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सेना से जुड़े 14 लाख फौजियों को टोल पर मिलेगी छूट! सड़क मंत्रालय के साथ क्या बातचीत चल रही?

अलग-अलग सेना में काम करने वाले देश के 14 लाख रक्षाकर्मियों की कारों को हाइवे पर टोल प्लाजा से गुजरते समय किसी तरह की परेशाननी न हो, इसके लिए सरकार की तरफ से फ्री टोल प्लाजा सुविधा पर काम किया जा रहा है. एमएलएफएफ सिस्टम के तहत फौजियों के लिए नया सिस्टम तैयार करने पर बातचीत चल रही है.

सेना से जुड़े 14 लाख फौजियों को टोल पर मिलेगी छूट! सड़क मंत्रालय के साथ क्या बातचीत चल रही?
Image Credit: (AI) फाइनेंशियल ईयर 2028 के आखिर तक देश के 1150 टोल प्लाजा को इस सिस्टम से जोड़ने का टारगेट रखा गया है.

अगर आप खुद भारतीय सेना, नौसेना या वायुसेना में जॉब करते हैं या आपके परिवार में कोई भारतीय सेना से जुड़ा हुआ है तो यह खबर आपके काम की है. जी हां, सरकार की तरफ से 14 लाख सैनिकों और रक्षाकर्मियों के लिए ऐसा डिजिटल सिस्टम लाया जा रहा है, जिससे उन्हें प्राइवेट कारों के लिए हाइवे से गुजरने के लिए टोल का भुगतान नहीं करना होगा. देशभर के नेशनल हाइवे पर पुराने टोल बूथ और बैरियर को हटाने की तैयारी चल रही है. सरकार अब मल्टी-लेन फ्री फ्लो टोलिंग सिस्टम (MLFF) को लागू कर रही है. इसमें टोल प्लाजा पर रुके बिना ऊपर लगे हाई-टेक कैमरे और सेंसर चलती कार की नंबर प्लेट और फास्टैग को स्कैन कर लेते हैं. अभी तक फौजी टोल प्लाजा पर अपनी आईडी दिखाकर प्राइवेट कारों का टोल माफ करा लेते थे.

नए नियम के तहत जब बैरियर नहीं होंगे और ऑटोमेटिक कैमरे काम करेंगे तो बिना डिजिटल एंट्री के सिस्टम गाड़ी का टोल काट लेगा या पेंडिंग टोल का ई-चालान भेज दिया जाएगा. इस कारण कुछ सैनिकों को बेवजह परेशानी का सामना करना पड़ रहा था. इस तरह की किसी भी परेशानी को दूर करने के लिए मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाइवे (MoRTH) और डिफेंस मिनिस्ट्री आपस में लगातार बातचीत कर रही हैं. देश के अंदर फिलहाल 14 लाख एक्टिव डिफेंस पर्सनल हैं. सराकर की तरफ से ऐसा मैकेनिज्म तैयार करने पर काम किया जा रहा है, जिससे फौजियों की प्राइवेट कारों की तुरंत पहचान हो जाए और हाइवे पर बिना किसी रुकावट के वे टोल प्लाजा से पास हो सकें. इससे हाइवे पर ट्रैफिक स्मूथ रहेगा और सैन्यकर्मियों का सम्मान भी होगा.

खास किस्म का फास्टैग जारी किया जाएगा!

मिंट में प्रकाशित खबर के अनुसार इस तरह की समस्या के समाधान के लिए दो ऑप्शन रखे गए हैं. पहले ऑप्शन के तहत रक्षाकर्मियों की प्राइवेट कारों के लिए खास किस्म का डिफरेंशिएज्ड फास्टैग जारी किया जाए. यह फास्टैग हाइवे पर गाड़ी के मूवमेंट को रिकॉर्ड करेगा, लेकिन खाते से एक भी रुपया टोल नहीं कटेगा. दूसरे ऑप्शन के तहत नॉर्मल फास्टैग एनुअल पास जवानों को दिये जाए और उस पास का एनुअल चार्ज डिफेंस मिनिस्ट्री की तरफ से भरा जाए. हालांकि, अभी दोनों मिनिस्ट्री के बीच इसको लेकर बातचीत जारी है. यह बातचीत भी चल रही है कि इसका खर्च कौन सा मंत्रालय उठाएगा.

