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झीरम घाटी हत्याकांड: 2 महिला, 8 पुरुष...10 दोषियों को फांसी की सजा; किसका क्या गुनाह?

झीरम घाटी हत्याकांड में 13 साल बाद फैसला आखिरकार दोषियों को सजा मिल गई. NIA की विशेष अदालत ने 10 दोषियों को फंसी की सजा सुनाई है. इनमें 2 महिलाएं और 8 पुरुष शामिल हैं. जानिए कौन हैं ये 10 दोषी और किसका क्या गुनाह था?

Written By Pooja
Published: Sep 16, 2026, 09:11 PM IST | Updated: Sep 16, 2026, 09:48 PM IST
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छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी हत्याकांड में 13 साल बाद फैसला आया. जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने 2013 के नक्सली हमले के 10 दोषियों को मौत की सजा सुनाई है.  NIA कोर्ट के जज अजय सिंह राजपूत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया. जानकारी के मुताबिक दोषियों पर कुल 24 धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे, जिनमें से सात धाराओं में मौत की सजा सुनाई गई है. इन दोषियों में 2 महिलाएं और 8 पुरुष शामिल हैं. 5 सितंबर 2026 को अदालत ने सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराया था.

छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस पार्टी पूरे राज्य में परिवर्तन यात्रा निकाल रही थी. 25 मई 2013 को जब कांग्रेस का काफिला झीरम घाटी पहुंचा, तो घात लगाकर बैठे नक्सलियों ने हमला कर दिया. चारों तरफ से हुई अंधाधुंध गोलीबारी में 27 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हुए थे. इस हमले में छत्तीसगढ़ कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश पटेल मारे गए थे. विद्या चरण शुक्ल और उदय मुदलियार की भी मौत हो गई. इसके अलावा, सलवा जुडूम आंदोलन के प्रमुख नेता महेंद्र कर्मा की भी हत्या कर दी गई.

30 दिन के भीतर HC में अपील करने का अधिकार

करीब 13 साल तक चली सुनवाई के दौरान 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए और कई दस्तावेज भी पेश किए गए. कोर्ट के फैसले के मुताबिक दोषियों को दी गई सजा हाईकोर्ट के आदेश के बाद ही लागू होगी. तब तक सभी दोषी केंद्रीय जेल जगदलपुर में ही रहेंगे. दोषियों को फैसले के खिलाफ 30 दिन के भीतर हाई कोर्ट में अपील करने का अधिकार है. मामले में अभियोजन पक्ष ने दोषियों के लिए फांसी की सजा की मांग की थी, जबकि बचाव पक्ष ने सजा कम करने की मांग की थी.

किसका क्या गुनाह?
अदालत ने झीरम घाटी हमले के मामले में 10 दोषियों को मौत की सजा सुनाई है. इन सभी पर हमले में अलग-अलग भूमिका निभाने के आरोप थे, जिनमें सीधे हमले में शामिल होने से लेकर हथियार लूटने और हमले के लिए जरूरी समान जुटाने तक भी भूमिका शामील है.

प्रमिला मोडियम

प्रमिला मोडियम ने डिमरापाल कंपनी नंबर 2 के कैडरों के साथ झीरम घाटी हमले में शामिल हुई थी. उस पर घायलों पर हमला करने और हथियार लूटने का भी आरोप है.

चैतू लेकम 

चैतू लेकम की पहचान PLGA सेक्शन कमांडर के तौर पर की गई है. जांच के अनुसार वह झीरम घाटी हमले में शामिल था. उसके पास से FSL और अन्य सबूतों से जुड़े विस्फोटर बरामद होने बताया गया है. इन विस्फोटकों को झीरम हमले से संबंधित बताया गया है.

सुमित्र ​​पुनेम मोडियम 

सुमित्र ​​पुनेम मोडियम इस मामले में दोषी ठहराई गई दो महिला आरोपियों में से एक है. वह अन्य कैडरों के साथ झीरम घाटी पहुंची थी और हमले में शामिल हुई थी.

मुक्का मंडावी 

मुक्का मंडावी अन्य आरोपियों के साथ हमले में शामिल होने का आरोप है. उसपर पुलिसकर्मियों के हथियार लूटने का भी आरोप बताया गया है.

कवासी कोसा

कोसा कवासी भी झीरम हमले में शामिल आरोपियों में से एक है. झीरम हमले में हिस्सा लिया और पुलिसकर्मियों से हथियार लूटे. उस पर आरोप है कि वह हमले के समय वहां मौजूद था और हमले के बाद हथियार जब्त किए.

आयता मरकाम 

आयता मरकाम ने कोंडागांव और कांकेर से चावल और अन्य जरूरी सामान जुटाया था. इसके अलावा उसका नाम हमले में भी शामिल बताया गया है. आयता मरकाम की भूमिका सीधे हथियार चलाने के बजाय हमले के लिए जरूरी सामान और लॉजिस्टिकल सपोर्ट जुटाने से जुड़ा बताया गया है.

मड़कामी देवा 

मड़कामी देवा की पहचान दरभा संभाग कमेटी के सदस्य के तौर पर की गई है. इसमें बताया गया है कि हमले के लिए लॉजिस्टिकल सहायता देने में उसकी भूमिका थी.मड़कामी हमला करने के लिए जरूरी संसाधन और मदद उपलब्ध कराने में वह शामिल था.

जोगा मड़कम 

जोगा मड़कम झीरम हमले में शामिल था और उसने पुलिसकर्मियों से हथियार लूटे थे. उसकी भूमिका हमले में सीधे तौर पर शामिल होने और घटना के बाद हथियार जब्त करने से जुड़ी है.

बंजमी सन्ना

बंजमी सन्ना की पहचान दर्भा संभाग कमिटी के सदस्य के तौर पर भी की गई है. बंजमी हमले के लिए चावल और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी दूसरी चीजें जुटाई थीं. उस पर फंड इकट्ठा करने के लिए जबरन वसूली करने का भी आरोप है.

महादेव नाग

महादेव नाग की भूमिका दूसरे आरोपियों से अलग बताई गई है. धारा 164 CRPC के तहत दर्ज बयान में घटना वाली जगह पर उसकी मौजूदगी और हमले में उसकी भूमिका का जिक्र किया गया था. जांच के दौरान दर्ज बयान को उसके खिलाफ अहम सबूत के तौर पर पेश किया गया था.

ये भी पढ़ें: 13 साल बाद इंसाफ: झीरम कांड के गुनहगारों को सजा-ए-मौत, NIA की विशेष अदालत ने 10 दोषियों को सुनाई फांसी की सजा

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About the Author

पूजा सिंह एक डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें न्यूज़ मीडिया में 5 सालों से ज्यादा का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीतिक हलचलों, क्राइम और स्थानीय (हाइपरलोकल) मुद्दों की सटीक व रियल-टाइम डिजिटल कवरेज पर उनकी मजबूत पकड़ है.माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी करने के बाद पूजा ने अपने करियर की शुरुआत ETV भारत से की थी. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने Inshorts और नवभारत जैसे प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में काम करते हुए डिजिटल जर्नलिज्म, कंटेंट क्यूरेशन और न्यूज़ डेस्क ऑपरेशंस का अनुभव हासिल किया. वे खबरों की प्रामाणिकता और ग्राउंड रियलिटी को प्राथमिकता देती हैं, ताकि पाठकों तक हर जरूरी अपडेट तेजी से पहुंचे.पूजा सिंह से आप Pooja1.Singh@India.com पर ईमेल के माध्यम से सीधे संपर्क कर सकते हैं.
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