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मौसम और संक्रामक बीमारियों के बीच छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य विभाग के सामने एक नई चुनौती खड़ी होती दिख रही है. राज्य के कई जिलों से स्वाइन फ्लू (H1N1) के मामले सामने आ रहे हैं. वहीं गरियाबंद जिले में एक मरीज के स्वाइन फ्लू के साथ-साथ कोविड-19 से भी संक्रमित होने की खबरों ने चिंता बढ़ा दी है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर स्थिति कितनी गंभीर है, किन जिलों में संक्रमण पहुंच चुका है, इसके लक्षण क्या हैं और कोरोना तथा स्वाइन फ्लू में अंतर कैसे किया जा सकता है?
गरियाबंद जिले में कोरोना और स्वाइन फ्लू की दस्तक
गरियाबंद जिले में कोरोना और स्वाइन फ्लू के 3 पॉजिटिव मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य अमला एक्टिव हो गया है. इनमें एक कोरोना मरीज और दो स्वाइन फ़्लू मरीज शामिल हैं. बताया जा रहा है कि सभी मामलों में ट्रैवल हिस्ट्री सामने आई है. जानकारी के अनुसार, कोरोना पॉजिटिव मरीज गरियाबंद मुख्यालय का रहने वाला बताया जा रहा है. स्वाइन फ्लू के दो मरीजों में से एक मैनपुर का और दूसरा गरियाबंद का बताया जा रहा है. संक्रमण की पुष्टि होने के बाद, हेल्थ डिपार्टमेंट मरीजों और उनके संपर्क में आए लोगों की स्थिति पर नजर रख रहा है. बताया जा रहा है कि संक्रमित मरीजों के संपर्क में आए लगभग 13 लोगों के सैंपल टेस्टिंग के लिए लिए गए हैं. उनकी रिपोर्ट आने के बाद जिले में संक्रमण की स्थिति साफ हो जाएगी. सैंपल रिपोर्ट के लगभग 24 से 48 घंटों में आने की संभावना है.
स्वास्थ्य विभाग ने की सतर्क रहने की अपील
साथ ही, यह बात भी सामने आ रही है कि अभी जिले में जांच और टेस्टिंग की संख्या ज्यादा नहीं है. ऐसे में अगर जांच का दायरा बढ़ाया जाता है, तो संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. कोरोना और स्वाइन फ्लू के मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है. विभाग ने भीड़-भाड़ वाली जगहों से दूरी बनाए रखने और सेहत से जुड़े लक्षण दिखने पर जांच करवाने की सलाह दी है.
छत्तीसगढ़ में कितना फैल चुका है H1N1?
गरियाबंद का मामला सामने आने से पहले ही राज्य के कई जिलों में H1N1 संक्रमण के मामले सामने आ चुके थे. रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ के 24 जिलों में कुल 344 स्वाइन फ्लू के मामले दर्ज किए गए थे. इससे पहले 8 सितंबर तक मामलों की संख्या 298 थी. जिलेवार उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, रायपुर सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में से एक था, जबकि दुर्ग, बिलासपुर, कोरबा, रायगढ़, धमतरी, महासमुंद और राजनांदगांव सहित कई अन्य जिलों में भी मामले सामने आए थे.
बिलासुर में सात मामले सामने आए थे
सितंबर की शुरुआत में बिलासपुर में H1N1 के सात मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ा दी. वहां कुछ मरीज ठीक होकर घर लौट चुके थे, जबकि कुछ का इलाज अभी भी चल रहा था. अस्पतालों में आइसोलेशन और दवा का इंतजाम किया गया था. दुर्ग जिले में अगस्त में लगभग तीन साल की एक बच्ची में H1N1 संक्रमण की पुष्टि हुई थी. उसे आइसोलेशन वार्ड में रखा गया था और उसकी हालत स्थिर बताई गई थी. इससे पता चलता है कि स्थिति सिर्फ एक जिले तक सीमित नहीं है. राज्य के अलग-अलग हिस्सों से मामले सामने आने के कारण, स्वास्थ्य विभाग के लिए निगरानी और समय पर जांच बहुत जरूरी हो गई है. हालांकि इन जिलों में सिर्फ स्वाइन फ्लू के मामले सामने आए हैं.
स्वाइन फ्लू क्या है?
