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Share Market Crash: शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए हफ्ते का पहला ही दिन बेहद खराब रहा. भारतीय शेयर बाजार के दोनों प्रमुख इंडेक्स खुलने के साथ ही क्रैश हो गए. कारोबारी सत्र की शुरुआत में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का 30 शेयर वाला सेंसेक्स 700 अंक से ज्यादा गिर गया. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी इंडेक्स 23,000 अंक से नीचे चला गया. शेयर मार्केट में हफ्ते के पहले ही दिन मची तबाही से निवेशकों के हजारों करोड़ रुपये खाक हो गए.
हफ्ते के पहले कारोबारी दिन बीएसई सेंसेक्स शुक्रवार को 73,895 अंक पर बंद हुआ था. लेकिन सोमवार को यह 73,734 अंक पर खुला. कुछ ही देर बाद सेंसेक्स भरभराकर गिरने लगा और टूटकर 72,981 अंक के लेवल तक आ गया. इसी तरह का हाल NSE Nifty का भी रहा. 50 शेयर वाला यह सूचकांक शुक्रवार के 23,140 अंक के मुकाबले 23,065 अंक पर खुला. इसके बाद यह गिरकर 23,000 के नीचे चला गया. खबर लिखे जाने तक निफ्टी 271 अंक गिरकर 22,869 अंक पर ट्रेड कर रहा था. गिरावट का आलम यह है कि बीएसई के 30 में से 29 शेयर लाल निशान के साथ कारोबार कर रहे हैं. आइए जानते हैं शेयर बाजार में आई गिरावट का क्या है कारण?
मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय संघर्ष बना हुआ है. दोनों में से कोई भी पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है. इस संघर्ष और तनाव से ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट में डर का माहौल बन गया है. दोनों देशों के बीच बयानबाजी और सैन्य हमले के कारण सबसे अहम समुद्री रास्ते होर्मुज से (Strait of Hormuz) से सप्लाई ठप होने की आशंका जताई जा रही है. इस अनिश्चितता के कारण दुनियाभर के इक्विटी मार्केट में बिकवाली का दबाव बढ़ गया है. निवेशक रिस्क वाली संपत्तियों से अपना पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्पों का रुख कर रहे हैं.
अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ रहे तनाव और जंग के हालात का सीधा असर क्रूड ऑयल (Crude Oil) की सप्लाई पर पड़ रहा है. इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत उछलकर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चल रही है. सोमवार सुबह ब्रेंट क्रूड ऑयल को 106 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड करते हुए देखा गया. भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है. तेल के दाम बढ़ने से देश का क्रूड इम्पोर्ट बिल काफी बढ़ जाएगा. इम्पोर्ट बिल बढ़ने से महंगाई दर में एक बार फिर से उछाल देखने को मिल सकता है.
जंग के हालात के बीच ग्लोबल मार्केट की अस्थिरता, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और लगातार मजबूत हो रहे डॉलर के कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकालना शुरू कर दिया है. एफआईआई (FII) शेयर बाजार से लगातार अपनी होल्डिंग बेचकर पैसा निकाल रहे हैं. विदेशी पूंजी की भारी निकासी ने घरेलू बाजार के सेंटीमेंट को बुरी तरह प्रभावित किया है. इससे लगातार बिकवाली का दबाव बढ़ रहा है.
सोमवार को शेयर बाजार में आई गिरावट की अगुवाई बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर ने की. बैंक निफ्टी (Bank Nifty) में भारी गिरावट दर्ज की गई और एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank), आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank), एसबीआई (SBI) जैसे दिग्गज बैंकिंग शेयर बुरी तरह टूट गया. क्रूड ऑयल में तेजी, महंगाई दर बढ़ने और फेड रिजर्व की तरफ से ब्याज दर बढ़े से आरबीआई (RBI) की तरफ से ब्याज दर कटौती की उम्मीद बेहद कम है. बढ़ते बॉन्ड यील्ड ने बैंकों के ट्रेजरी पोर्टफोलियो और मार्जिन पर भी दबाव डाला है. इससे निवेशकों ने बैंकिंग शेयरों में सबसे ज्यादा मुनाफावसूली और बिकवाली की है.
अमेरिका के मजबूत आर्थिक आंकड़ों ने फेड (Fed) के अगले कदमों को लेकर बाजार की उम्मीदों को बदल दिया है. रिपोर्ट्स में दिये गए बाजार के आंकड़ों के अनुसार ट्रेडर्स ने अक्टूबर महीने में ब्याज दर बढ़ाए जाने पर अपना दांव बढ़ा दिया है. ब्याज दर बढ़ने की उम्मीद 66 प्रतिशत के पार पहुंच गई है. शेयर बाजार के लिए चिंता की वजह साफ है. यदि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रही तो कर्ज की लागत ज्यादा बनी रहेगी और रिस्क भरी संपत्तियों (एसेट्स) के वैल्यूएशन पर दबाव आ सकता है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश करना बाजार के जोखिमों के अधीन है. निवेश से जुड़ा किसी भी तरह का फैसला लेने से पहले सेबी रजिस्टर्ड फाइनेंशियल एडवाइजर से संपर्क करें।)