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छत्तीसगढ़ में होने वाले नगरीय निकाय चुनावों से पहले राजनीतिक सरगर्मी बढ़ने लगी है. राज्य के चार प्रमुख नगर निगमों बीरगांव, भिलाई, भिलाई-चरौदा और रिसाली समेत कुल 15 निकायों में दिसंबर महीने में चुनाव होना प्रस्तावित है. हालांकि चुनाव आयोग ने अभी तक आधिकारिक तौर पर तारीखों का ऐलान नहीं किया है, लेकिन इससे पहले ही भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों पार्टी ने अपनी-अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करना शुरू कर दिया है.
BJP-कांग्रेस की तैयारियां तेज
संगठन स्तर पर तैयारियों को पुख्ता करते हुए भारतीय जनता पार्टी ने सभी 15 निकायों में चुनावी कमान संभालने के लिए प्रभारी और सह-प्रभाइयों की घोषणा कर दी है, जिससे पार्टी कार्यकर्ता सक्रिय मोड में आ गए हैं. वहीं, कांग्रेस भी पीछे नहीं है; उसने भी इन इलाकों के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किए हैं और संभावित उम्मीदवारों की पहचान करने और टिकट बंटवारे की प्रक्रिया पर काम शुरू कर दिया है. यानि दोनों पार्टियां तैयारियों में पूरी तरह जुटी हुई हैं.
स्थानीय नेताओं ने तेज की लॉबिंग
नगर निकायों में चुनावी सरगर्मियां शुरू होने के साथ ही स्थानीय स्तर पर नेताओं और टिकट के दावेदारों की सक्रियता भी काफी बढ़ गई है. वार्ड-स्तर के पदों से लेकर ऊंचे ओहदों तक, दावेदार अपनी दावेदारी मजबूत करने और टिकट पक्का करने के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से लगातार संपर्क और पैरवी कर रहे हैं. आने वाले दिनों में इन चुनावी गतिविधियों के और तेज होने की उम्मीद है. राज्य भर के 15 नगर निकायों (जिनमें चार नगर निगम भी शामिल हैं) में होने वाले चुनावों को लेकर प्रभारियों और सह-प्रभारियों से लगातार जमीनी रिपोर्ट जुटाई जा रही है. संगठन इन निकायों में पार्टी की जमीनी स्थिति का आकलन करने, स्थानीय स्तर के अहम मुद्दों की पहचान करने और संभावित उम्मीदवारों को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं व आम जनता की राय जानने के लिए काम कर रहा है.
इन 4 नगर निगम समेत 15 निकायों में होंगे चुनाव
इस साल जिन 15 नगरीय निकायों के चुनाव होने हैं, उनका कार्यकाल दिसंबर में खत्म हो रहा है. इनमें चार नगर निगम बिरगांव, भिलाई, भिलाई-चरौदा और रिसाली शामिल हैं. पांच नगर पालिकाएं- जामुल, सारंगढ़, बैकुंठपुर, शिवपुर-चरचा, और खैरागढ़. छह नगर पंचायतें— प्रेमनगर, मारो, कोंटा, नरहरपुर, भैरमगढ़, और भोपालपट्टनम शामिल हैं. इसके अलावा दो नई नगर पंचायतों तमनार और बड़ी करेली में पहली बार चुनाव होंगे.
स्थानीय निकाय चुनावों की तारीखों के ऐलान से ठीक पहले दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों का यह संगठनात्मक कदम राज्य के भविष्य के राजनीतिक माहौल को गरमाने के लिए काफी है. जहां बीजेपी नए नियुक्त प्रभारियों के जरिए बूथ स्तर तक अपने कार्यकर्ताओं को लामबंद कर रही है, वहीं कांग्रेस पर्यवेक्षकों के भरोसे सही उम्मीदवारों के चयन पर ध्यान केंद्रित कर रही है. तारीखों की घोषणा के बाद लॉबिंग और चुनावी जंग और तेज हो जाएगी.