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अब देश में जो भी नए तेज रफ्तार वाले हाईवे या एक्सप्रेसवे बनेंगे, उनमें कंपनियों की मनमर्जी नहीं चलेगी. सड़क बनाने वाली सरकारी एजेंसी NHAI ने पहली बार सबके लिए एक जैसे कड़े नियम बना दिए हैं. पहले क्या होता था कि ठेकेदार और कंपनियां अपनी-अपनी समझ से नक्शा और प्रोजेक्ट बना लेते थे, लेकिन अब पूरे देश में एक ही फॉर्मूले पर काम होगा. यानी आने वाले दिनों में जब गांवों-खेतों के पास से नई सड़कें गुजरेंगी, तो उनके बनने का तरीका पहले से बिल्कुल अलग और तय नियमों के हिसाब से होगा.
यह बदलाव इसलिए जरूरी था, क्योंकि सरकार की तैयारी 2036-37 तक देश भर में 50 हजार किलोमीटर लंबे ऐसे हाईवे बनाने की है, जबकि अभी सिर्फ 3 हजार किलोमीटर के आसपास ही बन पाए हैं.
नए नियम का सीधा मतलब यह है कि सड़क का साइज गाड़ियों की भीड़ तय करेगी. रास्ता कितना चौड़ा होगा, पुल कितने बड़े बनेंगे और हाईवे पर चढ़ने-उतरने के रास्ते कहां होंगे? यह सब इस बात से तय होगा कि उस रोड पर कितना ट्रैफिक दौड़ता है. इससे 4 और 6 लेन के सभी नए-पुराने हाईवे प्रोजेक्ट्स का पूरा ढांचा अब एक तय पैमाने पर बनेगा.
क्या हैं नए नियम?
15 हजार तक गाड़ियां: जहां से 15 हजार गाड़ियों का आना जाना है, वो सड़क भी 4 लेन की और उसके पुल भी 4 लेन के होंगे, इसके लिए 60 मीटर चौड़ी जगह ली जाएगी.
15 से 25 हजार गाड़ियों का ट्रैफिक: सड़क तो 4 लेन की रहेगी, लेकिन आगे की जरूरत को देखते हुए पुल और बाकी स्ट्रक्चर 6 लेन के बनेंगे. इसके लिए 70 मीटर चौड़ी जगह रखी जाएगी.
25 से 40 हजार गाड़ियां: सड़क और पुल दोनों शुरू से ही 6 लेन के बनेंगे और जगह 70 मीटर चौड़ी होगी.
इसका मतलब यह है कि अब हाईवे केवल आज की गाड़ियों को देखकर नहीं बनेंगे, बल्कि अगले कई सालों में बढ़ने वाली भीड़ का अंदाजा लगाकर तैयार किए जाएंगे.
अब सटीक ट्रैफिक रिपोर्ट जरूरी, टोल, GST और माइनिंग रिकॉर्ड से होगा मिलान
NHAI के नए नियमों के तहत अब केवल मौजूदा ट्रैफिक देखकर हाईवे का खाका नहीं खींचा जाएगा. डीपीआर में यह हिसाब लगाना जरूरी होगा कि आगे चलकर कितनी गाड़ियां बढ़ेंगी और कितने वाहन इस रास्ते पर डायवर्ट होंगे.
माल ढुलाई की रफ्तार को आर्थिक ग्रोथ के साथ जोड़कर देखा जाएगा. आंकड़ों में कोई हेरफेर न हो, इसलिए टोल प्लाजा के रिकॉर्ड, जीएसटी पोर्टल और खनन विभाग के डेटा से भारी वाहनों के ट्रैफिक की क्रॉस-चेकिंग की जाएगी, ताकि यह साफ हो सके कि सड़क पर कितना भारी लोड आने वाला है.
अब सीधे चौराहे नहीं होंगे, अंडरपास 4.5 मीटर ऊंचे बनेंगे
हाई-स्पीड कॉरिडोर बनाने का असली मकसद यह है कि लंबी दूरी का सफर बिना किसी ब्रेक या रुकावट के पूरा हो सके. NHAI के नए नियमों के तहत:
नो चौराहा: मुख्य सड़क पर कोई क्रॉसिंग या चौराहा नहीं मिलेगा, ताकि लोकल ट्रैफिक रफ्तार न रोके.
सिर्फ रैंप से एंट्री: हाईवे पर आने और बाहर निकलने के लिए सुरक्षित रैंप दिए जाएंगे.
4.5 मीटर ऊंचे अंडरपास: ग्रामीण इलाकों में हार्वेस्टर और बड़े कृषि वाहनों की आसान आवाजाही के लिए अंडरपास 4.50 मीटर ऊंचे होंगे.
दोनों तरफ सर्विस रोड: आबादी वाले इलाकों में मुख्य सड़क के दोनों ओर फुटपाथ और नाली के साथ सर्विस लेन बनाई जाएगी.
हाईवे के डिवाइडर पर ड्रिप सिस्टम से मिलेगा पानी
पर्यावरण सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए NHAI ने तय किया है कि हाईवे के बीच बने डिवाइडर में लगे पौधों को पानी देने के लिए ड्रिप इरिगेशन सिस्टम लगाया जाएगा. साथ ही, सड़कों के किनारे पौधे और पेड़ लगाने का काम अब प्रोजेक्ट डिजाइन का जरूरी हिस्सा होगा, जिसे डीपीआर तैयार करते वक्त ही शामिल करना होगा.
पहले हर प्रोजेक्ट का अलग हिसाब था, अब पूरे देश में एक जैसा ढांचा
NHAI के मुताबिक, अब तक एक्सप्रेसवे के अलावा बनने वाले हाई-स्पीड नेशनल हाईवे के लिए कोई एक तय पैमाना नहीं था. हर प्रोजेक्ट की डीपीआर बनाते समय कंपनियां अपने-अपने हिसाब से डिजाइन और तकनीकी नियम तय कर लेती थीं. नई गाइडलाइन इसी मनमर्जी को खत्म करने के लिए लाई गई है. इसका असर सिर्फ सड़क बनाने वाले ठेकेदारों पर ही नहीं पड़ेगा, बल्कि प्रोजेक्ट शुरू होते वक्त जो पहली रिपोर्ट (DPR) बनती है, उसी समय यह पूरी तरह साफ हो जाएगा कि हाईवे का डिजाइन, क्षमता और गाड़ियों के आने-जाने के रास्ते कैसे होंगे.
2047 तक जमीन पर क्या दिखेगा बदलाव?
नए नियमों के लागू होने के बाद भविष्य में बनने वाले हाई-स्पीड हाईवे पर तीन बातें पूरी तरह तय और साफ होंगी.
पहली ये कि ट्रैफिक के हिसाब से कितनी लेन की सड़क बनेगी. दूसरी बात ये कि हाईवे पर कहां से गाड़ी चढ़ेगी और कहां से उतरेगी. तीसरी बड़ी बात ये कि किन बड़े रास्तों और व्यापारिक केंद्रों को इंटरचेंज के जरिए सीधे हाईवे से जोड़ा जाएगा.यही वजह है कि यह नई गाइडलाइन सिर्फ सड़क की चौड़ाई नापने का नियम नहीं है, बल्कि देश के पूरे रोड नेटवर्क को नए सिरे से बदलने का ठोस प्लान है.