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देश के टॉप 7 बड़े शहरों में सबसे पीछे कोलकाता, आखिर क्यों यहां नए घरों की सप्लाई है सबसे कम?

भारत के कुछ सबसे बड़े शहरों में नए हाउसिंग प्रोजेक्ट्स तेजी से बढ़ रहे हैं. कोलकाता एक अलग राह पर चल रहा है. इस शहर में नए प्रोजेक्ट्स के लॉन्च की रफ्तार धीमी है.

देश के टॉप 7 बड़े शहरों में सबसे पीछे कोलकाता, आखिर क्यों यहां नए घरों की सप्लाई है सबसे कम?

Kolkata's residential market :देश के हाउसिंग मार्केट में हर बड़े शहरों में नए-नए प्रोजेक्ट्स लॉन्च हो रहे हैं. इसी कड़ी में कोलकाता की एक अलग तस्वीर सामने आयी है. 2026 की तीसरी तिमाही में देश के सात बड़े हाउसिंग मार्केट में कोलकाता में नए रेजिडेंशियल लॉन्च की संख्या सबसे कम रही. कोलकाता के हाउसिंग मार्केट में सिर्फ 4,650 यूनिट्स लॉन्च हुए हैं. ये आंकड़ा मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन जैसे शहरों से बिल्कुल अलग है, जहां 37,500 यूनिट्स लॉन्च हुए और हैदराबाद में 18,950 नए घर लॉन्च किए गए.

ANAROCK की 'पैन इंडिया रेजिडेंशियल मार्केट व्यूपॉइंट्स Q3 2026' रिपोर्ट के मुताबिक, कोलकाता का मार्केट मुख्य रूप से एंड-यूजर पर आधारित है. इस शहर में किफायती और मिड-सेगमेंट हाउसिंग की मांग सबसे अधिक है, जबकि दूसरे शहरों में प्रीमियम और लग्जरी डेवलपमेंट की ओर तेजी से झुकाव देखा गया है. कोलकाता का हाउसिंग मार्केट अभी भी कीमत का ध्यान रखने वाले खरीदारों पर टिका है, जिससे डेवलपर्स को लॉन्च की रणनीति में अधिक सावधानी बरतनी पड़ती है.

किफायती कीमतों पर आधारित है मार्केट

रिपोर्ट बताती है कि टॉप सात शहरों में कोलकाता में प्रीमियम हाउसिंग का हिस्सा सबसे कम था. इस तिमाही में शहर में लॉन्च हुए नए घरों में से सिर्फ 4% की कीमत 1.5 करोड़ रुपये से अधिक थी. इसकी तुलना में हैदराबाद में इस कैटेगरी में 66% लॉन्च हुए, जबकि NCR में ये आंकड़ा 62% और बेंगलुरु में 52% था. 

कोलकाता में किफायती और लोअर-मिड सेगमेंट हाउसिंग का हिस्सा सबसे अधिक था. ये सभी नए लॉन्च का 57% था. इससे पता चलता है कि शहर में डिमांड मुख्य रूप से पहली बार घर खरीदने वालों और बजट का ध्यान रखने वाले परिवारों से आ रही है, न कि अमीर निवेशकों या लग्जरी घर चाहने वालों से.

इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि खरीदारों के इस प्रोफाइल के कारण अक्सर लॉन्च की प्रक्रिया धीमी होती है क्योंकि डेवलपर्स को असली डिमांड और खरीदने की क्षमता के हिसाब से सप्लाई को सावधानी से तय करना पड़ता है.

बिक्री और सप्लाई में अच्छा तालमेल

ANAROCK के डेटा से पता चलता है कि कोलकाता में इस तिमाही के दौरान लगभग 4,000 घर बिके, जबकि 4,650 नए घर लॉन्च हुए. ये छोटा सा अंतर एक संतुलित मार्केट को दिखाता है जहां नई सप्लाई काफी हद तक डिमांड के साथ तालमेल बिठा रही है. कोलकाता का मार्केट अधिक अनुशासित लगता है. बिल्डर जरूरत से ज्यादा सप्लाई से बच रहे हैं, जिससे बिना बिके स्टॉक के जमा होने का रिस्क कम होता है.