1150 टोल प्लाजा को MLFF से जोड़ने का टारगेट

मल्टी-लेन फ्री फ्लो हाईवे टोलिंग (MLFF) बहुत ही एडवांस टेक्नोलॉजी है. इसमें टोल प्लाजा पर कार की रफ्तार को धीमी करने या उसे रोकने की भी जरूरत नहीं होती. ओवरहेड गेंट्री पर लगे ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन कैमरे और आरएफआईडी (RFID) रीडर्स 100 किमी प्रति घंटे पर गुरजने वाली कार को आसानी से ट्रैक कर लेते हैं. फाइनेंशियल ईयर 2028 के आखिर तक देश के 1,150 टोल प्लाजा को इस सिस्टम से जोड़ने का टारगेट रखा गया है. अभी यह सिस्टम कुछ टोल प्लाजा पर ही चल रहा है. आने वाले समय में 300 से 400 और टोल बूथ को इसके दायरे में लाया जाएगा.

सरकारी खजाने पर कितना खर्च आएगा?

इस सिस्टम को तैयार करने में कितना खर्च आएगा. इसका अनुमान आप इस तरह लगा सकते हैं अभी एनएचएआई (NHAI) के एनुअल फास्टैग की कीमत साल 2026-27 के लिए ₹3,075 है. इसमें आप सालभर में 200 बार टोल क्रॉस कर सकते हैं. मान लीजिए यदि 10 लाख जवानों की प्राइवेट कारों के लिए भी यह पास स्पॉन्सर किया गया तो सालाना खर्च करीब 307.5 करोड़ रुपये होगा. हालांकि, अंतिम बजट इस पर निर्भर करेगा कि कुल कितनी गाड़ियां इस योजना के तहत रजिस्टर होती हैं और दोनों मिनिस्ट्री के बीच क्या एग्रीमेंट होता है?

सिक्योरिटी और प्राइवेसी पर फोकस

सेना के मामले में सिक्योरिटी और डेटा प्राइवेसी का सबसे ज्यादा ध्यान रखा जाता है. सरकारी अधिकारियों के अनुसार सेना की ऑफिशियल कारों के लिए स्पेशल डिफेंस नंबर प्लेट का यूज किया जाएगा. इनका मूवमेंट डेटा प्रोसेस होने के बाद तुरंत सिस्टम से डिलीट कर दिया जाएगा ताकि सिक्योरिटी के लिए भी किसी तरह का खतरा नहीं होगा. प्राइवेट गाड़ियों के लिए डेटाबेस को रियल-टाइम सिंक किया जाएगा. इससे कोई फर्जी फास्टैग नहीं बना सकेगा और न ही इस छूट का मिसयूज कर सकेगा.

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About the Author

Kriyanshu Saraswat

Kriyanshu Saraswat

क्रियांशु सारस्वत वरिष्ठ बिजनेस जर्नलिस्ट (Business Journalist) हैं, उन्हें डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 साल का अनुभव है. मौजूदा समय में वह Zee News (Hindi) की डिजिटल टीम में बतौर 'असिस्टेंट न्यूज एडिटर' कार्यरत हैं. क्रियांशु को बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, टैक्सेशन, कमोडिटी और सरकारी योजनाओं आदि से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में महारथ हासिल है. Zee News से पहले क्रियांशु ने टाइम्स इंटरनेट, हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण और अमर उजाला की वेबसाइट में अहम संपादकीय जिम्मेदारियां निभाई हैं. इस दौरान क्रियांशु ने ऑटो, टेक्नोलॉजी और लाइफस्‍टाइल लीड की जिम्मेदारी संभाली है. अभी क्रियांशु बिजनेस लीड हैं. यूपी से ताल्‍लुक रखने वाले क्र‍ियांशु पत्रकार‍िता में पोस्ट ग्रेजुएट हैं.
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