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छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में सुरक्षा बलों और पुलिस को एक बार फिर बड़ी कामयाबी मिली है. नक्सल विरोधी अभियान के तहत चलाए गए एक विशेष तलाशी अभियान में सुरक्षा बलों ने भारी मात्रा में विस्फोटक और हथियार बरामद करके नक्सलियों के खतरनाक मंसूबों को नाकाम कर दिया. यह अभियान कुकानार थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले दुमनपारा और जोंगेरस के घने जंगलों और पहाड़ी इलाकों में चलाया गया था.
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, इस ऑपरेशन की सफलता का कारण आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों से मिली महत्वपूर्ण और सटीक खुफिया जानकारी थी. इन जानकारियों के आधार पर डिस्ट्रिक्ट फोर्स, डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG) और बस्तर फाइटर्स के जवानों की एक संयुक्त टीम ने इलाके में सर्च ऑपरेशन और एरिया-डोमिनेशन अभियान चलाया. तलाशी के दौरान जब जवानों ने संदिग्ध जगहों की बारीकी से जांच की, तो उन्हें नक्सलियों द्वारा जमीन के अंदर और झाड़ियों के बीच छिपाया गया एक डंप (सामान का जखीरा) मिला.
संयुक्त टीम ने इस डंप की गई सामग्री को बाहर निकाला, जिसमें सुरक्षा बलों को भारी नुकसान पहुंचाने के इरादे से रखे गए खतरनाक हथियार और विस्फोटक शामिल थे. मौके से 2 टिफिन IED, 315 बोर के 14 जिंदा कारतूस, 14 जिलेटिन रॉड और 80 नॉन-इलेक्ट्रिक डेटोनेटर बरामद किए गए हैं. इसके अलावा नक्सलियों के दैनिक उपयोग की चीजें और अन्य सामान भी जब्त किए गए हैं. सुरक्षा बलों ने मौके से सभी विस्फोटक सामग्रियों को अपने कब्जे में ले लिया है.
विशेषज्ञों का मानना है कि नक्सली किसी बड़ी घटना को अंजाम देने के लिए हथियारों और विस्फोटकों का यह जखीरा तैयार कर रहे थे. हालांकि, सुरक्षा बलों की समय रहते की गई कार्रवाई ने एक बड़ी त्रासदी को टाल दिया. इस सफल अभियान के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा बलों की गश्त और निगरानी और बढ़ा दी गई है, और नक्सलियों को पकड़ने के लिए आसपास के जंगलों में लगातार तलाशी अभियान चलाया जा रहा है. ऐसा लगता है कि इस कार्रवाई ने बस्तर क्षेत्र में माओवादी नेटवर्क को एक बार फिर कमजोर कर दिया है.
सुकमा के जंगलों में मिले विस्फोटकों और हथियारों का यह बड़ा जखीरा इस बात का स्पष्ट सबूत है कि सुरक्षा बलों की लगातार छापेमारी और सटीक खुफिया तंत्र के सामने नक्सलियों के नापाक मंसूबे लगातार विफल हो रहे हैं. भले ही माओवादी बड़ी वारदातों को अंजाम देने की गुप्त साजिशें रच रहे हों, लेकिन डिस्ट्रिक्ट फोर्स, DRG और बस्तर फाइटर्स की संयुक्त सतर्कता ने यह साबित कर दिया है कि बस्तर क्षेत्र में हिंसा का दायरा लगातार सिमट रहा है. यह इस इलाके को पूरी तरह से नक्सल मुक्त बनाने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है.