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दुनिया का चौथा सबसे अमीर देश बना भारत, 7 दिन में 45 अरब डॉलर बढ़ा फॉरेक्स रिजर्व; RBI ने रचा इतिहास

India Forex Reserve: भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 785.7 अरब डॉलर पर पहुंचकर अब तक के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया है. भारत ने रूस को पछाड़कर दुनिया में चौथा नंबर हासिल कर लिया है. 4 सितंबर को खत्म हुए हफ्ते में देश का विदेशी मुद्रा भंडार करीब 45 अरब डॉलर बढ़ गया.

Written By Kriyanshu Saraswat
Published: Sep 12, 2026, 04:39 PM IST | Updated: Sep 12, 2026, 04:47 PM IST
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RBI Forex Reserve: भारतीय इकोनॉमी पिछले कुछ हफ्तों से लगातार रिकॉर्ड बना रही है. जी हां, देश का विदेशी मुद्रा भंडार यानी फॉरेक्स रिजर्व (Forex Reserve) एक बार फिर अपने ऑल टाइम हाई 785.7 अरब डॉलर पर पहुंच गया. पिछले हफ्ते भी देश के फॉरेक्स रिजर्व ने रिकॉर्ड बनाया था. हालांकि, इस हफ्ते यह उससे भी आगे निकल गया है. एक हफ्ते के दौरान देश के विदेशी मुद्रा भंडार में करीब 45 अरब डॉलर की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई. इस ऐतिहासिक छलांग के साथ भारत ने रूस को पीछे छोड़ दिया है. इसके साथ ही भारत दुनिया में चौथा सबसे बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार रखने वाला देश बन गया है. इस मामले में भारत से आगे केवल चीन, जापान और स्विट्जरलैंड ही हैं.

आरबीआई (RBI) की तरफ से जारी आंकड़ों के अनुसार 4 सितंबर को खत्म हुए हफ्ते में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 44.903 अरब डॉलर बढ़कर 785.706 अरब डॉलर के रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गया. अगस्त के आखिर में रूस का फॉरेक्स रिजर्व लगभग 769 अरब डॉलर था. इस तरह हालिया आंकड़ों के अनुसार भारत ने रूस को पीछे छोड़ दिया है. हैरान करने वाली बात यह है कि देश का खजाना लगातार 10 हफ्ते से बढ़ रहा है और इस दौरान कुल 120 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है.

एक साथ कहां से आया इतना पैसा?

फॉरेक्स रिजर्व में आए उछाल की सबसे अहम वजह फॉरेन करेंसी एसेट (Foreign Currency Assets) में आया उछाल है. 4 सितंबर को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा संपत्तियां 47.498 अरब डॉलर बढ़कर 648.168 अरब डॉलर हो गईं. हालांकि, इस दौरान भारत के गोल्ड रिजर्व (Gold Reserves) के दाम में 2.594 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई और यह घटकर 113.816 अरब डॉलर रह गया. इसके अलावा आईएमएफ (IMF) के साथ एसडीएफ (SDR) मामूली रूप से घटकर 18.806 अरब डॉलर रहा, जबकि आईएमएफ (IMF) में देश की रिजर्व पोजिशन बढ़कर 4.916 अरब डॉलर हो गई.

आरबीआई की स्कीम ने बदला पूरा खेल

फॉरेक्स रिजर्व में आया उछाल संपत्तियों की री-वैल्यूएशन से नहीं, बल्कि बैंकिंग सिस्टम में असल में भारी मात्रा में विदेशी करेंसी आई है. इसका बड़ा कारण जून में आरबीआई की तरफ से शुरू की गई स्पेशल स्कीम हैं. आरबीआई (RBI) ने विदेशी मुद्रा जमा और विदेशी लोन को आकर्षित करने के लिये बैंकों को खास रियायतें और प्रोत्साहन दिये थे. 5 जून से 31 अगस्त के बीच आरबीआई (RBI) ने इस उपाय के तहत 136.3 अरब डॉलर जुटाए, जिसमें से करीब 127 अरब डॉलर एनआरआई (NRI) डिपॉजिट से आए. इस कारण इतने कम समय में इतना बड़ा उछाल देखा गया.

आम आदमी और इकोनॉमी के लिए क्या मायने?

आसान शब्दों में कहें तो विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) देश का फाइनेंशियल सुरक्षा कवच होता है. देश को क्रूड ऑयल आयात करने, विदेशी कर्ज चुकाने और इंटरनेशनल मार्केट के उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए डॉलर और दूसरी फॉरेक्स करेंसी की जरूरत होती है. जब भी भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होने लगता है तो आरबीआई (RBI) अपने इसी खजाने से डॉलर बेचकर और रुपया खरीदकर रुपये पर पड़ने वाले दबाव को संभालने का काम करता है. क्रूड ऑयल की ऊंची कीमत और रुपये पर दबाव के बीच यह मजबूत बफर देश को बाहरी झटकों से बचाएगा.

आरबीआई की देनदारियां भी बढ़ रहीं

रिकॉर्ड आंकड़े के पीछे बहुत ही अहम तकनीकी बात छिपी है, जिसे समझना बहुत जरूरी है. खजाने में आई हालिया बढ़ोतरी का बड़ा हिस्सा ऐसी विदेशी मुद्रा जमाओं और कर्ज से आया है, जिन्हें आरबीआई (RBI) के साथ स्वैप किया गया है. इन डील से सेंट्रल बैंक की स्पॉट होल्डिंग्स तो बढ़ जाती हैं लेकिन आने वाले समय में आरबीआई (RBI) की देनदारियां (Forward Obligations) बढ़ जाती हैं. इससे साफ है कि यह पैसा देश को मिला कोई गिफ्ट या नेट एसेट नहीं है, जिसे सीधा खर्च किया जा सके. इसके साथ भविष्य की जिम्मेदारियां भी जुड़ी हैं.

क्या है आरबीआई की नई स्ट्रैटजी?

बड़ी मात्रा में विदेशी करेंसी के आने से नई चुनौती खड़ी हो गई है. बैंकिंग सिस्टम में भारतीय रुपये की लिक्विडिटी बहुत ज्यादा हो गई है. बैंकों के पास अतिरिक्त पैसा जमा होने से शॉर्ट टर्म ब्याज दर के नीचे गिरने का रिस्क बन गया है. आरबीआई (RBI) गवर्नर संजय मल्होत्रा की तरफ से साफ इशारा किया गया कि एक्सट्रा पैसे को बाजार से कम करने के लिए आरबीआई बॉन्ड बिक्री और फॉरेक्स स्वैप जैसा तरीका यूज कर सकता है. इसी स्ट्रैटजी के तहत आरबीआई ने 16 सितंबर से तीन चरणों में एक लाख करोड़ रुपये के सरकारी बॉन्ड बेचने की योजना का ऐलान किया है.

निचले स्तर से रिकॉर्ड लेवल का शानदार सफर

देश के विदेशी मुद्रा भंडार के लिए यह बहुत बड़ा टर्नअराउंड है. साल की शुरुआत में जब रुपया गिर रहा था तब आरबीआई (RBI) ने रुपये को संभालने के लिए भारी मात्रा में डॉलर बेचे थे, जिससे भंडार में काफी कमी आई थी. लेकिन इसके बाद आरबीआई ने अपने बफर को फिर से बनाना शुरू किया और पिछले 10 हफ्तों से लगातार हर हफ्ते खजाना बढ़ता रहा. पिछला ऑल टाइम हाई रिकॉर्ड 28 अगस्त को खत्म सप्ताह में 740.803 अरब डॉलर था. मौजूदा समय में आंकड़ा मार्च के अंत के लेवल से 94.6 अरब डॉलर ज्यादा है. 

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About the Author

क्रियांशु सारस्वत वरिष्ठ बिजनेस जर्नलिस्ट (Business Journalist) हैं, उन्हें डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 साल का अनुभव है. मौजूदा समय में वह Zee News (Hindi) की डिजिटल टीम में बतौर 'असिस्टेंट न्यूज एडिटर' कार्यरत हैं. क्रियांशु को बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, टैक्सेशन, कमोडिटी और सरकारी योजनाओं आदि से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में महारथ हासिल है. Zee News से पहले क्रियांशु ने टाइम्स इंटरनेट, हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण और अमर उजाला की वेबसाइट में अहम संपादकीय जिम्मेदारियां निभाई हैं. इस दौरान क्रियांशु ने ऑटो, टेक्नोलॉजी और लाइफस्‍टाइल लीड की जिम्मेदारी संभाली है. अभी क्रियांशु बिजनेस लीड हैं. यूपी से ताल्‍लुक रखने वाले क्र‍ियांशु पत्रकार‍िता में पोस्ट ग्रेजुएट हैं.
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