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टिक, टिक, टिक, टिक...अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में एक परमाणु घड़ी का काउंटडाउन चालू है. यह दावा है फॉक्स न्यूज के पूर्व होस्ट और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वफादार माने जाने वाले टकर कार्लसन का. अगर उनकी मानें तो ईरान पर परमाणु हमला कराने के लिए इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू लगातार ट्रंप पर हर रोज दबाव डाल रहे हैं और माना जा रहा है कि ट्रंप यह आदेश देने के बेहद करीब हो भी सकते हैं.
कार्लसन के मुताबिक, अमेरिका ईरान के पिकैक्स माउंटेन पर परमाणु हमला कर सकता है. इसके बारे में माना जाता है कि यह ईरान की नतान्ज न्यूक्लियर फैसिलिटी के पास बना एक बेहद सेफ अंडरग्राउंड कॉम्प्लेस है.
कार्लसन ने X पर एक लंबी पोस्ट में एक 'जानकार सूत्र' के हवाले से कई अहम बातें लिखी हैं.उन्होंने लिखा, 'बीबी' यानी नेतन्याहू इसे लेकर हर दिन ट्रंप को फोन करते हैं. उनका दावा है कि पिछले हफ्ते आए चुनाव नतीजों के बाद इजरायली पीएम 'घिर गए हैं और हताश हैं', और जब तक ट्रंप उनकी मदद नहीं करते, वे सरकार नहीं बना सकते.
कार्लसन ने लिखा, 'एकलौता मिलिट्री ऑप्शन न्यूक्लियर अटैक है.' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ट्रंप प्रशासन ने फरवरी से चुपचाप अमेरिकी परमाणु नीति (न्यूक्लियर डॉक्ट्रिन) में बदलाव किया है, ताकि जंग के मैदान में परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करना आसान हो सके.
कार्लसन ने अपने इस डरावने दावे में भारत, पाकिस्तान और अन्य देशों को भी घसीट लिया है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका हमला करता है, तो फारस की खाड़ी (पर्शियन गल्फ) में रेडियोएक्टिव पॉल्यूशन फैल जाएगा. इससे रूस, भारत, पाकिस्तान और उत्तर कोरिया भी परमाणु संघर्ष में शामिल हो सकते हैं, जिससे तीसरा विश्व युद्ध छिड़ सकता है.
उन्होंने लिखा,'पहले परमाणु हमले के बाद, तीसरा विश्व युद्ध होना तय है. वह जंग छोटी, लेकिन निर्णायक होगी.' हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि बाकी देश इसमें क्यों शामिल होंगे.
कार्लसन कई महीनों से इस तरह की चेतावनी देते आ रहे हैं. ट्रंप और उनके मेक अमेरिका ग्रेट अगेन (MAGA) समर्थकों के जोखिम भरे रवैये के बावजूद, पॉलिसी मेकर्स के हलकों में उनकी इस ताजा पोस्ट का मजाक उड़ाया गया है. असल में, उनके दावों की गंभीरता और उन्हें साबित करने के लिए दिए गए सबूतों के बीच बहुत बड़ा अंतर है.
व्हाइट हाउस या पेंटागन, किसी ने भी न्यूक्लियर पॉलिसी में किसी बदलाव की बात नहीं कबूली है. कार्लसन ने किसी भी अमेरिकी अधिकारी का नाम नहीं लिया है, न ही कोई दस्तावेजी सबूत पेश किया है. वे अपने बड़े दावों के लिए सिर्फ अज्ञात सूत्रों पर निर्भर हैं.
खुद ट्रंप ने अक्टूबर में 'न्यूजमैक्स' से कहा था,'मैं न्यूक्लियर हथियारों का इस्तेमाल नहीं करूंगा. हमें ऐसा करने की जरूरत ही नहीं है.' फिर भी, अमेरिका के कट्टरपंथी कई महीनों से ईरान के साथ जल्द ही परमाणु टकराव होने की संभावना जता रहे हैं. वे बार-बार यह डर फैला रहे हैं कि ईरान कुछ ही हफ्तों या महीनों में परमाणु हथियार हासिल कर सकता है. मार्च में कार्लसन का 'नेशनल काउंटरटेररिज्म सेंटर' के पूर्व डायरेक्टर जो केंट के साथ हुआ इंटरव्यू काफी कुछ खुलासा करने वाला रहा था.
जब पूछा गया कि क्या ईरान परमाणु हथियार हासिल करने के कगार पर था, तो केंट ने जवाब दिया, 'नहीं, तीन हफ्ते पहले जब यह सब शुरू हुआ, तब भी वे ऐसा नहीं कर रहे थे, और जून में भी ऐसी कोई बात नहीं थी.' उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी कोई खुफिया जानकारी नहीं है, जिससे पता चले कि ईरान परमाणु हथियार न बनाने की अपनी नीति को छोड़ने वाला है.
ईरान के कुछ ही हफ्तों में परमाणु हथियार हासिल कर लेने का अमेरिकी डर अब एक अलग ही रूप ले चुका है. इंटरनेट पर एक मीम काफी वायरल हो रहा है, जिसमें 1750 ईसा पूर्व की एक पुराने पत्थर की तख्ती दिखाई गई है, जिस पर लिखा है,'ईरान परमाणु हथियार बनाने से बस कुछ ही हफ्ते दूर है.'
एक और एडिशन में पुरातत्वविदों को 3,000 साल पुरानी एक तख्ती मिलती है, जिसमें चेतावनी दी गई है कि फारस (ईरान) परमाणु बम बनाने से बस कुछ ही हफ्ते दूर है.
कार्लसन पर यह आरोप भी है कि परमाणु खतरे को लेकर शोर मचाने के पीछे उनका अपना कोई एजेंडा है. कभी ट्रंप के सबसे बड़े मीडिया समर्थकों में से एक रहे कार्लसन, अब MAGA आंदोलन के भीतर सबसे बड़े आलोचकों में से एक बन गए हैं. ट्रंप से उनकी दूरी, खासकर इजरायल और ईरान के मुद्दों पर, काफी साफ तौर पर देखी जा सकती है.
कार्लसन का तर्क है कि अमेरिका को अपनी विदेश नीति को इजरायल के हितों के अधीन नहीं करना चाहिए और न ही उसे मिडिल ईस्ट के किसी और युद्ध में घसीटा जाना चाहिए. उन्होंने यूएस में नेतन्याहू के प्रभाव की आलोचना करते हुए, अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप पर सवाल उठाए हैं, और रिपब्लिकन रूढ़िवादियों की इस पुरानी धारणा को चुनौती दी है कि इजरायल का समर्थन करना एक अटूट आस्था है.
यहां बड़े वैचारिक मतभेद भी देखने को मिलते हैं. 'MAGA' आंदोलन का एक धड़ा मानता है कि 'अमेरिका फर्स्ट' का मतलब है विदेशी मामलों में उलझने से बचना, खासकर इजरायल के लिए लड़े जाने वाले युद्धों से दूर रहना. वहीं, दूसरा धड़ा इजरायल के समर्थन को अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा और रूढ़िवादी राजनीति का एक अहम हिस्सा मानता है. इस लड़ाई में कार्लसन एक सेंटरप्वॉइंट बन गए हैं. आलोचकों का आरोप है कि वे इजरायल-विरोधी साजिशों को बढ़ावा दे रहे हैं, जबकि उनके समर्थकों का मानना है कि वे बनी-बनाई सोच को चुनौती दे रहे हैं.