रूस की मजबूरी, चीन की मौज: क्यों खजाना खाली कर रहे हैं पुतिन, रातोंरात बेच दिया 62000 किलो सोना
Russia Gold Export: रूस बीते 10 महीनों से लगातार अपान सोना बेच रहा है. रूस के खजाने में सोने का रिजर्व गिरता जा रहा है. वहीं चीन इस मौका का पूरा फायदा उठाने में जुटा है.
Russia Gold Export: साल 2022 से यूक्रेन के साथ युद्ध लड़ रहा रूस भारी आर्थिक संकट से जूझ रहा है. यूक्रेन ने रूस की रिफाइनरियों को निशाना बनाकर सीधे उसकी अर्थव्यवस्था पर चोट कर दी है. रूस के डीजल निर्यात में 77% की गिरावट आई है. रूस के अधिकांश हिस्सों में गैसोलीन की सप्लाई प्रभावित हो रही है. युद्ध का असर सिर्फ तेल पर ही नहीं, बल्कि रूस के सोने के भंडार पर भी दिख रहा है. हालात ऐसे बने कि बीते 10 महीनों में रूस ने अपने सोने के भंडार से 62 टन सोना बेच दिया.
क्यों धड़ाधड़ सोना बेच रहा है रूस ?
सितंबर 2026 में रूस से 6.2 टन सोना बेचा है. बैंक ऑफ रशिया के डेटा के मुताबिक रूस लगातार सोना बेच रहा है. दिसंबर 2025 से लेकर सितंबर 2026 तक रूस से 62 टन से अधिक सोना बेच दिया है. जिसके बाद रूस का गोल्ड रिजर्व घटकर 2264 टन पर पहुंच गया. अगर भारतीय रुपये में अगर इसका आंकलन करें, तो सितंबर के आखिरी में रूस में बचे गोल्ड भंडार की कीमत करीब 28,350,400 करोड़ रुपये रहा, जबकि अगस्त 2026 में रूस के कुल गोल्ड रिजर्व की वैल्यूएशन 31,349,000 करोड़ रुपये था.
2019 के बाद निचले स्तर पर रूस के सोने का भंडार
1998 के वित्तीय संकट के दौरान भी रूस से खूब सोना बेचा था. एक बार फिर से उसे दोहरा रहा है. रूस का गोल्ड रिजर्व साल 2019 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है. हालांकि सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर रूस को ऐसा करना क्यों पड़ा है ?
किस संकट में फंसा है रूस?
यूक्रेन युद्ध से रूस पर वित्तीय बोझ बढ़ा है. अमेरिका की ओर से रूसी तेल और गैस के निर्यात पर प्रतिबंध लगा था. युद्ध और निर्यात पर लगे बैन ने रूस की अर्थव्यवस्था का खोखला कर दिया, जिसके बाद सोना बेचकर मॉस्को इसकी भरपाई करने में जुटा है.
साल 2022 से पहले तक रूस की रणनीति 'सोना जमा करने की' थी, लेकिन अब वो बिल्कुल इसके विपरीत चल रहा है. सितंबर 2026 के आखिरी में रूस से पास 301.6 अरब डॉलर का सोना बचा था. एक महीने पहले ये आंकड़ा 333.5 अरब डॉलर था.
रूस का बजट घाटा बढ़ता जा रहा है. कमाई से ज्यादा खर्च हो रहा है. सैन्य और सुरक्षा बजट कुल सरकारी खर्च का 38% पर पहुंच चुका है. ऐसे में सरकार बढ़ते खर्च की भरपाई सोना बेचकर कर रही है.
तेल से कमाई, अमेरिका के साथ डील फिर भी सोना बेचने पर मजबूर
रूस के पास 80 अरब बैरल से अधिक का तेल भंडार है. ईरान युद्ध के दौरान जब होर्मुज स्ट्रेट का रास्ता बंद हुआ रूसी तेल की डिमांड बढ़ी. Russian Oil Tracker डेटा के मुताबिक सितंबर 2026 में रूस ने कच्चे तेल का निर्यात कर 13.9 अरब डॉलर प्रतिदिन की कमाई की है. अक्टूबर में इसमें 10% का उछाल आया. हाल ही में रूस से अमेरिका के साथ डीजल एक्सपोर्ट का समझौता किया है. जिसके बाद अप्रैल 2027 तक के लिए रूस के तेल निर्यात से प्रतिबंध हटा लिया गया है. तेल से कमाई बढ़ रही है, लेकिन इसके बावजूद रूस को अपना सोना बेचना पड़ रहा है, क्योंकि सरकार का घाटा और सैन्य खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है.
कौन खरीद रहा है रूस का सोना ?
