)
दिवाली और धनतेरस का त्योहार इसी हफ्ते है. व्यापारी पूरे साल इस मौके का बेसब्री से इंतजार करते हैं. इस दौरान बाजारों में भारी भीड़ देखी जाती है और हर मिनट करोड़ों का ट्रांजेक्शन होता है. लेकिन इस बार धनतेरस और दिवाली से पहले दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित INDIA ब्लॉक की महारैली ने व्यापारियों के चेहरे की रंगत को उड़ा दिया है. चैम्बर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के अनुसार इस रैली की वजह से सेंट्रल दिल्ली और पुरानी दिल्ली के करीब 20 अहम बाजार में सन्नाटा पसरने का खतरा है. धनतेरस इस बार 6 नवंबर को और दिवाली 8 को है. ऐसे में 1 नवंबर का दिन दिल्ली के कारोबारियों के लिहाज से बेहद अहम है.
आप भी शायद सोच रहे हो कि एक दिन की रैली से 12,000 करोड़ रुपये का घाटा कैसे हो सकता है? इस पर सीटीआई चेयरमैन बृजेश गोयल का कहना है कि दिल्ली में जहां यह रैली हो रही है, उस रामलीला मैदान के 5 किमी के दायरे में करीब 3 लाख दुकानें हैं. रैली के दौरान ढाई लाख दुकानों के पूरी तरह बंद रहने का अनुमान है. इस दौरान वहां किसी ग्राहक के पहुंचने की उम्मीद कम ही है. इस रैली से प्रभावित होने वाले इलाकों में करीब 80% बिजनेस एक्टिविटी पूरी तरह से रुक जाएंगी. दिवाली के मौके पर इन 20 बड़े बाजारों का रोज का टर्नओवर 10,000 करोड़ से 12,000 करोड़ रुपये के बीच होता है. इससे केवल दुकानदारों का ही नुकसान नहीं हो रहा, बल्कि इस पूरे इकोसिस्टम से जुड़े करीब 20 लाख छोटे-बड़े व्यापारियों और 75 लाख मजदूरों की रोजी-रोटी पर भी असर पड़ रहा है.
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रैली में आने वाले लोगों से एक वीडियो के जरिये अपील की थी कि जितने भी कार्यकर्ता और लोग दिल्ली आ रहे हैं, वे यहां के लोकल बाजार में जाएं और दिल खोलकर शॉपिंग करें ताकि व्यापारियों को सपोर्ट मिल सके. हालांकि, CTI ने राहुल गांधी की इस भावना का स्वागत किया. लेकिन सीटीआई ने जमीनी हकीकत को इससे बिल्कुल अलग बताया. ब्रजेश गोयल ने सवालिया अंदाज में पूछा कि जब सड़कों पर भयंकर जाम होगा, लोगों को गाड़ियां खड़ी करने की जगह नहीं मिलेगी और सुरक्षा कारणों से दुकानें बंद रहेंगी तो रैली में आए लोग शॉपिंग के लिए कहां जाएंगे? ऐसे में CTI ने राहुल गांधी को चौथी बार चिट्ठी लिखकर अपनी चिंता जाहिर की है.
दुकानें बंद होना महज एक पहलू है. असली समस्या सामान को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने में आ रही है. दिल्ली के 56 इंडस्ट्रियल एरिया जैसे नरेला, बवाना, ओखला, मायापुरी, मुंडका और उद्योग नगर से हर रोज करीब 5,000 ट्रक और टेम्पो सामान लेकर चांदनी चौक, सदर बाजार और भागीरथ पैलेस जैसे बड़े बाजार में पहुंचते हैं. रैली के कारण 10 किमी के दायरे में भारी वाहनों की आवाजाही पर ब्रेक ब्रेक लग गया है. लोडिंग और अनलोडिंग भी पूरी तरह ठप हो गई है. धनतेरस के मौके पर जो सामान ग्राहकों के हाथों होना चाहिए था, वो गोदामों और ट्रकों में ही सड़ रहा है. दुकानों तक सामान नहीं पहुंच पाने से सप्लाई चेन पूरी तरह टूट चुकी है.
व्यापारियों को हो रहे नुकसान के बीच राजनीतिक आरोप भी लगने शुरू हो गए. कुछ लोगों की तरफ से कहा गया कि व्यापारी किसी खास पार्टी के इशारे पर रैली का विरोध कर रहे हैं. इस पर CTI चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि करीब 100 बड़ी मार्केट एसोसिएशंस ने मिलकर रैली को आगे बढ़ाने या फिलहाल स्थगित करने को लेकर अपील की थी. उन्होंने कहा, 'हम व्यापारी हैं और बीजेपी के एजेंट नहीं. ये 100 संगठन किसी राजनीतिक दल के कार्यकर्ता नहीं हैं. ये सभी दिल्ली के आम दुकानदार हैं और उनका मकसद महज धंधा बचाना है, राजनीति करना नहीं.' कारोबारियों का यह भी कहना है कि वे किसी विपक्षी दल या उनकी रैली के खिलाफ नहीं हैं. उनका लोकतंत्र में यकीन है, लेकिन उनकी केवल इतनी मांग थी कि उनके सीजन की कमाई को इस तरह नुकसान नहीं पहुंचाया जाए.