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क्या EU के साथ ट्रेड डील में रूसी तेल बना पेच? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताई पूरी बात

भारत-ईयू ट्रेड डील में रूस से तेल खरीद का मुद्दा चर्चा में जरूर है. लेकिन, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के मुताबिक यह व्यापार वार्ता की कोई तय शर्त या बाधा नहीं है.

Written By Gaurav Singh
Published: Oct 05, 2026, 07:03 PM IST | Updated: Oct 05, 2026, 09:30 PM IST
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India-EU Trade Deal : क्या रूस से तेल की खरीद यूरोपीय संघ यानी EU के साथ व्यापार वार्ता में बाधा बन रही है? इस सवाल के जवाब में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्थिति स्पष्ट की है. म्यूनिख लीडर्स मीटिंग में उन्होंने कहा कि यूरोप में अमेरिका की तरह कोई 'लिंडसे ग्राहम बिल' नहीं है, जो ये तय करेगा कि भारत के साथ व्यापार वार्ता किस दिशा में आगे बढ़ेगी. 

वित्त मंत्री के मुताबिक, रूस से तेल खरीद और भारत की रणनीतिक स्वायत्तता जैसे मुद्दों पर चर्चा जरूर हुई है, लेकिन भारत-यूरोपीय संघ व्यापार वार्ता तय करने के लिए ये शर्त नहीं थी.

तेल खरीदने पर क्या बोलीं वित्त मंत्री?

निर्मला सीतारमण से जब ये पूछा गया कि क्या रूस से भारत की तेल खरीद यूरोपीय साझेदारों के साथ बातचीत में समस्या बन गई है. इसके जवाब में उन्होंने कहा कि उनकी जानकारी के मुताबिक, यूरोप में कोई 'लिंडसे ग्राहम बिल' नहीं है. 

सीतारमण ने कहा कि व्यापार वार्ता से पहले और बाद में कई मुद्दों पर औपचारिक और अनौपचारिक रूप से चर्चा की जाती है, लेकिन संकेत दिया कि रूसी तेल का मुद्दा यूरोप के साथ चर्चा में निर्णायक स्थिति नहीं थी. उनकी ये टिप्पणी तब आई है, जब भारत बदलते वैश्विक व्यापार माहौल में अपने राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता के साथ व्यापार विस्तार को संतुलित करना चाहता है.

राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए तैयार किए गए व्यापार सौदे

सीतारमण ने कहा कि राष्ट्रीय हितों की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापार समझौतों को तेजी से तैयार किया जा रहा है, जबकि देश सप्लाई चेन व्यवधानों और कमजोर बहुपक्षीय ट्रेड फ्रेमवर्क से निपट रहे हैं. उन्होंने कहा कि भारत-यूरोपीय संघ समझौते ने इस दृष्टिकोण को प्रदर्शित किया है, जिसमें दोनों पक्षों ने संवेदनशील क्षेत्रों, विशेष रूप से कृषि के आसपास सुरक्षा बरकरार रखते हुए अपनी टैरिफ लाइनों और टैरिफ मूल्य का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा खोल दिया है.

सीतारमण ने ये भी कहा कि भारत तेजी से द्विपक्षीय समझौतों को आगे बढ़ा रहा है, क्योंकि बहुपक्षीय ट्रेड इकोसिस्टम कमजोर हो गया है. उन्होंने कहा, 'अब संतुलन कुछ हद तक बहुपक्षीय के बजाय द्विपक्षीय के पक्ष में झुका हुआ है.' उन्होंने कहा कि देश नए व्यापार साझेदारों की तलाश कर रहे हैं और समझौतों के माध्यम से उन रिश्तों को मजबूत कर रहे हैं.

सप्लाई चेन की निरंतरता को करना है सुनिश्चित

वित्त मंत्री ने ये भी कहा कि भारत के व्यापार समझौतों पर सप्लाई चेन की निरंतरता पर अधिक ध्यान देने के साथ बातचीत की जा रही है. उन्होंने कहा कि वे देश नए साझेदार ढूंढ रहे हैं, जहां मौजूदा सप्लाई चेन पहले ही बाधित हो चुकी है.

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जी न्यूज में सीनियर सब-एडिटर हैं और वर्तमान में बिजनेस व फाइनेंशियल न्यूज कवर करते हैं.  देश की राजनीति से लेकर दुनिया के बनते-बिगड़ते सत्ता समीकरणों और घटनाओं को कवर कर चुके हैं  पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो UPTU से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया है. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले गौरव ने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और पिछले 6 वर्षों से लगातार इस क्षेत्र में सक्रिय हैं. आप गौरव सिंह से Gaurav.Singh@India.Com पर ईमेल के जरिए सीधे जुड़ सकते हैं. 
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