इसकी तुलना में MMR में लगभग 1.98 लाख बिना बिकी यूनिट थीं, जबकि हैदराबाद में बिक्री के लिए 1.14 लाख से अधिक यूनिट उपलब्ध थीं.

क्या कम कीमतें लग्जरी विस्तार को सीमित करती हैं?

कोलकाता में कम लॉन्च नंबरों का एक और मुख्य कारण, तुलनात्मक रूप से सस्ती प्रॉपर्टी की कीमतें हैं. शहर में औसत रेजिडेंशियल कीमत 6,500 रुपये प्रति वर्ग फुट थी. ये रिपोर्ट में शामिल सात प्रमुख मार्केट में सबसे कम है. इसके विपरीत, MMR में औसत कीमतें लगभग 18,000 रुपये प्रति वर्ग फुट और NCR में लगभग 10,000 रुपये प्रति वर्ग फुट थीं.

पूरे भारत में मार्केट ट्रेंड डेवलपर्स के बीच प्रीमियम और लग्जरी हाउसिंग के लिए बढ़ती प्राथमिकता को दिखाता है. ये आम तौर पर बेहतर मुनाफा देता है. हैदराबाद, NCR और बेंगलुरु में 1.5 करोड़ रुपये से अधिक कीमत वाले लॉन्च काफी अधिक हुए हैं. कोलकाता काफी हद तक इस ट्रेंड से बाहर रहा है. शहर में खरीदार किफायती और लोअर-मिड सेगमेंट के घरों को पसंद करते हैं. इसलिए डेवलपर्स के पास आम तौर पर बड़े लग्जरी प्रोजेक्ट लॉन्च करने के कम अवसर होते हैं.

विकास की एक अलग कहानी

कोलकाता में भारत के प्रमुख रेजिडेंशियल मार्केट में सबसे कम नए हाउसिंग प्रोजेक्ट्स लॉन्च हुए हैं. लेकिन, ये नंबर जरूरी नहीं कि कमजोरी का संकेत हों. इसके बजाय, वे एक ऐसे मार्केट की ओर इशारा करते हैं जो अपनी गति से बढ़ रहा है. इसे मुख्य रूप से किफायती घर चाहने वाले घर खरीदारों का समर्थन मिला है. 

ANAROCK डेटा से पता चलता है कि कोलकाता देश के सबसे अधिक कीमत-संवेदनशील रेजिडेंशियल मार्केट में से एक बना हुआ है. किफायती घरों की मांग बनी हुई है. इसलिए डेवलपर्स हैदराबाद, NCR और बेंगलुरु जैसे शहरों में प्रीमियम हाउसिंग की तेजी के पीछे भागने के बजाय चुनिंदा प्रोजेक्ट्स लॉन्च करने में ही संतुष्ट दिख रहे हैं.

फिलहाल, कोलकाता के हाउसिंग मार्केट की कहानी तेजी से विस्तार करने के बारे में कम है और सप्लाई, किफायतीपन और असली खरीदारों की मांग के बीच संतुलन बनाए रखने के बारे में ज्यादा है.

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About the Author

Gaurav Singh

Gaurav Singh

जी न्यूज में सीनियर सब-एडिटर हैं और वर्तमान में बिजनेस व फाइनेंशियल न्यूज कवर करते हैं.  देश की राजनीति से लेकर दुनिया के बनते-बिगड़ते सत्ता समीकरणों और घटनाओं को कवर कर चुके हैं  पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो UPTU से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया है. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले गौरव ने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और पिछले 6 वर्षों से लगातार इस क्षेत्र में सक्रिय हैं. आप गौरव सिंह से Gaurav.Singh@India.Com पर ईमेल के जरिए सीधे जुड़ सकते हैं. 
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