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क्या है मुरिया दरबार? जानिए इस अनूठी परंपरा का इतिहास जिसमें शामिल होंगी राष्ट्रपति मुर्मू

Chhattisgarh News: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निमंत्रण पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बस्तर आएंगी और दशकों पुरानी परंपरा 'मुरिया दरबार' में शामिल होंगी. इस अवसर के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं.

Written By Ranjana Kahar
Published: Oct 16, 2026, 09:12 AM IST | Updated: Oct 16, 2026, 09:23 AM IST
Image Credit: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का 22-23 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ दौरा
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 22 और 23 अक्टूबर को दो दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे पर रहेंगी. अपने दौरे के दौरान वे बस्तर की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और परंपरा के प्रतीक, विश्व प्रसिद्ध मुरिया दरबार में शामिल होंगी. दशहरा के अवसर पर आयोजित होने वाला यह दरबार बस्तर की दशकों पुरानी परंपरा का सबसे महत्वपूर्ण उत्सव है. इस बार परंपरा में एक बड़ा बदलाव किया गया है, अब मुरिया दरबार का आयोजन जगदलपुर के ऐतिहासिक लालबाग मैदान में होगा. अपने इस दौरे में राष्ट्रपति मुर्मू बस्तर की जनता को संबोधित भी करेंगी. इसके अलावा 22 अक्टूबर को रायपुर में युवा प्रबोधन कार्यक्रम में युवाओं को संबोधित करेंगी. यह कार्यक्रम इनडोर स्टेडियम में आयोजित किया जाएगा.
 

राष्ट्रपति के आगमन को लेकर अलर्ट मोड पर प्रशासन

राष्ट्रपति के हाई-प्रोफाइल दौरे को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं. सुरक्षा व्यवस्था, प्रोटोकॉल, भीड़ प्रबंधन, ट्रैफिक और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को लेकर विस्तृत चर्चा की गई. अधिकारियों ने लालबाग मैदान का खुद दौरा किया और वहां वीआईपी (VIP) तथा आम जनता के लिए आने-जाने के रास्तों और पार्किंग की व्यवस्था का जायजा लिया. भारी भीड़ जुटने की संभावना को देखते हुए, कड़े सुरक्षा इंतजाम करने और आम जनता के लिए सभी सुविधाएं सुचारू रूप से उपलब्ध कराने के सख्त निर्देश दिए गए हैं.

क्या है मुरिया दरबार?

'मुरिया दरबार' विश्व-प्रसिद्ध बस्तर दशहरा की एक ऐतिहासिक परंपरा है. यह 75 दिनों तक चलने वाले बस्तर दशहरा उत्सव के समापन का प्रतीक है. इसे स्थानीय जनजातियों की एक अनोखी जन-संसद माना जाता है. इसकी शुरुआत वर्ष 1876 में हुई थी. राजशाही के दौर में राजा अपने शाही वस्त्र उतारकर साधारण कपड़ों में जमीन पर बैठते थे, ताकि वे आम लोगों और जनजातीय समुदायों की समस्याओं को सुन सकें. आज के समय में इस सभा में बस्तर संभाग के चुने हुए प्रतिनिधि, सरकारी अधिकारी, पारंपरिक जनजातीय नेता और स्थानीय ग्रामीण शामिल होते हैं. यहां ग्रामीण अपनी परेशानियां और सुझाव रखते हैं. कहा जाता है कि मुरिया दरबार में बस्तर के 80 परगनों के मुखिया, चालकी और पुरुष व महिला सदस्य शामिल होते हैं. ये लोग अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं को सुनने के लिए अलग-अलग दरबार लगाते हैं.

यह भी पढ़ें: बस्तर दशहरा: 620 वर्षों की ऐतिहासिक परंपरा आज भी कायम...मां दंतेश्वरी की आराधना के साथ भव्य रथ उत्सव शुरू
 

जनजातीय संस्कृति का अनूठा उदाहरण

बस्तर का मुरिया दरबार केवल एक परंपरा नहीं है, बल्कि यह जनजातीय संस्कृति और लोकतंत्र का एक अत्यंत अनूठा उदाहरण है. रियासती दौर से चली आ रही यह विरासत जो शासक और प्रजा के बीच सीधे संवाद का माध्यम है, आज भी अपने मूल स्वरूप और भावना के साथ जीवित है. भले ही समय के साथ इसके तौर-तरीकों में बदलाव आया हो, लेकिन इसका मुख्य उद्देश्य लोगों की समस्याओं को सुनना और उनका समाधान करना आज भी वैसा ही है.  इस दरबार में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की भागीदारी इस ऐतिहासिक परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान और प्रतिष्ठा दिलाएगी.
 

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रंजना कहार एक डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें न्यूज़ मीडिया और डेस्क ऑपरेशंस के क्षेत्र में 4 सालों से ज्यादा का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीतिक हलचलों, क्राइम और स्थानीय मुद्दों (हाइपरलोकल खबरों) की सटीक, निष्पक्ष व तथ्य-आधारित कवरेज में उनकी एक्सपर्टीज है.छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (बिलासपुर) से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद रंजना ने अपने करियर की शुरुआत ETV भारत से की थी. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने APN न्यूज़ के साथ भी काम किया है. कंटेंट एडिटिंग, न्यूज़ प्रोडक्शन और डेस्क मैनेजमेंट पर मजबूत पकड़ होने के कारण वे रीडर्स तक खबरें तेजी, गुणवत्ता और प्रामाणिकता के साथ पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं.रंजना कहार से आप ranjana.kahar@india.com पर ईमेल के माध्यम से सीधे संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
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