IMF Flags 3 Major Risks : इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने चेतावनी दी है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), लंबे समय तक चलने वाला मिडिल ईस्ट का संघर्ष और बढ़ता सरकारी कर्ज ग्लोबल इकोनॉमी के लिए बड़े जोखिम पैदा कर सकते हैं. मंगलवार को बैंकॉक में जारी 'वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक' रिपोर्ट में IMF ने 2026 में ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोथ 3.1% रहने का अनुमान लगाया है. ये जुलाई में लगाए गए 3% के अनुमान से थोड़ा अधिक है. मिडिल ईस्ट युद्ध के कारण तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद, AI इंफ्रास्ट्रक्चर में मजबूत निवेश ने ग्रोथ को सहारा दिया है.
IMF को उम्मीद है कि 2027 में ग्लोबल ग्रोथ 3.4% तक पहुंच जाएगी. लेकिन, ये अनुमान इस बात पर निर्भर करता है कि मार्च तक होर्मुज फिर से खुल जाए और अक्टूबर 2027 तक शिपिंग की स्थिति युद्ध से पहले जैसी हो जाए.
IMF ने चेतावनी दी कि अगर AI टेक्नोलॉजी प्रोडक्टिविटी और मुनाफे में उम्मीद के मुताबिक फायदा नहीं दे पाती है, तो AI निवेश में अचानक गिरावट से फाइनेंशियल मार्केट को नुकसान हो सकता है और इकोनॉमिक ग्रोथ धीमी हो सकती है. डाउनसाइड सिनेरियो यानी नकारात्मक स्थिति में AI निवेश में बड़ी कमी के कारण 2028 तक ग्लोबल GDP में 1.1% की गिरावट आ सकती है. इस स्थिति में US के इकोनॉमिक आउटपुट में 1.8% की गिरावट आ सकती है.
IMF ने अपनी 'ग्लोबल फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट' में भी इन जोखिमों पर जोर दिया और चेतावनी दी है कि पॉलिसी बनाने वालों को AI निवेश और स्टॉक वैल्यूएशन में गिरावट की संभावना को लेकर लापरवाह नहीं होना चाहिए. IMF के ग्लोबल मार्केट्स एनालिसिस डिवीजन के असिस्टेंट डायरेक्टर जेसन वू ने कहा कि AI कंपनियों की रेवेन्यू जेनरेट करने की क्षमता को लेकर संदेह इक्विटी निवेश की वैल्यू कम कर सकता है. इससे कर्ज चुकाना मुश्किल हो सकता है और कंपनियों को भविष्य के रेवेन्यू कमिटमेंट्स को पूरा करने से रोक सकता है.
IMF के मॉनेटरी एंड कैपिटल मार्केट्स डिपार्टमेंट के डिप्टी डायरेक्टर एथानासियोस वामवाकिडिस के मुताबिक, AI मार्केट में सुधार (करेक्शन) अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर सकता है. इससे एसेट की कीमतें गिर सकती हैं और कंज्यूमर डिमांड कम हो सकती है क्योंकि परिवारों को अपनी आर्थिक स्थिति कमजोर महसूस हो सकती है.
IMF ने ये भी चेतावनी दी है कि AI से जुड़े इन्वेस्टमेंट में सुस्ती ग्लोबल ट्रेड पर असर डाल सकती है. 2023 और 2025 के बीच AI से जुड़े सामानों के ट्रेड में 29% की बढ़ोतरी हुई. ये इसी दौरान ग्लोबल ट्रेड में दर्ज 8.3% की बढ़ोतरी से तीन गुना अधिक है. IMF को उम्मीद नहीं है कि खराब हालात में भी इकोनॉमिक आउटपुट में भारी गिरावट से ग्लोबल ग्रोथ मंदी की चपेट में आएगी. IMF की डिप्टी रिसर्च डायरेक्टर पेट्या कोएवा ब्रूक्स ने कहा कि अनुमानित गिरावट से ग्रोथ के ग्लोबल मंदी वाले स्तर तक गिरने की संभावना कम है.
मिडिल ईस्ट का टकराव ग्लोबल इकोनॉमी के लिए एक और बड़ा जोखिम बना हुआ है. खासकर तेल की कीमतों और शिपिंग पर इसके असर के कारण. 2027 के लिए IMF के ग्रोथ अनुमान में ये माना गया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज मार्च तक फिर से खुल जाएगा और शिपिंग की स्थिति अक्टूबर 2027 तक युद्ध से पहले जैसी हो जाएगी. हालांकि, IMF ने चेतावनी दी है कि अगर टकराव और बढ़ता है और 2027 की पहली तिमाही तक तेल की कीमतें $130 प्रति बैरल से ऊपर रहती हैं, तो अगले साल ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोथ 0.5 प्रतिशत अंक कम हो सकती है. तेल की ज्यादा कीमतें महंगाई का दबाव बढ़ा सकती हैं.
IMF ने AI से जुड़े बढ़ते साइबर सिक्योरिटी जोखिमों पर भी जोर दिया है. ये चेतावनी ऐसे समय में आई है जब बैंकिंग रेगुलेटर इस बात की जांच बढ़ा रहे हैं कि फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन एडवांस्ड AI मॉडल का इस्तेमाल कैसे करते हैं और संभावित जोखिमों के लिए कैसे तैयारी करते हैं.
IMF के मुताबिक, पब्लिक डेट (सरकारी कर्ज) और बढ़ते बॉन्ड यील्ड ग्लोबल इकोनॉमी पर दबाव बढ़ा रहे हैं. कर्ज लेने की ज्यादा लागत और महंगाई से सरकारों का कर्ज चुकाने पर होने वाला खर्च बढ़ सकता है. इससे उनके पास ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए कम गुंजाइश बचेगी. नाइजीरिया के वित्त मंत्री और विकासशील देशों के 'ग्रुप ऑफ़ 24' के चेयरमैन, ताइओ ओयेडेले ने कहा कि कर्ज से जुड़ी दिक्कतें समावेशी विकास में एक बड़ी रुकावट बनी हुई हैं. उन्होंने कहा कि अनुमानों से पता चलता है कि विकासशील देश विकसित देशों की तुलना में कर्ज के लिए 500 अरब डॉलर ज्यादा चुका रहे हैं, जबकि उन्हें बढ़ते बजट घाटे का भी सामना करना पड़ रहा है.
कई सरकारों ने अभी तक कर्ज कम करने की अपील पर कोई कार्रवाई नहीं की है. अटलांटिक काउंसिल में अंतरराष्ट्रीय अर्थशास्त्र के वाइस प्रेसिडेंट जोश लिप्सकी ने कहा कि फ्रांस, जर्मनी और अमेरिका जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को अपने वित्त को नियंत्रित करने की जरूरत है. लेकिन, वे इसके उलट दिशा में बढ़ रहे हैं.