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जिस ईरान की जमीन तेल से लबालब, आखिर ऐसा क्या हुआ कि बढ़ानी पड़ी पेट्रोल की कीमत? समझिए संकट की पूरी कहानी

युद्ध और आर्थिक संकट के बीच ईरान ने तय सीमा से ज्यादा पेट्रोल खरीदने पर कीमत दोगुनी कर दी है. इससे महंगाई और आम लोगों की मुश्किलें बढ़ने की आशंका है.

जिस ईरान की जमीन तेल से लबालब, आखिर ऐसा क्या हुआ कि बढ़ानी पड़ी पेट्रोल की कीमत? समझिए संकट की पूरी कहानी

Iran Fuel Crisis : महीनों से जारी युद्ध के बीच आर्थिक दबाव झेल रहे ईरान ने पेट्रोल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी है. नई व्यवस्था के तहत तय सीमा से ज्यादा पेट्रोल खरीदने वाले उपभोक्ताओं को अब पहले के मुकाबले दोगुनी कीमत चुकानी होगी. दिसंबर के बाद ये दूसरी बार है जब ईरान में पेट्रोल के दाम बढ़ाए गए हैं.

नई व्यवस्था के मुताबिक, हर महीने 110 लीटर तक पेट्रोल की तय सीमा के बाद अतिरिक्त पेट्रोल खरीदने पर अब 1 लाख रियाल प्रति लीटर का भुगतान करना होगा. ये कीमत करीब 7 सेंट प्रति लीटर बैठती है और दिसंबर में तय की गई दर से लगभग दोगुनी है. सरकार ने सीधे तौर पर युद्ध का जिक्र नहीं किया, बल्कि कीमत बढ़ाने के फैसले के पीछे देश की ‘मौजूदा स्थिति’ को कारण बताया है. सरकार का कहना है कि कीमत बढ़ोतरी से मिलने वाली अतिरिक्त राशि परिवारों को दी जाएगी.

सिर्फ 15% उपभोक्ताओं पर पड़ेगा सीधा असर

ईरान की सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनी के प्रमुख केरामत वेस कारामी के मुताबिक, इस बदलाव का सीधा असर करीब 15% पेट्रोल उपभोक्ताओं पर पड़ेगा. ईरान में पेट्रोल की खपत लगातार बढ़ रही है. अगस्त में देश में पेट्रोल की दैनिक खपत रिकॉर्ड 14.5 करोड़ लीटर तक पहुंच गई, जबकि घरेलू उत्पादन क्षमता करीब 12.2 करोड़ लीटर प्रतिदिन है यानी मांग पूरी करने के लिए ईरान को बाकी पेट्रोल आयात करना पड़ रहा है. विशेषज्ञों के मुताबिक, पेट्रोल की कम कीमत के कारण ईरान में ईंधन की खपत काफी ज्यादा है. इसके पीछे पुराने वाहन, स्पेयर पार्ट्स की कमी और पर्याप्त सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का अभाव भी बड़ी वजह माने जाते हैं. सरकार को उम्मीद है कि कीमत बढ़ने से पेट्रोल की खपत को नियंत्रित किया जा सकेगा.

महंगाई पहले से करीब 67%, अब और बढ़ने की आशंका

हालांकि, पेट्रोल महंगा करने का दूसरा असर महंगाई पर पड़ सकता है. ईरान पहले ही गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है. देश के सरकारी सांख्यिकी केंद्र के मुताबिक, वहां सालाना महंगाई दर करीब 67% है.

पेट्रोल के दाम बढ़ने से परिवहन लागत बढ़ सकती है, जिसका असर रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों पर पड़ने की आशंका है. लोगों को डर है कि पेट्रोल महंगा होने के बाद ब्रेड, मांस और अन्य जरूरी सामान भी महंगे हो सकते हैं. ईरानी मुद्रा रियाल की स्थिति भी लगातार कमजोर हुई है. सोमवार को अमेरिकी डॉलर की कीमत करीब 22.2 लाख रियाल तक पहुंच गई थी. कमजोर मुद्रा और बढ़ती महंगाई ने आम लोगों की खरीदने की क्षमता को काफी प्रभावित किया है.

