याय की लड़ाई जारी रहेगी. उन्होंने कहा कि फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख करने की तैयारी कर रहे हैं.
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फैसले को अधूरा न्याय बताया
उन्होंने आगे कहा कि हम इस फैसले को अधूरा न्याय मानते हैं. मामले में जिन अन्य संदिग्धों और समर्पित नक्सलियों से पूछताछ होनी चाहिए थी, वह नहीं हुई. इसलिए न्याय के लिए हमारी लड़ाई आगे भी जारी रहेगी. झीरम घाटी हमले के 13 साल बाद आया यह फैसला निश्चित तौर पर इस मामले की कानूनी लड़ाई में एक अहम पड़ाव है. लेकिन उदय मुदलियार के परिवार की ओर से सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी के ऐलान के बाद साफ है कि झीरम घाटी नरसंहार का यह मामला अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है.
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10 दोषियों को फांसी की सजा
दरअसल, छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी हत्याकांड में 13 साल बाद फैसला आया है. जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने 2013 के नक्सली हमले के 10 दोषियों को मौत की सजा सुनाई है. NIA कोर्ट के जज अजय सिंह राजपूत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया. मिली जानकारी के मुताबिक दोषियों पर कुल 24 धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे, जिनमें से सात धाराओं में मौत की सजा सुनाई गई है. इन दोषियों में 2 महिलाएं और 8 पुरुष शामिल हैं. 5 सितंबर 2026 को अदालत ने सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराया था.
(रिपोर्टः किशोर शिलदार, राजनांदगांव)