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Indian Garment Exports : अमेरिका में रूस और ईरान से जुड़े प्रतिबंधों को लेकर बने नए कानून ने भारतीय टेक्सटाइल और गारमेंट उद्योग की चिंता बढ़ा दी है. उद्योग संगठन कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री (CITI) ने केंद्र सरकार से अमेरिका के साथ बातचीत करने की अपील की है. आशंका है कि अगर भारत से जुड़े निर्यात पर एडिशनल अमेरिकी टैरिफ लगाए जाते हैं, तो इसका सीधा असर अमेरिकी बाजार में भारतीय कपड़ों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर पड़ सकता है. ये मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका भारत के टेक्सटाइल और अपैरल एक्सपोर्ट का सबसे बड़ा सिंगल मार्केट है.
बता दें, अमेरिका में Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 पर हस्ताक्षर किए गए हैं. इस कानून के तहत अमेरिकी प्रशासन को उन देशों के खिलाफ 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की शक्ति मिलती है, जो रूस से तेल और गैस खरीदते हैं. भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है. ऐसे में अगर अमेरिकी प्रशासन इस कानून के तहत भारत पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का फैसला करता है, तो भारतीय उत्पादों के लिए अमेरिकी बाजार में लागत बढ़ सकती है.
भारतीय टेक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर में बड़ी संख्या में MSME यानी छोटे और मध्यम उद्योग शामिल हैं. ये कंपनियां कीमतों को लेकर काफी संवेदनशील अमेरिकी बाजार में काम करती हैं. अगर अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगता है, तो मुख्य रूप से तीन तरह का दबाव बन सकता है:
यानी समस्या सिर्फ अतिरिक्त टैक्स तक सीमित नहीं है. इसका असर ऑर्डर, कीमत और भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर भी पड़ सकता है.
CITI के चेयरमैन अश्विन चंद्रन के मुताबिक, एडिशनल टैरिफ को भारत का MSME टेक्सटाइल उद्योग आसानी से एब्जॉर्ब नहीं कर पाएगा. संगठन ने भारत सरकार से अमेरिका के साथ बातचीत करने और ऐसा निष्पक्ष, संतुलित और अनुमानित इंडिया-US ट्रेड फ्रेमवर्क तैयार करने की अपील की है. इससे भारतीय निर्यातकों को अचानक बढ़ने वाली लागत और अनिश्चितता से बचाया जा सके. CITI का कहना है कि भारत और अमेरिका के बीच मजबूत सहयोग से टेक्नोलॉजी, सप्लाई-चेन और वैल्यू चेन इंटीग्रेशन के क्षेत्र में भी अवसर बढ़ सकते हैं.
भारत ने हाल के वर्षों में कई देशों के साथ व्यापार समझौतों के जरिए अपने निर्यात बाजारों को बढ़ाने की कोशिश की है. ऐसे समझौतों से भारतीय टेक्सटाइल कंपनियों को अमेरिका के अलावा दूसरे बाजारों में विस्तार का मौका मिल सकता है. लेकिन CITI के मुताबिक, इन समझौतों का फायदा तुरंत नहीं मिलता है. नए बाजार में पहुंच बनाने के लिए कंपनियों को नए खरीदार, सप्लाई नेटवर्क और लॉजिस्टिक्स तैयार करने में समय लगता है. इसलिए अगर अमेरिकी बाजार में अचानक बड़ी बाधा आती है, तो दूसरे बाजारों में निर्यात बढ़ाना उसका तत्काल ऑप्शन नहीं बन सकता है.
हालिया आंकड़ों में सेक्टर की तस्वीर मिली-जुली नजर आती है. अगस्त 2026 में भारत के टेक्सटाइल और अपैरल एक्सपोर्ट में सालाना आधार पर 6.39 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई. लेकिन, दोनों क्षेत्रों का प्रदर्शन अलग-अलग रहा है:
अप्रैल से अगस्त 2026 के दौरान, टेक्सटाइल एक्सपोर्ट में 6.94 प्रतिशत की ग्रोथ हुई है. अपैरल एक्सपोर्ट में 9.10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई. टेक्सटाइल और अपैरल को मिलाकर कुल एक्सपोर्ट में 0.24 प्रतिशत की मामूली गिरावट रही है.
अगर अमेरिका भारतीय उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लागू करता है, तो इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि टैरिफ कितना लगाया जाता है और उसका भार किसके हिस्से में आता है. अमेरिकी आयातकों को भारतीय उत्पादों पर ज्यादा शुल्क देना पड़ सकता है. इसका कुछ हिस्सा कीमतों में आगे बढ़ाया जा सकता है. अगर अमेरिकी खरीदार कीमत बढ़ाने के लिए तैयार नहीं होते, तो भारतीय कंपनियों को अपनी कीमत या मुनाफे के मार्जिन में कटौती करनी पड़ सकती है. गारमेंट कारोबार में कीमत एक महत्वपूर्ण फैक्टर है.