पेट्रोल की कीमत बढ़ना ईरान में बेहद संवेदनशील मुद्दा

ईरान में पेट्रोल को लंबे समय से आम लोगों के लिए बेहद सस्ती और जरूरी सुविधा माना जाता रहा है. यहां पेट्रोल की कीमत दुनिया के सबसे कम दामों में शामिल है. इसलिए सरकार की ओर से पेट्रोल की कीमत बढ़ाना हमेशा राजनीतिक और सामाजिक रूप से संवेदनशील मुद्दा रहा है. 2019 में पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद पूरे देश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे. इसके बाद हुई कार्रवाई में 300 से ज्यादा लोगों के मारे जाने की रिपोर्ट सामने आई थी. इतिहास में भी पेट्रोल की कीमतों को लेकर ईरान में विरोध देखने को मिलता रहा है. 1964 में पेट्रोल की कीमत बढ़ाए जाने के बाद टैक्सी चालकों की हड़ताल हुई थी. हालात संभालने के लिए तत्कालीन शाह की सरकार को सैन्य वाहनों का इस्तेमाल करना पड़ा था.

पेट्रोल पंपों पर लगी लंबी कतारें, सुरक्षा बढ़ाई गई

नई कीमतें लागू होने के करीब एक घंटे बाद एसोसिएटेड प्रेस ने तेहरान के आठ पेट्रोल पंपों का जायजा लिया. इनमें से दो पेट्रोल पंप कीमतों को नए सिस्टम के मुताबिक अपडेट करने के लिए बंद थे. बाकी छह पंपों पर पेट्रोल मिल रहा था. लेकिन, हर पंप पर करीब एक दर्जन गाड़ियां कतार में खड़ी थीं. पेट्रोल पंपों के आस-पास सुरक्षा भी बढ़ा दी गई थी. वहां वर्दीधारी और सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी तैनात नजर आए.

तेहरान निवासी 34 वर्षीय असगर रहीमी ने कहा कि पेट्रोल की कीमत बढ़ने से सरकार की आर्थिक समस्याएं हल नहीं होंगी. उनके मुताबिक, गरीबी और बेरोजगारी जैसी समस्याओं के सामने यह राहत बेहद छोटी है और आने वाले महीनों में सरकार पेट्रोल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी कर सकती है. वहीं, 55 वर्षीय अली सलारी को डर है कि पेट्रोल महंगा होने का असर दूसरी चीजों की कीमतों पर भी पड़ेगा. उनका कहना है कि जब भी सरकार ने पेट्रोल की कीमतों में बदलाव किया है. उसके बाद दूसरी जरूरी वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ी हैं. तेहरान के एक अन्य निवासी हमीद मिर्जेई ने बताया कि रोजमर्रा की जिंदगी पहले ही काफी मुश्किल हो चुकी है. उनके मुताबिक, बीन्स और दाल जैसी सामान्य किराने की चीजें खरीदने में भी 10 करोड़ रियाल (करीब 73 डॉलर) तक खर्च हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि अगर पेट्रोल भी महंगा होता है तो आम लोगों के लिए मुश्किलें और बढ़ जाएंगी.

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About the Author

Gaurav Singh

Gaurav Singh

जी न्यूज में सीनियर सब-एडिटर हैं और वर्तमान में बिजनेस व फाइनेंशियल न्यूज कवर करते हैं.  देश की राजनीति से लेकर दुनिया के बनते-बिगड़ते सत्ता समीकरणों और घटनाओं को कवर कर चुके हैं  पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो UPTU से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया है. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले गौरव ने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और पिछले 6 वर्षों से लगातार इस क्षेत्र में सक्रिय हैं. आप गौरव सिंह से Gaurav.Singh@India.Com पर ईमेल के जरिए सीधे जुड़ सकते हैं. 
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