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NPS Swasthya Scheme: अगर आप एनपीएस (NPS) में निवेश करते हैं या करने का प्लान कर रहे हैं तो यह खबर आपके काम की है. जी हां, एनपीएस को रेग्युलेट करने वाली संस्था पीएफआरडीए (PFRDA) 1 अक्टूबर 2026 को 'एनपीएस दिवस' के मौके पर देश के पेंशनर्स और सैलरीड क्लास के लिए नई योजना एनपीएस स्वास्थ्य (NPS Swasthya) को शुरू करने जा रही है. इस योजना को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 अक्टूबर को लॉन्च कर सकती हैं. लॉन्चिंग के बाद यह योजना रिटायरमेंट सेविंग्स के साथ ही परिवार को मजबूत हेल्थ इंश्योरेंस कवर भी मुहैया कराएगी.
एनपीएस स्वास्थ्य (NPS Swasthya) एनपीएस (NPS) का नया ऑप्शन होगी. इसे पेंशन सेविंग के साथ ही हेल्थ इंश्योरेंस सर्विस मुहैया कराने के लिए डिजाइन किया गया है. योजना के तहत दो हिस्से होंगे-
ऐसा कोई भी शख्स जो एनपीएस (NPS) में शामिल होने के लिए एलिजिबल है, वह एनपीएस स्वास्थ्य में रजिस्ट्रेशन करा सकता है. स्टैंडर्ड हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में एक फैमिली फ्लोटर प्लान के जरिये सब्सक्राइबर, उसकी पत्नी (Spouse) और 2 बच्चों को कवर किया जाएगा. लेकिन इस योजना में सब्सक्राइबर के माता-पिता को शामिल नहीं किया जा गया है. इंश्योरेंस में एंर्टी करने की उम्र 18 से 70 साल तय की गई है. लेकिन पॉलिसी का रिन्यूअल (Renewal) तय शर्तों के साथ 85 साल की उम्र तक कराया जा सकता है.
एनपीएस स्वास्थ्य में शामिल होने के लिए न्यूनतम शुरुआती कॉन्ट्रीब्यूशन में तीन घटक शामिल होंगे. पहले साल के हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम के साथ टैक्स. इसके अलाव 200 रुपये सालाना का मेंटीनेंस चार्ज और टैक्स. इसके अलावा एनपीएस स्वास्थ्य निवेश खाते के लिए कम से कम 1,000 रुपये का कॉन्ट्रीब्यूशन जरूरी होगा. एक बार अकाउंट खुलने के बाद मिनिमम कॉन्ट्रीब्यूशन महज 10 रुपये का होगा. इंश्योरेंस प्रीमियम की राशि तय नहीं होगी. यह इंश्योरेंस कंपनी की तरफ से लागू फ्रेमवर्क और शेयरहोल्डर की उम्र के आधार पर तय की जाएगी.
योजना के तहत सुपर टॉप-अप पॉलिसी के लिए चार फैमिली फ्लोटर कवरेज तय किये गए हैं.
डिडक्टिबल वो राशि होती है, जो पॉलिसी ईयर में इंश्योरेंस पेमेंट शुरू होने से पहले कंज्यूमर को खुद वहन करनी होती है. पॉलिसी में अस्पताल में भर्ती होने, डे-केयर प्रोसेस, आयुष (AYUSH) ट्रीटमेंट, र्टीटमेंट और आर्गन डोर एक्सपेंस पर होने वाले खर्च को शामिल किया जाएगा.
सब्सक्राइबर हेल्थ संबंधी खर्चों के लिए अपने एनपीएस स्वास्थ्य अकाउंट से कुछ रकम की निकासी भी कर सकते हैं. इसके तहत ओपीडी और आईपीडी दोनों तरह के खर्च शामिल होंगे. हालांकि, यह निकासी एनपीएस स्वास्थ्य अकाउंट में सब्सक्राइबर की तरफ से से दिये गए कुल कॉन्ट्रीब्यूशन के अधिकतम 25% तक ही होगी. राहत की बात यह है कि ऐसी निकासी पर किसी तरह की अपर लिमिट नहीं होगी और न ही पहली या बाद की निकासी के लिए कोई वेटिंग पीरियड होगा. यह पैसा सीधे कस्टमर को देने की बजाय अस्पताल या हेल्थ सर्विस प्रोवाइडर को सेटल की जाएगी.
यदि किसी एक मामले में अस्पताल में भर्ती होने का खर्च आंशिक निकासी से ज्यादा हो जाता है, तो सब्सक्राइबर के पास प्री-मैच्योर एग्जिट का ऑप्शन होगा. इस स्थिति में एनपीएस हेल्थ कॉर्पस का यूज सबसे पहले अस्पताल के बिलों के पेमेंट के लिये किया जाएगा. बिल भुगतान के बाद बची हुई राशि ऑल सिटीजन मॉडल के तहत एक सामान्य एनपीएस स्कीम में ट्रांसफर कर दी जाएगी और एनपीएस स्वास्थ्य खाता को बंद कर दिया जाएगा. यदि सब्सक्राइबर का इस मॉडल के तहत पहले से कोई अकाउंट नहीं है तो पुराना अकांउट इसमें बदल जाएगा.
एनपीएस स्वास्थ्य के इंश्योरेंस रिन्यूअल के लिए प्रीमियम का भुगतान सब्सक्राइबर के एनपीएस स्वास्थ्य कॉर्पस से किया जा सकता है. इसके लिए सब्सक्राइबर को पहले से अनुमति देनी होगी. यदि अकाउंट में मौजूद शेष राशि प्रीमियम चुकाने के लिए पूरी नहीं हो पाती और ग्रेस पीरियड के बाद भी प्रीमियम का भुगतान नहीं होता तो इंश्योरेंस कवर खत्म हो सकता है. ऐसी हालत में एनपीएस स्वास्थ्य अकाउंट बंद कर दिया जाएगा. साथ ही बची हुई राशि को ऑल सिटीजन मॉडल के तहत एनपीएस स्कीम में ट्रांसफर कर दिया जाएगा.