केंद्र सरकार की तरफ से पब्लिक सेक्टर के बैंकों में विदेशी निवेश (FDI) की लिमिट बढ़ाने का विचार किया जा रहा है. मौजदूा समय में यह लिमिट 20 प्रतिशत है, लेकिन आने वाले समय में यह बढ़कर 49 प्रतिशत तक हो सकती है. अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इसको लेकर वित्त मंत्रालय ने एक कैबिनेट नोट तैयार किया है और इस पर दूसरे मंत्रालयों की राय मांगी है. बताया जा रहा है कि सरकार के इस प्रस्ताव पर रिजर्व बैंक (RBI) की तरफ से सहमति जताई गई है. आरबीआई ने हाल ही में सरकार को चिट्ठी लिखकर सरकारी बैंकों में एफडीआई की लिमिट को बढ़ाने पर विचार करने की सिफारिश की है.
फिलहाल प्राइवेट सेक्टर के बैंकों में एफडीआई की लिमिट 74 प्रतिशत है, जबकि पीएसयू बैंकों में यह लिमिट 20 प्रतिशत तक सीमित है. देश के 12 सरकारी बैंकों में एसबीआई में सबसे ज्यादा 11.07 प्रतिशत का विदेशी निवेश है. इसके बाद केनरा बैंक में 10.55 प्रतिशत एफडीआई (FDI) की हिस्सेदारी है. हालांकि, इसको लेकर अब तक वित्त मंत्रालय या आरबीआई की तरफ से किसी तरह का ऑफिशियल ऐलान नहीं किया गया है. ग्लोबल अनिश्चितताओं के बीच देश में एफडीआई (FDI) का प्रवाह मजबूत बना हुआ है.
उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के आंकड़ों के अनुसार, मौजूदा फाइनेंशियल ईयर 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में एफडीआई प्रवाह 6 प्रतिशत बढ़कर 19.81 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जबकि पिछले फाइनेंशियल ईयर की समान अवधि में यह 18.62 अरब डॉलर था. मंथली बेस पर अप्रैल में एफडीआई करीब दोगुना होकर 12.1 अरब डॉलर रहा, जो एक साल पहले इसी महीने 6.6 अरब डॉलर था. इसके बाद मई में इसमें गिरावट आई और यह घटकर 2.8 अरब डॉलर रह गया. जून में इसमें फिर से बढ़त देखी गई और यह 4.91 अरब डॉलर पर पहुंच गया.
अलग-अलग सेक्टर की बात करें तो सर्विस सेक्टर ने सबसे ज्यादा 7.04 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित किया. इसके बाद कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2.84 अरब डॉलर, बिजनेस सेक्टर में 1.92 अरब डॉलर, नॉन-कनवेंशनल एनर्जी में 1.24 अरब डॉलर और ऑटोमोबाइल सेक्टर में 62.2 करोड़ डॉलर का इनवेस्टमेंट आया. कुल एफडीआई अप्रैल-जून 2026-27 तिमाही के दौरान करीब 22 प्रतिशत बढ़कर 30.65 अरब डॉलर पर पहुंच गया. तमिलनाडु सबसे ज्यादा FDI के साथ 5.95 अरब डॉलर पर पहुंच गया. इसके बाद महाराष्ट्र में 4.22 अरब डॉलर, दिल्ली में 2.67 अरब डॉलर, कर्नाटक में 2.11 अरब डॉलर और गुजरात में 1.3 अरब डॉलर का विदेशी निवेश आया.
सरकारी बैंकों में एफडीआई बढ़ने से विदेशी पूंजी का बड़ा सहारा मिलेगा. इससे बैंकों का कैपिटल बेस मजबूत होगा और आम आदमी, किसानों और इंडस्ट्रीज को आसानी से लोन मिल सकेगा. इसके अलावा विदेशी निवेश आने से बैंकों में आधुनिक तकनी और बेहतर साइबर सिक्योरिटी सिस्टम आएगा. इससे डिजिटल बैंकिंग सर्विस पहले से तेज और सिक्योर होगी. विदेशी निवेश बढ़ने से एनपीए का प्रेशर कम होगा. मजबूत बैंक देश के इंफ्रास्ट्रक्चर के बड़े प्रोजेक्ट्स को आसानी से फंड कर सकेंगे.