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बस्तर दशहरा: नक्सलवाद के खात्मे के बाद अंदरूनी इलाकों से पहुंचेंगे देवी-देवता, मंदिरों में भेजा गया आमंत्रण

बस्तर दशहरा की विशेष रस्म मावली परघाव मंगलवार देर शाम संपन्न हुई. इस आयोजन के दौरान राजपरिवार ने फूलों से बना ताज पहनकर 618 साल पुरानी परंपरा का निर्वहन किया. भक्तों ने देवी के सम्मान में कई जगहों पर फूल बरसाकर उनका स्वागत किया.

Written By Ranjana Kahar
Published: Oct 21, 2026, 06:04 PM IST | Updated: Oct 21, 2026, 06:07 PM IST
Image Credit: नक्सलवाद के खात्मे के बाद बस्तर दशहरा में ऐतिहासिक बदलाव
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छत्तीसगढ़ का विश्व-प्रसिद्ध 75 दिनों तक चलने वाला 'बस्तर दशहरा' इस वर्ष अपनी परंपरा और संस्कृति में एक नया और स्वर्णिम अध्याय जोड़ रहा है. इस 75 दिवसीय उत्सव की एक अनूठी विशेषता यह है कि इसमें बस्तर क्षेत्र के सुदूर कोनों से देवी-देवता शामिल होने आते हैं. रियासती काल की परंपरा के अनुसार, बस्तर का राजपरिवार इस क्षेत्र की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी को जगदलपुर आने का निमंत्रण देता है. इसके बाद देवी की पालकी दंतेवाड़ा से जगदलपुर लाई जाती है. इस वर्ष नक्सलवाद के खात्मे के बाद बस्तर दशहरा के आयोजन में एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है.

नक्सलवाद के खात्मे के बाद बस्तर दशहरा में बदलाव

इस साल की सबसे महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक घटना यह है कि बस्तर के सुदूर ग्रामीण इलाकों में स्थित गुड़ियों (मंदिरों) को भी अब निमंत्रण भेजे गए हैं. परंपरा के अनुसार बस्तर के ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद ऐसी सभी गुड़ियों को निमंत्रण दिया जाता है. इसके बाद, संबंधित पुजारियों द्वारा लाए गए 'छत्र' के रूप में देवता बस्तर दशहरा में शामिल होने के लिए आते हैं. अंगा भी लोगों के आकर्षण का मुख्य केंद्र होती हैं.  बस्तर में नक्सलवाद के कम होने की वजह से इस साल उन मंदिरों तक भी निमंत्रण पहुंचाना संभव हो पाया है, जो सबसे भीतरी और दुर्गम ग्रामीण इलाकों में स्थित हैं.

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मावली परघाव की रस्म पूरी

बस्तर राजपरिवार के प्रमुख सदस्य, कमलचंद भंजदेव का कहना है कि इस क्षेत्र से नक्सलवाद के खत्म होने के साथ ही इस साल के बस्तर दशहरा में एक नया अध्याय लिखा जा रहा है. मावली परघाव रस्म पूरी हो चुकी है और अब कुटुंब जात्रा रस्म में बस्तर दशहरा में शामिल होने आए देवी देवताओं को राज परिवार के सदस्यों द्वारा विधि विधान से पूजा पाठ कर विदाई दी जाती है.

सड़कों पर फूल बिछाए गए

मावली परघाव रस्म के दौरान देवी के स्वागत के लिए सड़कों पर फूल बिछाए गए. रास्ते में कई जगहों पर भक्तों ने देवी का स्वागत करने के लिए उन पर फूल बरसाए और साथ ही शानदार आतिशबाजी भी की गई. देवी की पालकी और उनके पारंपरिक छत्र की एक झलक पाने के लिए हजारों भक्त इकट्ठा हुए. कई लोग देवी का स्वागत करने और उनका आशीर्वाद पाने के लिए अपने घरों की छतों पर भी जमा हुए. दंतेवाड़ा जिले के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (SP) भी पालकी और छत्र के साथ जगदलपुर तक आए. 
 

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रंजना कहार एक डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें न्यूज़ मीडिया और डेस्क ऑपरेशंस के क्षेत्र में 4 सालों से ज्यादा का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीतिक हलचलों, क्राइम और स्थानीय मुद्दों (हाइपरलोकल खबरों) की सटीक, निष्पक्ष व तथ्य-आधारित कवरेज में उनकी एक्सपर्टीज है.छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (बिलासपुर) से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद रंजना ने अपने करियर की शुरुआत ETV भारत से की थी. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने APN न्यूज़ के साथ भी काम किया है. कंटेंट एडिटिंग, न्यूज़ प्रोडक्शन और डेस्क मैनेजमेंट पर मजबूत पकड़ होने के कारण वे रीडर्स तक खबरें तेजी, गुणवत्ता और प्रामाणिकता के साथ पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं.रंजना कहार से आप ranjana.kahar@india.com पर ईमेल के माध्यम से सीधे संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
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