)
छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के सनसनीखेज दोहरे हत्याकांड में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. हेड कांस्टेबल के परिवार को बेरहमी से दुष्कर्म और हत्या करने वाले दरिंदों को उनके मुकाम तक पहुंचा दिया गया है. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई में विशेष न्यायाधीश आनंद प्रकाश वारियाल ने मुख्य आरोपी कुलदीप साहू, फूल सिंह उर्फ रिंकू और चंद्रकांत चौधरी को दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई है.
वहीं साजिश की कड़ी बने चौथे आरोपी आर्यन विश्वकर्मा को उम्रकैद की सजा सुनाई है. अदालत ने फैसला सुनाने से पहले मुख्य आरोपी कुलदीप के बेखौफ और अड़ियल रबैये पर भारी नाराजगी जताई है. इस फैसले के बाद पीड़ित पुलिस परिवार और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस लेते हुए न्याय मिलने पर खुशी जताई है.
पुलिस के लिए थी चुनौती
बता दें कि प्रधान आरक्षक के परिवार के साथ हुई बर्बरता की खूनी वारदात पुलिस महकमे के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई थी. क्योंकि इस सनसनीखेज वारदात का कोई भी सीधा चश्मदीद गवाह मौजूद नहीं था. लेकिन खाकी ने हार नहीं मानी, पुलिस टीम ने सबूतों का ऐसा अभेद्य चक्रव्यूह तैयार किया, जिससे कातिलों के बचने का कोई रास्ता नहीं बचा. मौके से मिले फिंगरप्रिंट, डीएनए रिपोर्ट, ब्लड ग्रुपिंग, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज जैसे पुख्ता इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को अदालत में पेश कर पुलिस ने गुनाह की पूरी साजिश बेनकाब कर दिया.
कोर्ट में बताई पूरी कहानी
कोर्ट के अंदर सरकारी वकील ने 13 अक्टूबर 2024 की उस काली रात की पूरी हैवानियत का कच्चा-चिट्ठा खोलकर रख दिया. अभियोजन के मुताबिक, उस रात आरोपियों ने पहले बिरयानी सेंटर के पास पुलिस सिपाही घनश्याम सोनवानी पर खौलता हुआ तेल उड़ेला. इसके बाद हेड कांस्टेबल और अन्य पुलिसकर्मियों पर गाड़ी चढ़ाकर उन्हें कुचलने की कोशिश की. जब वे इसमें नाकाम रहे, तो सीधे प्रधान आरक्षक के घर में घुस गए.
कोर्ट में अहम सबूत पेश किए
आरोप यह भी है कि घर में घुसने के बाद आरोपियों ने प्रधान आरक्षक के 11 साल के मासूम बेटे पर 28 बार और उनकी पत्नी पर 33 बार धारदार हथियार से जानलेवा वार किए. गंभीर रूप से घायल महिला के साथ दुष्कर्म किए जाने का भी आरोप है. मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन ने आरोपियों के कपड़ों पर मिले खून के निशान और कुलदीप के फिंगरप्रिंट्स को अहम साक्ष्य के तौर पर पेश किया.
वकील ने क्या-क्या बताया?
वकील सुरेश प्रसाद शर्मा ने बताया कि अदालत ने मामले में अपराध की गंभीरता और आरोपियों के आचरण को ध्यान में रखते हुए कहा कि उनमें अपराध को लेकर कोई पछतावा दिखाई नहीं दिया. इसके बाद मुख्य आरोपी कुलदीप साहू, चंद्रकांत चौधरी उर्फ सीके और फूल सिंह उर्फ रिंकू को फांसी की सजा सुनाई गई. वहीं, 20 साल की उम्र और केवल फोन के जरिए साजिश में शामिल होने की भूमिका को देखते हुए आर्यन विश्वकर्मा को उम्रकैद की सजा दी गई.
पीड़ित परिवार बेहत खुश
वहीं पीड़ित के परिजन मोहम्मद आरिफ शेख का कहना है कि इस फैसले के बाद पीड़ित परिवार के लोग भी बेहद खुश नजर आए, उन्होंने यह माना कि आखिरकार न्यायालय के इस फैसले से उनको और मृतक मां बेटी को न्याय मिल गया. यह दो साल का सफर पीड़ित पक्ष के लिए बेहद कठिन रहा, लेकिन न्यायालय के इस फैसले के बाद उन्हें इस वेदना से बाहर निकलने के सहायता मिलेगी. इस दौरान उनके द्वारा पुलिस परिवार के द्वारा सहयोग की भी तारीफ की.
सभी वर्गों ने स्वागत किया
स्कूल के अध्यक्ष सुनील अग्रवाल ने बताया कि इस फैसले के बाद स्थानीय लोगों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है, उन्होंने कहा कि यह एक ऐतिहासिक फैसला है. इस फैसले का सभी वर्गों ने स्वागत किया है. इस फैसले के बाद जहां एक ओर पीड़ित पक्ष को न्याय मिल गया. वहीं यह फैसला अन्य अपराधियों के लिए भी एक नजीर बनेगा. वहीं इस फैसले से छात्रा और महिलाएं भी काफी खुश नजर आई.
कानून की सबसे बड़ी जीत
सदर जामा मस्जिद के इस्तियाक अहमद ने बताया कि इस दोहरे हत्याकांड में आया फैसला सिर्फ एक सजा नहीं, बल्कि कानून के इकबाल की सबसे बड़ी जीत है, बिना किसी चश्मदीद गवाह के खाकी की वैज्ञानिक तफ्तीश और अदालत में सरकारी वकील की दमदार दलीलों ने साबित कर दिया कि वर्दी पर हमला करने और बेकसूरों का खून बहाने वालों के लिए कानून की चौखट पर कोई रहम नहीं होता है. अदालत के इस फैसले ने जहां पीड़ित परिवार के जख्मों पर इंसाफ का मरहम लगाया है, वहीं समाज में यह साफ पैगाम भी दे दिया है कि जुर्म की दुनिया में खुद को हीरो समझने वालों का आखिरी मुकाम सिर्फ और सिर्फ फांसी का फंदा ही होता है.
(रिपोर्टः ओपी तिवारी, सूरजपुर)