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कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रमा एकादशी कहते हैं. इसे रंभा एकादशी भी कहा जाता है. इस साल नवंबर की पहली एकादशी रमा एकादशी ही है. चूंकि यह एकादशी कार्तिक अमावस्या पर दीपावली पर्व मनाने से कुछ दिन पहले पड़ती है. इसलिए यह दिवाली से पहले मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने का एक खास दिन भी है. इस एकादशी का व्रत रखना, विधि-विधान से लक्ष्मी जी और विष्णु जी की पूजा करना अपार धन-समृद्धि, सौभाग्य के योग बनाता है.
द्रिक पंचांग के अनुसार, कार्तिक कृष्ण एकादशी 4 नवंबर की सुबह 11:03 बजे शुरू होगी और 5 नवंबर की सुबह 10:35 बजे समाप्त होगी. उदयातिथि के आधार पर 5 नवंबर को रमा एकादशी व्रत रखा जाएगा.
रमा एकादशी व्रत का पारण : 6 नवंबर की सुबह 06:37 बजे से 08:48 बजे तक.
एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और उनकी कृपा पाने के लिए किया जाता है. इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की करते हैं. दिवाली से पहले इस एकादशी के दिन किए गए कुछ उपाय भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का विशेष आशीर्वाद दिला सकते हैं क्योंकि धार्मिक मान्यता है कि लक्ष्मी प्रसन्न होंगी तो उनके पति भगवान विष्णु प्रसन्न होंगे और विष्णु जी प्रसन्न होंगे तो लक्ष्मी जी प्रसन्न होंगी.
- रमा एकादशी के दिन भगवान विष्णु को तुलसी दल जरूर अर्पित करें क्योंकि यह उन्हें बेहद प्रिय है. तुलसी जी को लक्ष्मी जी का ही रूप माना गया है.
- रमा एकादशी के दिन तुलसी जी की पूजा करें, तुलसी की पूजा करने से लक्ष्मी जी प्रसन्न होंगी. घर में धन-समृद्धि, सौभाग्य और सकारात्मकता बढ़ेगी.
- एकादशी के दिन दक्षिणावर्ती शंख की पूजा करें. मान्यता है कि इससे लक्ष्मी जी बेहद प्रसन्न होती हैं.
- एकादशी के दिन विष्णु सहस्त्रनाम के साथ कनकधारा स्त्रोत का पाठ भी घर लें. इसके लिए शाम को मंदिर में लक्ष्मी जी के सामने घी का दीपक जलाएं और यह पाठ करें.
- एकादशी के दिन गरीबों को पीली मिठाई, पीले कपड़े, अनाज या चने का दान करें.
- एकादशी के दिन बाल न धोएं, कपड़े धोने और पोछा लगाने से भी बचें.
- तुलसी के पौधे में जल न दें. न ही पौधे को स्पर्श करें.
- इस दिन तामसिक चीजें जैसे - प्याज, लहसुन, मांस और मछली जैसे तामसिक भोजन न करें. न ही चावल खाएं.
(Disclaimer- यह सामग्री धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित परंपराओं एवं उपलब्ध धार्मिक स्रोतों पर आधारित है. विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और परंपराओं के अनुसार व्रत-त्योहारों की तिथि, पूजा-विधि एवं मान्यताओं में अंतर संभव है. पाठक इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में देखें.)