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Share Market News: भारतीय स्टॉक मार्केट इस समय विदेशी निवेशकों की चौतरफा बिकवाली की मार से गुजर रहा है. केवल अक्टूबर महीने के दौरान ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने घरेलू शेयर बाजार से 44,166 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम निकाल ली. इसका असर यह हुआ कि सेंसेक्स एक बार फिर से गिरकर 72000 अंक के नीचे पहुंच गया. विदेशी निवेशकों की तरफ से की जा रही बिकवाली का आलम यह है कि अब तक विदेशी निवेशकों की तरफ से 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की निकाली कर ली गई है.
क्रूड ऑयल के दाम में तेजी, यूएस डॉलर की मजबूती और अमेरिका में रिकॉर्ड लेवल पर पहुंची बॉन्ड यील्ड एफपीआई की निकासी का बड़ा कारण है. एफपीआई की निकासी के बारे में जानकारी आप भी यह सोच रहे होंगे कि आखिर विदेशी निवेशक भारी बिकवाली के जरिये क्या करके मानेंगे? आइए जानते हैं विदेशी निवेशकों के पैसा निकालने का कारण और इससे आम निवेशकों पर क्या असर पड़ेगा?
बाजार से जुड़े जानकारों के अनुसार यह बिकवाली देश के प्रति निगेटिव रुख के कारण नहीं बल्कि ग्लोबल लेवल पर कैपिटल अलोकेशन (Global Capital Allocation) के कारण हो रही है.
घरेजू शेयर बाजार में लगातार हो रही FPI बिकवाली के कारण भारतीय शेयर मार्केट का प्रदर्शन इस साल सुस्त रहा है. साल 2026 में निफ्टी ने अब तक -13.87% का रिटर्न दिया है. हालांकि, इस बीच राहत की बात यह है कि भारतीय घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) और रिटेल निवेशकों का इनफ्लो मजबूत बना हुआ है. डीआईआई ने बिकवाली के झटके को काफी हद तक संभाला है. घरेलू कैपिटल के सपोर्ट के कारण जबरदस्त बिकवाली के बावजूद बाजार पूरी तरह धराशायी नहीं हुआ है.
विदेशी निवेशकों की तरफ से की जा रही बिकवाली तब तक जारी रहने की संभावना है जब तक यूएस बॉन्ड यील्ड में नरमी नहीं आ जाती. इसके अलावा भारतीय शेयरों की वैल्यूएशन ज्यादा आकर्षक नहीं हो जाती. जानकारों की तरफ से रिटल निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि घबराहट में किसी तरह का फैसला नहीं लें.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. किसी भी प्रकार का निवेश करने से पहले अपने फाइनेंशियल एक्सर्ट से अवश्य सलाह लें.)