Meta की डेटा प्राइवेसी पर सवाल, अमेरिकी अदालत ने आखिर क्यों लगाया ₹2.10 लाख करोड़ का जुर्माना, क्या है ट्रंप कनेक्शन?
ये मामला Cambridge Analytica के जरिए 8.7 करोड़ फेसबुक यूजर्स का डेटा हासिल करने और कंपनी पर उपभोक्ताओं को गुमराह करने के आरोपों से जुड़ा है.
अमेरिका के न्यू मैक्सिको राज्य की एक अदालत ने 21 अक्टूबर 2026 को मेटा (फेसबुक की पैरेंट कंपनी) पर 25 अरब डॉलर (लगभग ₹2.10 लाख करोड़) का भारी-भरकम नागरिक जुर्माना लगाने का आदेश दिया है. न्यू मैक्सिको के अटॉर्नी जनरल ने 2021 में मेटा के खिलाफ मुकदमा दायर किया था. ये कदम तब उठाया गया जब पता चला कि कैम्ब्रिज एनालिटिका ने एक थर्ड-पार्टी एप्लिकेशन के जरिए 8.7 करोड़ (87 मिलियन) फेसबुक यूजर्स का निजी डेटा हासिल कर लिया था.
क्या है आरोप?
कैम्ब्रिज एनालिटिका (जो अब बंद हो चुकी है) ने डोनाल्ड ट्रंप के 2016 के सफल राष्ट्रपति चुनाव अभियान के लिए काम किया था. इस मामले में आरोप है कि कैम्ब्रिज एनालिटिका ने डोनाल्ड ट्रंप के 2016 के राष्ट्रपति चुनाव अभियान के लिए वोटरों की प्रोफाइलिंग करने के मकसद से लाखों फेसबुक यूजर्स की सहमति के बिना उनका निजी डेटा इकट्ठा किया था. जूरी ने पाया कि मेटा ने अपनी डेटा प्राइवेसी नीतियों के बारे में यूजर्स को गुमराह किया था. इसके बाद जज ने ये जुर्माना लगाया है. न्यू मैक्सिको के अटॉर्नी जनरल राल टोरेज ने इस फैसले को अमेरिकी इतिहास में किसी कंपनी के खिलाफ आए सबसे बड़े 'सिंगल-स्टेट' (एक राज्य के स्तर के) फैसलों में से एक बताया है.
फैसले के बाद अपने आदेश में जज फ्रांसिस मैथ्यू ने कहा कि कंपनी की कथित गलत हरकतें सालों तक चलती रहीं और ये उनके मुख्य बिजनेस से जुड़ी थीं. मैथ्यू ने लिखा, 'फेसबुक की ये गलत हरकतें (जो सालों तक चलती रहीं और जिन्हें व्यवस्थित तरीके से सार्वजनिक किया गया) सीधे तौर पर फेसबुक के मुख्य बिजनेस तौर-तरीकों से जुड़ी हैं.
जज ने कहा कि राज्य के कानून के तहत 219 अरब डॉलर से अधिक का जुर्माना लगाया जा सकता था. लेकिन, उन्होंने इस रकम को घटाकर 25 अरब डॉलर कर दिया है. मेटा ने इस मामले में टिप्पणी नहीं की है.
कैम्ब्रिज एनालिटिका मामला कैसे शुरू हुआ?
सबसे पहले न्यू मैक्सिको के अटॉर्नी जनरल ने 2021 में मेटा के खिलाफ मुकदमा दायर किया था. ये कदम तब उठाया गया जब पता चला कि कैम्ब्रिज एनालिटिका ने एक थर्ड-पार्टी एप्लिकेशन के जरिए 8.7 करोड़ (87 मिलियन) फेसबुक यूजर्स का निजी डेटा हासिल कर लिया था. राज्य ने मेटा पर आरोप लगाया कि उसने यूजर्स को इस बारे में गुमराह किया कि उनकी निजी जानकारी तक किसकी पहुंच हो सकती है. कंपनी हेट स्पीच (नफरत फैलाने वाले भाषण) और गलत सूचनाओं यानी मिस इंफॉर्मेशन को कैसे संभालती है और उसकी अन्य आंतरिक नीतियां क्या हैं. आरोप है कि कंपनी को पता था कि थर्ड पार्टी (बाहरी पक्षों) की यूजर्स के डेटा तक व्यापक पहुंच है और जब ऐसा करने से कंपनी के बिजनेस को फायदा होता था, तो वो बेकार कंटेंट को भी नजरअंदाज कर देती थी.
इसे एक रिसर्चर ने बनाया था और जिसे फेसबुक पर इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई थी. 25 सितंबर को जूरी ने पाया था कि इन मुद्दों पर मेटा और उसके नेतृत्व द्वारा दिए गए 29 बयानों में से 26 बयान गुमराह करने वाले थे. जूरी के सदस्यों ने निष्कर्ष निकाला कि कंपनी ने न्यू मैक्सिको के उपभोक्ता संरक्षण कानूनों का 43 मिलियन (4.3 करोड़) से अधिक बार उल्लंघन किया है. ये संख्या उन फेसबुक यूजर्स या न्यू मैक्सिको के निवासियों के आधार पर तय की गई. ये इन गुमराह करने वाले बयानों के संपर्क में आए थे.
मेटा ने बचाव में क्या कहा था?
मेटा ने जज से आग्रह किया था कि जुर्माने की राशि 3.45 अरब डॉलर से अधिक न हो. कंपनी ने तर्क दिया कि अगर जुर्माना बहुत अधिक हुआ, तो इससे अन्य कंपनियों को राज्य में काम करने से हतोत्साहित होने का खतरा पैदा हो सकता है. कंपनी ने ये भी कहा कि उसने यूजर्स का डेटा नहीं बेचा है और राज्य यह साबित नहीं कर पाया है कि किसी उपभोक्ता को वास्तव में गुमराह किया गया था.