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Indian Railways Pension Rule: भारतीय रेलवे की तरफ से अपने कर्मचारियों और उनके परिजनों की सोशल और फाइनेंशियल सिक्योरिटी को मजबूत करने के लिए बेहद अहम कदम उठाया गया है. रेल मिनिस्ट्री की तरफ से 'रेलवे सर्विस (एक्स्ट्राऑर्डिनरी पेंशन) रूल्स, 2026' को नोटिफाई कर लागू कर दिया गया है. नए नियम के तहत यदि किसी रेलवे कर्मचारी की ड्यूटी के दौरान किसी हिंसक घटना, प्राकृतिक आपदा, आतंकी हमले या काम के दौरान हादसे से मौत हो जाती है तो उसके परिवार को सैलरी का 100% तक फैमिली पेंशन के रूप में दिया जाएगा. इसके अलावा मिनिमम पेंशन की लिमिट को 18,000 रुपये प्रतिमाह तय कर दिया गया है. खास बात यह है कि पेंशन पाने के लिए पीड़ित परिवार को अलग से आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी.
रेलवे मिनिस्ट्री की तरफ से जारी नियम उन सभी कर्मचारियों पर लागू होंगे , जो रेलवे सर्विस (पेंशन) रूल्स 2026 (Railway Service Pension Rules, 2026) के दायरे में आते हैं. इसके अलावा एनपीएस (NPS) के तहत आने वाले कर्मचारियों को भी कुछ शर्तों के साथ इसका फायदा मिलेगा. नए नियमों के तहत सबसे बड़ा बदलाव यह किया गया है कि पेंशन के लिए मृतक परिजनों को चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट आते ही संबंधित ऑफिस के हेड की यह जिम्मेदारी होगी कि वह 3 महीने के अंदर मामला सक्षम प्राधिकारी के पास भेज दे. यदि ऑफिस की तरफ से देरी होती है तो इस बेस पर किसी भी क्लेम को खारिज नहीं किया जा सकता.
रेलवे ने ड्यूटी से जुड़ी मौतों और दिव्यांगता के मामलों को अलग-अलग परिस्थिति के आधार पर कैटेगरी में बांटा है.
यदि कोई रेलवे कर्मचारी किसी दुर्घटना के कारण विकलांग हो जाता है और उसे नौकरी से मुक्त कर दिया जाता है तो उसे विकलांगता पेंशन दी जाएगी. इस पेंशन के दो हिस्से होंगे, पहला सर्विस एलिमेंट और दूसरा डिसेबिलिटी एलिमेंट. सर्विस एलिमेंट सामान्य पेंशन के बराबर होगा, जो अंतिम वेतन का 50% होता है. इसके अलावा डिसेबिलिटी एलिमेंट 100% विकलांगता के मामले में अंतिम वेतन का 30% हिस्सा अलग से दिया जाएगा. विकलांगता का प्रतिशत कम होने पर उसी रेश्यो में राशि तय होगी. विकलांगता पेंशन के लिए किसी न्यूनतम क्वालीफाइंग सर्विस की जरूरत नहीं होगी. यानी कर्मचारी की सर्विस कितनी भी कम हो, उसे इसका फायदा जरूर मिलेगा.
विकलांगता का प्रतिशत तय करने के लिए रेलवे ने 'ब्रॉड-बैंडिंग' (Broad-banding) नियम अपनाया है. इसके तहत यदि किसी कर्मचारी की विकलांगता 1% से 50% के बीच है तो उसे 50% मानकर पेंशन दी जाएगी. यदि विकलांगता का प्रतिशत 51% से 75% के बीच है तो उसे 75% गिना जाएगा. लेकिन यदि यह 76% से 100% के बीच है, तो उसे पूरा 100% विकलांग माना जाएगा. हालांकि, ब्रॉड-बैंडिंग का फायदा उन कर्मचारियों को नहीं मिलेगा जिन्हें विकलांगता के बावजूद रेलवे की नौकरी में बनाए रखा जाता है.
100% विकलांगता वाले पेंशनर्स के लिए एक खास सुविधा दी गई है, जो रोजमर्रा के काम के लिए पूरी तरह दूसरों पर निर्भर हैं. यदि मेडिकल बोर्ड इसकी सिफारिश करता है तो ऐसे पेंशनर्स को मंथली पेंशन के अलावा जीवनभर 'कांस्टेंट अटेंडेंट अलाउंस' (Constant Attendant Allowance) दिया जाएगा. यह भत्ता सरकार की तरफ से समय-समय पर तय की गई दर के आधार पर मिलेगा. हालांकि, इस पर महंगाई राहत (Dearness Relief) देय नहीं होगा.
फैमिली पेंशन पाने के लिए पात्रता का साफ क्रम तय किया गया है. सबसे पहले पति या पत्नी इसका हकदार होगा. इसके बाद आश्रित बच्चे (जिसमें गोद लिये गए और सौतेले बच्चे भी शामिल), माता-पिता और फिर आश्रित भाई-बहन पात्र होंगे. यह सभी फायदे जारी किए गए नियमों और शर्तों के तहत दिये जाएंगे.
रेलवे ने पेंशन प्रोसेस को तेज बनाने के लिए इसमें डिजिटल रिफॉर्म किया है. सभी एक्स्ट्राऑर्डिनरी पेंशन केस HRMS या इंटीग्रेटेड पे एंड अकाउंटिंग सिस्टम के जरिये ऑनलाइन प्रोसेस किये जाएंगे. मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट से लेकर पेंशन पेमेंट ऑर्डर (PPO) जारी होने तक पूरे मामले की डिजिटल ट्रैकिंग होगी. जिन यूनिट्स में यह सिस्टम लागू नहीं किया गया, केवल वहीं फाइल मैन्युअली चलेगी. इस सिस्टम के शुरू होने के बाद पेंशन पाने के लिए ऑफिस के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे.