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कैंसर की दवाओं पर ट्रेड मार्जिन कैप लगाएगी मोदी सरकार, सुप्रीम कोर्ट को दी जानकारी

केंद्र सरकार ने कैंसर की दवाओं पर अत्यधिक मुनाफाखोरी रोकने और मरीजों को राहत देने के लिए ट्रेड मार्जिन कैप (सीमा) लगाने का फैसला किया है. इसकी जानकारी सुप्रीम कोर्ट को दे दी गई है.

कैंसर की दवाओं पर ट्रेड मार्जिन कैप लगाएगी मोदी सरकार, सुप्रीम कोर्ट को दी जानकारी

Trade Margins on Anti-Cancer Drugs : केंद्र सरकार ने कैंसर की दवाओं पर ट्रेड मार्जिन नियंत्रित करने का फैसला किया है. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को ये जानकारी दी है. इसका उद्देश्य दवाओं पर मुनाफे का उचित मार्जिन बनाए रखना और अत्यधिक मुनाफाखोरी रोकना है. केंद्र सरकार कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली उन दवाओं की सूची जारी करेगी, जिन पर ट्रेड मार्जिन की सीमा लागू होगी.

सरकार के इस फैसले से कैंसर के मरीजों को दवाओं की कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद है. लेकिन, इसी बीच दूसरी महंगी दवाओं के प्राइस कंट्रोल पर SC ने जवाब मांगा है. अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को होगी.

कैंसर की दवाओं की MRP 70 प्रतिशत तक कम हो सकती है

इस कदम से कैंसर की दवाओं की MRP 70 प्रतिशत तक कम हो सकती है और ग्राहकों के सालाना लगभग ₹2,500 करोड़ बच सकते हैं.बता दें, पिछले हफ्ते सरकार ने सभी नॉन-शेड्यूल्ड एंटी-कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन को MRP के 30 प्रतिशत तक सीमित करने का फैसला किया था. इस कदम से कैंसर की दवाओं की MRP में 70 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है.

सरकार ने बताया है कि इस प्रस्ताव का मकसद सप्लाई चेन में आने वाली समस्यों को रोकना, जान बचाने वाली दवाओं को सस्ता बनाना और उनकी लगातार उपलब्धता सुनिश्चित करना है.

महंगी दवाओं के ब्रांड की पहचान हो रही है 

सरकार ने कैंसर की महंगी दवाओं के ब्रांड की पहचान की है. डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज की बनाई एक कमिटी पता लगा रही है कि कितने ब्रांड प्रस्तावित प्राइस कैप (कीमत की सीमा) के दायरे में आएंगे. कमिटी ने पाया है कि अलग-अलग रिटेल आउटलेट्स पर कैंसर की दवाओं पर 170-700 प्रतिशत तक का ट्रेड मार्जिन है.

क्या होती हैं 'नॉन-शेड्यूल्ड' दवाएं?

'नॉन-शेड्यूल्ड' दवाएं वे दवाएं हैं जिनकी कीमतें 'ड्रग्स (प्राइसेस कंट्रोल) ऑर्डर (DPCO), 2013' के तहत तय की गई अधिकतम कीमतों के दायरे में नहीं आती हैं. इन दवाओं और मेडिकल डिवाइस को बनाने वाली कंपनियां लगातार 12 महीनों की अवधि में इनकी कीमतें 10 प्रतिशत तक बढ़ा सकती हैं. भारत के घरेलू फार्मास्युटिकल मार्केट में इन उत्पादों की हिस्सेदारी करीब 82 प्रतिशत है.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार ने 2019 में कैंसर की 42 दवाओं के लिए ट्रेड मार्जिन की सीमा तय की थी. खबरों के मुताबिक, इस कदम से 526 ब्रांड्स में सालाना ₹984 करोड़ की बचत हुई. नए प्रस्ताव से इस तरह के कंट्रोल का दायरा बढ़ सकता है. हालांकि, सरकार ने अभी तक दूसरे प्रोडक्ट्स पर इन्हें लागू करने के लिए कोई समय-सीमा तय नहीं की है.

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Gaurav Singh

Gaurav Singh

जी न्यूज में सीनियर सब-एडिटर हैं और वर्तमान में बिजनेस व फाइनेंशियल न्यूज कवर करते हैं.  देश की राजनीति से लेकर दुनिया के बनते-बिगड़ते सत्ता समीकरणों और घटनाओं को कवर कर चुके हैं  पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो UPTU से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया है. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले गौरव ने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और पिछले 6 वर्षों से लगातार इस क्षेत्र में सक्रिय हैं. आप गौरव सिंह से Gaurav.Singh@India.Com पर ईमेल के जरिए सीधे जुड़ सकते हैं. 
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