जहां एक तरफ रूस सोना बेच रहा हैं, तो वहीं दूसरी ओर चीन लगातार सोने का आयात बढ़ा रहा है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक 2025 की पहली छमाही में रूस से चीन को सोने-चांदी समेत कीमती मेटल्स का आयात मूल्य लगभग दोगुना हो गया है. चीन के ट्रेड डेटा मॉनिटर इस आयात में सालाना आधार पर 80% की बढ़ोतरी हुई है, जो करीब 1 अरब डॉलर के करीब है.
चीन सबसे ज्यादा सोना रखने वाला 5वां देश, तीसरे नंबर पर पहुंचने की होड़
फाइनेंशियल प्लेटफॉर्म 'द कोबेसी लेटर' के मुताबिक, चीन धड़ाधड़ सोना खरीदकर अपना गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहा है. सितंबर 2026 में चीन ने 23 टन सोना आयात किया और लगातार 23 महीने से उसकी खरीदारी जारी है.
चीन के केंद्रीय बैंक पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (PBOC) के मुताबिक सितंबर 2026 में हुई यह खरीद 2023 के बाद सबसे बड़ी मासिक खरीदारी बताई गई है. इसके साथ ही चीन के केंद्रीय बैंक ने लगातार 23 महीनों तक सोनी की खरीदारी जारी रखी है. साल 2026 ने चीन के सोने की खरीद 1200 टन से अधिक हो गई है. साल 2025 में चीन ने करीब 886 टन सोना आयात किया था. चीन का कुल गोल्ड रिजर्व 2410 टन पहुंच गया है और उसने रूस को पीछे छोड़ दिया.
अगर वैल्यूएशन की बात करें, तो चीन का कुल गोल्ड रिजर्व 350 अरब डॉलर से अधिक है, जो अगस्त में 306 अरब डॉलर पर था. चीन जिस रफ्तार से सोना इकट्ठा करने में जुटा है, इस साल के अंत तक वो फ्रांस (2437 टन) और इटली (2452 टन) को भी पीछे छोड़कर तीसरे नंबर पर पहुंच सकता है.
दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक, फिर भी सोना खरीदने में जुटा
चीन दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक है, जो सालभर में 385 टन सोना प्रोड्यूस करता है. वहीं रूस दूसरे नंबर पर है, जो सालभर में करीब 300 टन सोना निकालता है. सोने को लेकर चीन की रणनीति अलग है. डॉलर पर निर्भरता कम करने और विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता रखने के लिए सोने की खरीद को लगातार बढ़ा रहा है. चीन की अर्थव्यवस्था दबाव में है, रियल एस्टेट सेक्टर की वजह से मंदी से जूझ रहा है. ऐसे में घरेलू अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए चीन सोने में निवेश को बढ़ा रहा है. वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट का सबसे ज्यादा फायदा चीन ही उठा रहा है.
रूस की बिक्री और चीन की खरीदारी से सोने की कीमत पर क्या असर होगा?
एक तरफ मजबूरी में रूस सोना बेच रहा है, तो दूसरी तरफ चीन इस मजबूरी का पूरा फायदा उठा रहा है. चीन और रूस की इस खरीद-ब्रिकी का असर ग्लोबल मार्केट में सोने की कीमत पर असर डालेगी. रूस जितना सोना बेच रहा है, बाजार में सोने की उपलब्धता उतनी बढ़ रही है. सोने की बढ़ती सप्लाई कीमतों को नीचे ला सकती है. रूस की इस बिकवाली से बाजार में सप्लाई बढ़ेगी, जिससे सीमित समय के लिए कीमतों पर हल्का दबाव या उतार-चढ़ाव आ सकता है.
सोने पर दुनिया को क्यों है सबसे ज्यादा भरोसा?
- आर्थिक अनिश्चितता के बीच सोना अर्थव्यवस्था को बचाव देता है.
- शेयर बाजार क्रैश हो या महंगाई बेलगाम हो, सोना आर्थिक सुरक्षा देता है.
- डॉलर पर निर्भरता को कम करता है.
- युद्ध और मंदी के बीच कागजी मुद्रा या विदेशी संपत्ति संपत्तियां फ्रीज हो सकती है, लेकिन देश के भीतर रखा सोना सुरक्षित रहता है.
- सोने को दुनियाभर में मूल्यवान समझा जाता है, इसलिए अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से लेकर कर्ज में इसका लेनदेन होता है.
दुनियाभर के केंद्रीय बैंक अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और करेंसी को मजबूत रखने के लिए खजाने में सोना जमा करके रखते हैं. कुल मिलाकर सोना संकट में सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को ताकत देता है.