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बाइक टैक्सी पर महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला, Ola-Uber को EV पर शिफ्ट होने के लिए 9 महीने की मोहलत

महाराष्ट्र सरकार ने Ola, Uber और Rapido जैसी बाइक टैक्सी कंपनियों को पूरी तरह EV फ्लीट में बदलने के लिए अधिकतम 9 महीने की मोहलत दी है.

Written By Gaurav Singh
Published: Oct 07, 2026, 05:30 PM IST | Updated: Oct 07, 2026, 05:40 PM IST
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महाराष्ट्र सरकार ने ओला, उबर और रैपिडो जैसी बाइक टैक्सी एग्रीगेटर्स को अपने कामकाज को पूरी तरह से इलेक्ट्रिक फ्लीट (गाड़ियों के बेड़े) में बदलने के लिए नौ महीने तक की समय-सीमा तय की है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देशों के बाद राज्य परिवहन विभाग ने पूरे महाराष्ट्र में एग्रीगेटर्स और क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों को इस बदलाव को चरणों में लागू करने का निर्देश दिया है. 

बता दें, ऑपरेटर्स अभी पेट्रोल से चलने वाली बाइक टैक्सी चला रहे हैं. उन्हें इलेक्ट्रिक वाहन की जरूरत को पूरा करने के लिए छह महीने का समय मिलेगा. जिन लोगों ने पहले ही 'महाराष्ट्र बाइक-टैक्सी नियम, 2025' के तहत प्रोविजनल या अस्थायी लाइसेंस के लिए आवेदन किया है. उन्हें तीन महीने का अतिरिक्त समय मिलेगा.

महाराष्ट्र इलेक्ट्रिक बाइक टैक्सी बदलाव को बढ़ावा दे रहा है

महाराष्ट्र सरकार ने जुलाई 2025 में लागू नियमों के तहत लाइसेंस प्राप्त बाइक टैक्सियों के लिए EV को अनिवार्य कर दिया था. इस फ्रेम वर्क के तहत केवल पीले रंग से रंगे और बाइक टैक्सी के तौर पर पहचाने जाने वाले इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों को ही कमर्शियल तौर पर चलाने की अनुमति है. शुरुआत में एग्रीगेटर्स को इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने के लिए 30 दिन का प्रोविजनल लाइसेंस दिया गया था. हालांकि, जरूरतों को पूरा न कर पाने के कारण मार्च में उनके लाइसेंस रद्द कर दिए गए थे.

'टैक्सी वेलफेयर एसोसिएशन' ने मांगा था समय

सितंबर में 'महाराष्ट्र बाइक टैक्सी वेलफेयर एसोसिएशन' ने EV बदलाव को पूरा करने के लिए सरकार से डेढ़ साल का समय मांगा था. एग्रीगेटर्स ने भी 2030 तक समय बढ़ाने का अनुरोध किया था.


कैबिनेट ने पेट्रोल-इलेक्ट्रिक फ्लीट के प्रस्ताव को खारिज किया

समय बढ़ाने का यह अनुरोध उन खबरों के बाद आया था जिनमें कहा गया था कि सरकार बाइक टैक्सी फ्लीट को पेट्रोल और इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिलों के 50:50 के मिश्रण के साथ चलाने की अनुमति देने पर विचार कर रही थी. हालांकि, राज्य कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया. उन्हें चिंता थी कि कंपनियां बदलाव करने की आर्थिक क्षमता होने के बावजूद महंगे इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने से बच सकती हैं. सरकार ने महाराष्ट्र में गैर-कानूनी रूप से चल रही बाइक टैक्सी सेवाओं पर ₹5 का अस्थायी दैनिक शुल्क लगाने का प्रस्ताव भी दिया था.

परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने कहा था कि एग्रीगेटर्स को हर राइड के किराए का 2% हिस्सा बाइक टैक्सी ड्राइवरों के कल्याण कोष (वेलफेयर फंड) में देना होगा. ये नयी समय-सीमा ऑपरेटर्स को महाराष्ट्र की पूरी तरह से इलेक्ट्रिक कमर्शियल बाइक टैक्सी फ्लीट की जरूरत को पूरा करने का एक और मौका देगी.

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About the Author

जी न्यूज में सीनियर सब-एडिटर हैं और वर्तमान में बिजनेस व फाइनेंशियल न्यूज कवर करते हैं.  देश की राजनीति से लेकर दुनिया के बनते-बिगड़ते सत्ता समीकरणों और घटनाओं को कवर कर चुके हैं  पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो UPTU से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया है. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले गौरव ने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और पिछले 6 वर्षों से लगातार इस क्षेत्र में सक्रिय हैं. आप गौरव सिंह से Gaurav.Singh@India.Com पर ईमेल के जरिए सीधे जुड़ सकते हैं. 
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