स्वाइन फ्लू सांस से जुड़ा एक इन्फेक्शन है जो आमतौर पर H1N1 वायरस (इन्फ्लूएंजा A का एक प्रकार) से होता है. यह वायरस करीबी संपर्क और संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने पर निकलने वाली बूंदों से फैलता है. इसका मतलब यह नहीं है कि सुअर का मांस खाने से किसी को स्वाइन फ्लू हो सकता है. H1N1 मुख्य रूप से सांस से जुड़े इन्फेक्शन के तौर पर फैलता है और इसके लक्षण अक्सर आम फ्लू जैसे ही होते हैं. इनमें बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद नाक, सिरदर्द, शरीर और जोड़ों में दर्द, कमजोरी और भूख न लगना शामिल हो सकते हैं. कुछ मरीजों को जी मिचलाना, उल्टी या दस्त की समस्या भी हो सकती है.
कोविड-19 और स्वाइन फ्लू के लक्षणों को कैसे पहचानें?
अभी सबसे बड़ी चुनौती लक्षणों के आधार पर इन दोनों संक्रमणों में फर्क करना है. COVID-19 और H1N1 दोनों में ही बुखार, खांसी, थकान, गले में खराश और शरीर में दर्द हो सकता है. कुछ मरीजों को सांस लेने में भी तकलीफ हो सकती है. इसलिए सिर्फ लक्षणों के आधार पर यह तय करना नामुमकिन है कि किसी व्यक्ति को COVID-19 है या स्वाइन फ्लू. इसी वजह से अगर किसी को लगातार बुख़ार, खांसी या सांस लेने में तकलीफ हो और हाल ही में उसने यात्रा की हो या किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आया हो तो डॉक्टर से सलाह लेना सबसे अच्छा है. स्थिति के आधार पर डॉक्टर COVID-19 या स्वाइन फ्लू की जांच करवाने की सलाह दे सकते हैं.
किन लोगों को ज्यादा सावधान रहना चाहिए?
हर संक्रमित व्यक्ति को गंभीर बीमारी हो, यह जरूरी नहीं है. लेकिन कुछ लोगों में सांस का संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है. छोटे बच्चों, बुज़ुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों को खास सावधानी बरतनी चाहिए. अगर ऐसे लोगों में बीमारी के लक्षण दिखें, तो घर पर ज्यादा समय तक इंतजार करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है.
इलाज कैसे होता है?
स्वाइन फ्लू का इलाज मरीज की हालत और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करता है. हर मरीज को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत नहीं होती. हल्के मामलों में डॉक्टर आराम करने, भरपूर तरल पदार्थ लेने और लक्षणों के आधार पर इलाज की सलाह दे सकते हैं, जबकि कुछ मामलों में एंटीवायरल दवा की जरूरत पड़ सकती है. सबसे जरूरी बात यह है कि मरीजों को एंटीबायोटिक्स या दूसरी दवाएं खुद से नहीं लेनी चाहिए, क्योंकि हर वायरल संक्रमण के लिए एंटीबायोटिक्स जरूरी नहीं होतीं. स्वास्थ्य अधिकारियों ने लोगों से यह भी अपील की है कि वे बिना डॉक्टरी सलाह के दवा न लें. इसी तरह, कोविड-19 का इलाज भी बीमारी की गंभीरता और मरीज की सेहत की स्थिति के आधार पर तय किया जाता है. इसलिए, कोविड-19 और H1N1 दोनों के लिए डॉक्टर से सलाह लेना और समय पर जांच करवाना बहुत जरूरी है.
किन लक्षणों के दिखने पर तुरंत अस्पताल जाना चाहिए?
अगर सांस लेने में तकलीफ (बुखार और खांसी के साथ हालत का बिगड़ना), सीने में दर्द या दबाव, बहुत ज्यादा कमजोरी, चक्कर आना या उलझन, या लगातार उल्टी जैसे लक्षण दिखें तो इसे आम फ़्लू समझकर घर पर इंतजार नहीं करना चाहिए. बच्चों में तेजी से सांस लेना, सांस लेने में तकलीफ, ठीक से तरल पदार्थ न ले पाना, बहुत ज्यादा सुस्ती, या शुरुआती सुधार के बाद तेज बुखार और गंभीर खांसी का दोबारा होना गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है. ऐसे मामलों में तुरंत डॉक्टरी मदद लेना जरूरी है.
सबसे बड़ा सवाल, संक्रमण से बचने के लिए क्या करें?
बचाव के सबसे असरदार उपाय बहुत आसान हैं, लेकिन उन्हें लगातार अपनाना जरूरी है. खांसते या छींकते समय अपना मुंह और नाक ढकें. साबुन और पानी से नियमित रूप से अपने हाथ धोएं. बिना हाथ धोए अपनी आंखों, नाक और मुंह को छूने से बचें. बीमार लोगों के ज्यादा करीब जाने से बचें. जिन लोगों में बुखार, खांसी या छींक जैसे लक्षण हों, उन्हें भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचना चाहिए. इससे दूसरों में संक्रमण फैलने का खतरा कम होता है.