छत्तीसगढ़ में मानसून की गतिविधियां अभी पूरी तरह थमी नहीं है. प्रदेश के कई जिलों में आज भी बारिश का दौर जारी रहने के आसार हैं. कई जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश और गरज-चमक के आसार हैं. मौसम विभाग ने कुछ इलाकों में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने की संभावना जताई है. हालांकि बारिश थमने के बाद अब नदियों नालों का जलस्तर घटने से राहत मिली है. रायपुर में महादेव घाट पुल पर आवाजाही बहाल कर दी गई है.
रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, बालोद, कांकेर, बलौदा बाजार, जांजगीर-चांपा, बिलासपुर, कोरबा, बेमेतरा, कबीरधाम और मुंगेली में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं. वहीं, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, सरगुजा, सूरजपुर, कोरिया और बलरामपुर में आंधी-तूफान के साथ बारिश होने की उम्मीद है. खराब मौसम के इस दौर में बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की भी संभावना है. वहीं बारिश रुकने के बाद नदियों और नालों में जलस्तर कम हो गया है. रायपुर में महादेवघाट पुल पर लोगों की आवाजाही फिर से शुरू हो गई है. अमलेश्वर जाने वाला यह रास्ता पिछले दो दिनों से बंद था.
रायपुर का मौमस
28 सितंबर को राजधानी रायपुर में आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहने और एक-दो जगहों पर बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है. अधिकतम तापमान के 33 डिग्री और न्यूनतम तापमान के 25 डिग्री के आसपास रहने की उम्मीद है.
दुर्ग सबसे गर्म
राज्य में सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान दुर्ग में 31.6°C दर्ज किया गया. सबसे कम न्यूनतम तापमान 19°C था, जो पेंड्रा रोड और अंबिकापुर में दर्ज किया गया. माना एयरपोर्ट पर तापमान 31.4°C अधिकतम और 22.5°C न्यूनतम तापमान रहा, बिलासपुर में 30.7°C अधिकतम और 22.7°C न्यूनतम और जगदलपुर में 31.4°C अधिकतम तापमान और 21.6°C में न्यूनतम तापमान दर्ज किया गया.
क्या है मौसम का हाल?
मौसम विभाग के अनुसार, 27 सितंबर को सुबह 8:30 बजे मध्य उत्तर प्रदेश के उत्तरी हिस्सों पर बना कम दबाव का क्षेत्र उसी इलाके में बना हुआ था. इससे जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण समुद्र तल से 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला हुआ है. इसके उत्तर-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ने और अगले 12 घंटों में कमजोर पड़ने की संभावना है. बिहार से झारखंड और ओडिशा होते हुए पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी तक उत्तर-दक्षिण दिशा में एक ट्रफ (कम दबाव का क्षेत्र) फैला हुआ है.
इंद्रावती नदी ने तोड़ा 50 साल का रिकॉर्ड
इस बीच, चक्रवाती तूफान अर्नब के कारण इंद्रावती नदी ने 50 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया. बस्तर में इंद्रावती नदी के लिए खतरे का निशान 8.3 मीटर तय है. इससे पहले सबसे ज़्यादा जलस्तर 12.18 मीटर 9 जुलाई, 1973 को दर्ज किया गया था, जबकि रविवार, 27 सितंबर को नदी का जलस्तर बढ़कर 12.39 मीटर के नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गया. हालांकि अब नदी का उग्र बहाव कम होता दिख रहा है. बस्तर में हालात सामान्य होने के साथ ही नेशनल हाईवे 30 और नेशनल हाईवे 63 पर यातायात बहाल कर दिया गया है. हालांकि, स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने इस इलाके में आने वाले पर्यटकों के लिए एडवाइज़री जारी की है, क्योंकि बस्तर के सभी झरने जिनमें चित्रकोट और तीरथगढ़ शामिल हैं, अभी पूरे उफान पर हैं. प्रशासन ने पर्यटकों से झरनों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की है.