Trump signs Russia sanctions bill: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने वाले ‘लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट 2026’ पर हस्ताक्षर कर इसे कानून बना दिया है. इस कानून से अमेरिकी प्रशासन को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध और 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल गया है. हालांकि, महत्वपूर्ण बात ये है कि भारत पर अभी 100% टैरिफ लागू नहीं हुआ है.
फिलहाल, ऐसा नहीं है. कानून में रूस के पेट्रोलियम या प्राकृतिक गैस के 5 सबसे बड़े खरीदार देशों के सामान पर 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान है. लेकिन, इसके लिए कानून में तय शर्तों के तहत प्रशासनिक कार्रवाई जरूरी होगी. इसमें US राष्ट्रपति को कुछ परिस्थितियों में टैरिफ से छूट देने का अधिकार भी दिया गया है. इसके लिए राष्ट्रीय हित के आधार पर कांग्रेस को प्रमाणित करना होगा. इसलिए भारत पर टैरिफ लगेगा या नहीं. ये आने वाले समय में अमेरिकी प्रशासन के फैसले और कानून के इस्तेमाल के तरीके पर निर्भर करेगा.
यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद काफी बढ़ाई है. इससे पहले भारत के क्रूड आयात में खाड़ी देशों की हिस्सेदारी 55 प्रतिशत से अधिक थी, जबकि रूस की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत से कम थी. अब तस्वीर काफी बदल चुकी है. सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर के अनुमान के मुताबिक, दिसंबर 2022 से अगस्त 2026 के बीच रूस के कच्चे तेल निर्यात में चीन की हिस्सेदारी करीब 50 प्रतिशत और भारत की करीब 37 प्रतिशत रही.
भारत का कहना है कि रूस से तेल खरीद का फैसला मुख्य रूप से ऊर्जा सुरक्षा, कीमत और आपूर्ति की निरंतरता को ध्यान में रखकर किया गया है.
भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वो मामले में आगे के घटनाक्रम पर नजर रख रहा है. सरकार ने ये भी स्पष्ट किया है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है और भारत अपने व्यापार तथा आर्थिक हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगा. अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने भी भारत की ऊर्जा जरूरतों को रेखांकित करते हुए कहा कि देश अपने कच्चे तेल का 85 प्रतिशत से अधिक और प्राकृतिक गैस का करीब आधा हिस्सा आयात करता है.
अगर अमेरिका भविष्य में भारत पर भारी टैरिफ लगाता है, तो इसका सीधा असर भारतीय निर्यातकों पर पड़ सकता है. अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान महंगा हो जाएगा और इससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित हो सकती है.
हालांकि असर इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिका:
इसलिए अभी ये कहना जल्दबाजी होगी कि भारतीय निर्यात पर वास्तविक असर कितना पड़ेगा.
ये घटनाक्रम ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापक व्यापार समझौते को लेकर बातचीत चल रही है. रूस से तेल खरीद के मुद्दे पर अमेरिकी दबाव और नया कानून दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में एक नया पेच पैदा कर सकते हैं. GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कानून को भारत पर दबाव बनाने की कोशिश बताया है. वहीं, कानून के समर्थकों का तर्क है कि रूस की ऊर्जा आय को कम करके मॉस्को पर यूक्रेन युद्ध समाप्त करने का दबाव बढ़ाया जा सकता है.
रूस ने अमेरिकी कदम को ‘अनफ्रेंडली एक्शन’ बताया है. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव के मुताबिक, नए अमेरिकी प्रतिबंध यूक्रेन में शांति समझौते की कोशिशों को और जटिल बना सकते हैं. वहीं, चीन ने रूस से ऊर्जा खरीद को लेकर अमेरिका की ओर से लगाए जाने वाले प्रतिबंधों और टैरिफ का विरोध किया है. चीनी विदेश मंत्रालय ने इसे ‘लॉन्ग-आर्म जूरिस्डिक्शन’ बताते हुए कहा कि सामान्य आर्थिक और व्यापारिक सहयोग में तीसरे पक्ष का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए.