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India Petroleum Export: अपनी जरूरत का 85% कच्चा तेल आयात करने वाला भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है.
मिनिस्ट्री ऑफ पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस डेटा के मुताबिक भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा तेल रिफाइनिंग करने वाला देश है.
इसके अलावा भारत दुनिया का 5वां सबसे बड़ा पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट है.
ये तीन रिकॉर्ड भारत की तेल यात्रा को बयां करते हैं. ये बताते हैं कि कैसे अपनी ऊर्जा जरूरतों को कच्चे तेल के आयात से पूरा करने वाला देश उन्हीं तेल की रिफाइनरिंग कर दुनियाभर को बेचता है और करोड़ों-अरबों डॉलर की कमाई करता है. ये समझना दिलचस्प है कि आखिर भारत के पास ऐसा कौन-सा सीक्रेट है, जिसकी बदौलत भारत बिना तेल के कुएं के पेट्रोल-डीजल का किंग बना हुआ है. कैसे एक तेल इम्पोर्टर देश तेल का एक्सपोर्टर बना हुआ है ?
भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक देश है. इसके साथ ही भारत एशिया, यूरोप, रूस, अमेरिका, UAE, मॉरीशस, केन्या, नीदरलैंड समेत करीब 150 देशों को पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का निर्यात करता है. तेल आयात करने वाला भारत भर-भरकर तेल बेचता है. सिर्फ अगस्त 2026 में भारत का पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट $6.81 अरब डॉलर पर पहुंच गया,जिसमें साल-दर साल 63.27% का ग्रोथ दर्ज किया गया. अकेले डीजल एक्सपोर्ट जुलाई 2026 में 2.4 मिलियन टन पर पहुंच गया. भारतीय रिफाइनरियों की ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स खरीदारों की लाइन में यूरोप, अमेरिका जैसे देश भारत के सामने लाइन लगाकर खड़े हैं. वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने अमेरिका को सालाना लगभग 60 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का पेट्रोलियम प्रोडक्ट का निर्यात किया. अमेरिका भारत से पेट्रोलियम फ्यूल, नेफ्था, ल्यूब्रिकेंट और एविएशन फ्यूल खरीदता है. इसी तरह से भारत रूस को भारी मात्रा में पेट्रोल एक्सपोर्ट कर रहा है.सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने अगस्त 2026 में रूस को लगभग 1.20 लाख टन रिफाइंड पेट्रोल भेजा है, जो रूस के कुल पेट्रोल आयात का करीब 70% है.
पेट्रोलियम के निर्यात पर सरकार की सख्त निगरानी रहती है. तेल कंपनियां अधिक मुनाफे के चक्कर में घरेलू जरूरत को पूरा किए बिना ज्यादा निर्यात ना करने लगे, इसपर सरकार की विंडफॉल टैक्स के जरिए नकेल कसती रहती है. 16 सितंबर को सरकार ने विंडफॉल टैक्स में फिर से बड़ा बदलाव किया है. सरकार ने एक्सपोर्ट पर लगने वाला टैक्स घटाया है. वित्त मंत्रालय ने पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर विंडफॉल टैक्स 0.5 रुपये प्रति लीटर, डीजल के एक्सपोर्ट पर 20 रुपये प्रति लीटर और एविएशन फ्यूल पर 15 रुपये प्रति लीटर एक्सपोर्ट ड्यूटी टैक्स घटाया है. टैक्स कम होने का मतलब निर्यात बढ़ने और सरकारी खजाने में ज्यादा रेवेन्यू आने से है. अब समझते हैं कि कैसे तेल खरीदकर अपनी जरूरत को पूरा करने वाला भारत पेट्रोल-डीजल बेचता है.
पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक भारत दुनिया का पाँचवाँ सबसे बड़ा मुल्क है, जो पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स जैसे पेट्रोल, डीजल, ATF का निर्यात करता है. इसके पीछे भारत की तेल रिफाइनरियों की ताकत काम करती है. भारत की 23 तेल रिफाइनरियां हर दिन करीब 5.4 से 5.5 मिलियन बैरल तेल की रिफाइनिंग करती है.

गुजरात के जामनगर स्थित रिफाइनरी दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी है, जो अकेले हर दिन करीब 1.4 मिलियन बैरल कच्चा तेल रिफाइन करती है. जामनगर रिफाइनरी के साथ रूस की नायरा एनर्जी, HPCL-मित्तल एनर्जी भारत की कुल रिफाइनिंग का 40% हिस्सा कंट्रोल करती है.
पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के आंकड़ों के मुताबिक भारतीय रिफाइनरियों की क्षमता 267.2 मिलियन टन है. बीते 12 सालों में इसमें 24% का ग्रोथ हुआ है.2030 तक इसकी क्षमता 310 मिलियन टन तक पहुंचाने की है. तेल की रिफाइनिंग करते भारत मोटी कमाई करता है. भारत के तेल का असली सीक्रेट जमीन से नीचे नहीं गड़ा है, बल्कि उन मशीनों में छिपा है, जिसकी बदौलत आज हम देश के सिर्फ खरीदार बनकर नहीं रह गए, बल्कि पेट्रोल-डीजल के बड़े निर्यातक बने हुए हैं.

PPAC डेटा के मुताबिक भारत 88.7% कच्चा तेल आयात करता है, जबकि 11.3% घरेलू उत्पादन से हासिल करता है. अप्रैल-अगस्त 2026-27 में भारत का कुल कच्चे तेल का आयात बढ़कर 95.57 अरब डॉलर पहुंच गया, जो पिछले साल इसी अवधि में 78.07 अरब डॉलर था.
अप्रैल-अगस्त 2026-27 के दौरान भारत का पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का कुल निर्यात बढ़कर 35.31 अरब डॉलर हो गया है, जो पिछले वित्त वर्ष इसी अवधि में 25.32 अरब डॉलर था. अकेले अगस्त 2026 में पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात 63.27% की बढ़कर 6.81 अरब डॉलर पर पहुंच गया.
अमेरिका और यूरोप की रिफाइनरियां पुरानी हो रही है, बंद हो रही है, उनकी क्षमता घट रही है, जबकि भारत की रिफाइनिंग क्षमता लगातार बढ रही है.
भारत रूस जैसे देशों से रियायती दरों पर तेल खरीदकर उसे अपनी रिफाइनरियों में प्रोसेस करने निर्यात करता है, जिसके अरबों डॉलर की कमाई होती है.